शोभना शर्मा। राजस्थान जल्द ही देश को एक और बड़ी सौगात देने जा रहा है। कोटा जिले के मुकुन्दरा हिल्स टाइगर रिजर्व में देश की पहली 8-लेन टनल का निर्माण अंतिम चरण में पहुंच चुका है। यह टनल दिल्ली-मुंबई एटलेन एक्सप्रेस-वे (Bharatmala Project) का अहम हिस्सा है। नवंबर अंत तक काम पूरा होते ही दिसंबर से कोटा से दिल्ली तक वाहनों का निर्बाध संचालन संभव हो जाएगा। इससे न केवल राजस्थान बल्कि मध्य भारत और दिल्ली की कनेक्टिविटी और मजबूत होगी।
एक्सप्रेस-वे का आखिरी पैकेज
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर कोटा से दिल्ली के बीच पैकेज नंबर 10 की लंबाई 26.5 किलोमीटर है। इसमें हाईटेंशन पावर लाइनों की शिफ्टिंग और मार्ग की फिनिशिंग का काम चल रहा है। एक लाइन की शिफ्टिंग सितंबर में शटडाउन लेकर की जा रही है और दूसरी लाइन का काम भी जल्द शुरू होगा। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के अधिकारियों के अनुसार, नवंबर अंत तक इस पैकेज का काम पूरा कर लिया जाएगा।
वर्तमान में कोटा से बूंदी जिले के लबान तक ही एक्सप्रेस-वे पर सफर संभव है। इसके बाद यात्रियों को कोटा-लालसोट मेगा हाईवे का उपयोग करना पड़ता है, जो लगभग 60 किमी लंबा है। कुशतला से फिर एक्सप्रेस-वे दोबारा शुरू होता है और दिल्ली तक निर्बाध जुड़ाव देता है। पैकेज-10 पूरा होते ही यह बाधा समाप्त हो जाएगी।
टनल निर्माण में आई चुनौतियां
मुकुन्दरा हिल्स टाइगर रिजर्व से गुजर रही 4.9 किलोमीटर लंबी टनल इस परियोजना का सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा है। यहां कच्ची पहाड़ी और पहाड़ी नालों के कारण निर्माण कार्य में रुकावट आई। कच्चा पत्थर मिलने से सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए काम को धीमी गति से आगे बढ़ाना पड़ा। इसके चलते टनल का काम फरवरी 2026 तक बढ़ाया गया है।
हालांकि मुख्य मार्ग का फिनिशिंग कार्य और शेष हिस्सों का निर्माण नवंबर तक पूरा कर लिया जाएगा। इससे कोटा से दिल्ली तक यात्रा दिसंबर में संभव हो जाएगी, जबकि टनल का पूरा काम तय समय पर 2026 में समाप्त होगा।
देरी की वजहें
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे का निर्माण वर्ष 2019 में शुरू हुआ था और इसे 2023 तक पूरा करने का लक्ष्य था। लेकिन विभिन्न स्थानों पर पर्यावरणीय स्वीकृति, वन्यजीव संरक्षित क्षेत्रों की मंजूरी, और तकनीकी चुनौतियों के कारण परियोजना में देरी हुई। मुकुन्दरा, रणथंभौर और रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व की सीमाओं के कारण निर्माण अनुमतियों में अधिक समय लगा। इसके अलावा अतिवृष्टि से निर्माण स्थल तक सामग्री पहुंचाने के रास्ते भी प्रभावित हुए।
स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर फायदे
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे देश का सबसे लंबा एटलेन हाईवे है। इसके पूरा होने से दिल्ली, मुंबई, कोटा और जयपुर जैसे प्रमुख शहरों के बीच यात्रा का समय काफी घटेगा। कोटा के किसानों और व्यापारियों को सीधे लाभ मिलेगा, क्योंकि उनकी उपज और सामान दिल्ली-मुंबई के बाजारों तक तेज़ी से पहुंच सकेगा। साथ ही, पर्यटन के क्षेत्र में भी तेजी आएगी। रणथंभौर, मुकुन्दरा और रामगढ़ विषधारी जैसे टाइगर रिजर्व तक पहुंचना पर्यटकों के लिए और आसान हो जाएगा।
दिसंबर से दिल्ली तक सरपट सफर
नवंबर अंत तक पैकेज-10 का कार्य समाप्त होते ही दिसंबर की शुरुआत से कोटा से दिल्ली तक निर्बाध यात्रा संभव होगी। वाहन चालक अब बिना किसी रुकावट सीधे दिल्ली तक सफर कर सकेंगे। एक्सप्रेस-वे के पूरे होने से न केवल यात्रा समय घटेगा बल्कि पेट्रोल-डीजल की खपत भी कम होगी।


