शोभना शर्मा। राजस्थान सरकार ने बुधवार को प्रशासनिक सुधार और समन्वय विभाग की ओर से किशनगढ़ उपखंड में सरकारी कार्यालयों का औचक निरीक्षण किया। इस कार्रवाई का मकसद सरकारी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना था। लेकिन निरीक्षण में जो तथ्य सामने आए, उन्होंने सरकारी कामकाज की हकीकत उजागर कर दी। जांच में सामने आया कि औसतन 65% सरकारी कर्मचारी अपनी ड्यूटी पर मौजूद ही नहीं थे।
औचक निरीक्षण से खुली लापरवाही की पोल
शासन सचिवालय, जयपुर से मिले विशेष निर्देशों के बाद उप शासन सचिव सूर्य बहादुर वर्मा के नेतृत्व में टीम सुबह 9:45 बजे किशनगढ़ पहुंची। वहां तहसील कार्यालय, एसडीएम कार्यालय, वाणिज्य कर विभाग, सरकारी अस्पताल और लोक निर्माण विभाग (PWD) जैसे प्रमुख दफ्तरों का निरीक्षण किया गया। टीम ने इन कार्यालयों की कार्यप्रणाली, उपस्थिति रजिस्टर और रिकॉर्ड की जांच की।
जांच के दौरान कर्मचारियों की उपस्थिति से जुड़े जो आंकड़े सामने आए, वे चौंकाने वाले थे। इससे साफ हुआ कि सरकारी कार्यालयों में कामकाज को लेकर गंभीर लापरवाही बरती जा रही है।
उपस्थिति रजिस्टरों में चौंकाने वाले आंकड़े
निरीक्षण टीम ने कुल 43 उपस्थिति रजिस्टरों की जांच की। इनमें गजेटेड और नॉन गजेटेड दोनों श्रेणी के अधिकारी-कर्मचारी शामिल थे।
गजेटेड अधिकारी: 34 में से केवल 20 ही अपनी सीट पर मौजूद मिले। यानी उपस्थिति केवल 58.82% रही, जबकि 14 अधिकारी ड्यूटी से नदारद थे।
नॉन गजेटेड कर्मचारी: 196 कर्मचारियों में से सिर्फ 67 कर्मचारी ही ड्यूटी पर मौजूद पाए गए। इनकी उपस्थिति महज 34.18% रही। यानी 129 कर्मचारी बिना सूचना के अनुपस्थित थे।
इस तरह औसतन करीब 65% कर्मचारी अपने कार्यस्थल पर अनुपस्थित पाए गए। यह न केवल सरकारी व्यवस्था की गंभीर खामी को दिखाता है, बल्कि यह भी बताता है कि आम जनता को समय पर सेवाएं क्यों नहीं मिल पातीं।
अनुशासनात्मक कार्रवाई की तैयारी
निरीक्षण के बाद प्रशासनिक सुधार विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि अनुपस्थित पाए गए सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर उच्च अधिकारियों को भेजी जा रही है।
निरीक्षण में यह भी पाया गया कि कई दफ्तरों में रजिस्टर और दस्तावेज व्यवस्थित तरीके से नहीं रखे गए थे। इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए टीम ने सभी विभागों को चेतावनी दी कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा पाई गई तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
जवाबदेही और पारदर्शिता पर जोर
इस औचक निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों के बीच जवाबदेही और अनुशासन की भावना को मजबूत करना है। राज्य सरकार चाहती है कि आम जनता को समय पर और बिना किसी परेशानी के सरकारी सेवाओं का लाभ मिल सके।


