शोभना शर्मा। झालावाड़ में हुए दर्दनाक स्कूल हादसे के बाद पीड़ित परिजनों को न्याय दिलाने की मांग पर चल रहा आंदोलन शुक्रवार को एक अहम मोड़ पर पहुंच गया। मृतक बच्चों के परिजनों की मांगों को लेकर सात दिनों से अनशन पर बैठे युवा नेता नरेश मीणा की तबीयत बिगड़ने लगी, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें जबरन उठाकर SMS अस्पताल जयपुर में भर्ती करवाया। पुलिस की इस कार्रवाई का नरेश मीणा के समर्थकों ने जमकर विरोध किया।
सातवें दिन बिगड़ी तबीयत
नरेश मीणा का अनशन लगातार सातवें दिन तक जारी था। भोजन और पानी छोड़ने के कारण उनकी सेहत तेजी से गिर रही थी। डॉक्टरों ने भी स्थिति गंभीर बताते हुए तत्काल इलाज की सलाह दी। पुलिस ने हस्तक्षेप करते हुए उन्हें अनशन स्थल से उठाकर SMS अस्पताल पहुंचाया, जहां ICU में भर्ती करवाया गया।
खाचरियावास ने तुड़वाया अनशन
SMS अस्पताल में भर्ती नरेश मीणा से मिलने पहुंचे पूर्व कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस नेता प्रताप सिंह खाचरियावास ने उनकी हालत देखकर उन्हें पानी पिलाया और अनशन तुड़वाया। खाचरियावास ने इस मौके पर कहा कि झालावाड़ स्कूल हादसे में मासूम बच्चों की जान चली गई, लेकिन सरकार ने पीड़ित परिवारों के साथ अन्याय किया है। उन्होंने कहा कि बच्चों के परिजनों को बकरियां देकर सरकार ने उनका अपमान किया है, जिसकी निंदा हर स्तर पर की जानी चाहिए।
पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल
पूर्व मंत्री खाचरियावास ने सरकार और पुलिस पर हमला बोलते हुए कहा,
“संविधान हमें आंदोलन और अनशन का अधिकार देता है। मासूम बच्चों के परिजनों को न्याय दिलाने के लिए नरेश मीणा और राजेंद्र गुढ़ा शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे थे। फिर सरकार उन्हें लाठी-डंडों के जोर से क्यों उठाना चाहती है?”
उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से सीधे सवाल पूछते हुए कहा कि सरकार पीड़ितों को न्याय दिलाने की बजाय आंदोलनकारियों पर सख्ती कर रही है।
50 लाख मुआवजे की मांग
खाचरियावास ने चेतावनी दी कि झालावाड़ मामले में मुख्यमंत्री को उचित कार्रवाई करनी होगी। उन्होंने कहा कि प्रत्येक पीड़ित परिवार को कम से कम 50 लाख रुपये मुआवजा दिया जाए। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि पीड़ित परिवारों को राहत देने की बजाय उन्हें अपमानित किया जा रहा है, जो बेहद निंदनीय है।
प्रताप सिंह का ट्वीट
पूर्व मंत्री प्रताप सिंह ने पुलिस की कार्रवाई को लेकर ट्वीट भी किया। उन्होंने लिखा कि नरेश मीणा जैसे युवा नेता, जो मासूम बच्चों के हक की लड़ाई लड़ रहे हैं, उन्हें ICU में भर्ती कराने की नौबत इसलिए आई क्योंकि सरकार उनकी आवाज सुनने के बजाय दमन का रास्ता अपना रही है।
समर्थकों का विरोध
नरेश मीणा के समर्थकों ने पुलिस कार्रवाई का विरोध करते हुए कहा कि सरकार आंदोलन को कुचलने की कोशिश कर रही है। उनका कहना है कि जब तक पीड़ित परिवारों को न्याय और उचित मुआवजा नहीं मिलेगा, आंदोलन जारी रहेगा।


