शोभना शर्मा। राजस्थान के अजमेर जिले में एक युवक ने मृत्यु के बाद भी मानवता की अनोखी मिसाल पेश की है। यह युवक जीवन की जंग हार गया, लेकिन उसके अंग कई जरूरतमंद मरीजों को नई जिंदगी दे गए। युवक के परिजनों के सहमति देने के बाद अस्पताल प्रशासन ने समय पर अंगदान की प्रक्रिया शुरू की और विशेष मेडिकल कॉरिडोर बनाकर अंगों को जयपुर और चेन्नई तक पहुंचाया गया।
युवक का इलाज और ब्रेन डेड घोषित
जानकारी के अनुसार, युवक अजमेर जिले के करनोज, केकड़ी क्षेत्र का निवासी था। 16 सितंबर को उसे सिरदर्द और उल्टी की शिकायत हुई। पहले उसे केकड़ी के अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन हालत बिगड़ने पर अजमेर के जवाहरलाल नेहरू अस्पताल रेफर कर दिया गया। यहां लगातार इलाज चलता रहा, लेकिन स्थिति गंभीर होती गई। आखिरकार चिकित्सकों ने उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया।
पिता ने लिया बड़ा फैसला
ब्रेन डेड घोषित होने के बाद परिजनों के सामने कठिन स्थिति उत्पन्न हुई। लेकिन युवक के पिता ने समाज के लिए एक बड़ा और प्रेरक निर्णय लेते हुए बेटे के अंगदान की सहमति दी। उनके इस फैसले ने कई परिवारों को नई उम्मीद दी। अस्पताल प्रशासन ने अंगदान की प्रक्रिया तेजी से शुरू करवाई और विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम सक्रिय हो गई।
अंगदान की प्रक्रिया और मेडिकल कॉरिडोर
अस्पताल प्रशासन और पुलिस ने मिलकर अंगों के सुरक्षित परिवहन के लिए विशेष मेडिकल कॉरिडोर तैयार किया। अजमेर से अंगों को सुरक्षित निकालकर एंबुलेंस के जरिए जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल (SMS Hospital) पहुंचाया गया। इस बीच ट्रैफिक पुलिस ने भी एंबुलेंस को रास्ता देने के लिए विशेष इंतजाम किए।
जयपुर पहुंचने के बाद वहां विशेषज्ञ टीम ने अंग प्रत्यारोपण की प्रक्रिया पूरी की। इनमें लिवर और लंग्स शामिल थे। वहीं, युवक का हार्ट विशेष एयर एंबुलेंस से चेन्नई भेजा गया, जहां एक विदेशी मरीज में उसका प्रत्यारोपण किया जाना है। चिकित्सकों का कहना है कि समय पर अंग का परिवहन और उचित तैयारी से कई जीवन बचाए जा सकते हैं।
समाज में सराहना और प्रेरणा
युवक के अंगदान की इस पहल ने समाज को झकझोर दिया और साथ ही प्रेरणा भी दी है। अजमेर के अस्पताल प्रशासन और चिकित्सकों ने युवक के पिता के निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे फैसले दुर्लभ होते हैं और समाज के लिए उदाहरण बन जाते हैं।
चिकित्सकों ने बताया कि मृत्यु के बाद भी किसी व्यक्ति के अंग जरूरतमंद मरीजों को दान कर कई लोगों को नई जिंदगी दे सकते हैं। यही कारण है कि अंगदान को सबसे बड़ा दान माना जाता है। इस युवक की कहानी ने यह संदेश दिया कि मृत्यु के बाद भी इंसान की पहचान मानवता के रूप में कायम रह सकती है।
चिकित्सकों का बयान
जयपुर के चिकित्सकों ने बताया कि अंगदान के लिए समय सबसे बड़ी चुनौती होती है। अगर अंगों को निर्धारित समय सीमा में सुरक्षित पहुंचा दिया जाए तो कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं। इस मामले में अजमेर से जयपुर और अजमेर से किशनगढ़ एयरपोर्ट तक बनाए गए मेडिकल कॉरिडोर ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
समाज के लिए सीख
इस घटना ने न केवल कई जिंदगियां बचाईं बल्कि समाज को भी अंगदान के महत्व से अवगत कराया। आमतौर पर लोग मृत्यु के बाद अंगदान के प्रति अनजान रहते हैं या संकोच करते हैं, लेकिन इस युवक के पिता के साहसिक निर्णय ने साबित किया कि यह कदम मानवता की सबसे बड़ी सेवा है।


