मनीषा शर्मा। PM नरेंद्र मोदी के 75वें जन्मदिन को यादगार बनाने के लिए मध्यप्रदेश में वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी एक बड़ी पहल सामने आई। इस अवसर पर कूनो नेशनल पार्क (श्योपुर) से ‘धीरा’ नामक चीते को बुधवार को गांधी सागर अभयारण्य (मंदसौर) स्थानांतरित किया गया। यह कदम भारत में चीतों के पुनर्वास कार्यक्रम की दिशा में एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ है।
कूनो से गांधी सागर तक ‘धीरा’ का सफर
चीते ‘धीरा’ को कूनो नेशनल पार्क से करीब 200 किलोमीटर दूर गांधी सागर लाया गया। इस पूरी यात्रा के दौरान वन विभाग ने विशेष ट्रेंकुलाइजेशन प्रोटोकॉल का पालन किया। चीते को सुरक्षित पिंजरे में रखकर आधुनिक वाहनों के जरिए रवाना किया गया। जैसे ही ‘धीरा’ का काफिला केलवाड़ा कस्बे से गुजरा, स्थानीय लोगों की उत्सुकता चरम पर पहुंच गई। बाजारों और गलियों में लोग यह देखने जुट गए कि आखिर कौन-सा काफिला जा रहा है। जानकारी सामने आने के बाद चर्चा का विषय बन गया कि चीता गांधी सागर भेजा जा रहा है।
बारां वन विभाग की जिम्मेदारी
कूनो नेशनल पार्क की टीम ने चीते को मध्यप्रदेश-राजस्थान सीमा पर जैतपुरा (खंडेला) बॉर्डर पर बारां वन विभाग के सुपुर्द किया। इस मौके पर क्षेत्रीय वन अधिकारी दीपक चौधरी अपनी टीम के साथ मौजूद रहे। बारां विभाग ने चीते की सुरक्षा और निगरानी की जिम्मेदारी संभालते हुए उसे आगे रवाना किया।
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से होगा अंतिम चरण का सफर
बारां से सीमलिया तक चीते को लाने के बाद कोटा वन विभाग ने आगे की जिम्मेदारी उठाई। यहां से ‘धीरा’ को दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के जरिए गांधी सागर अभयारण्य ले जाया गया। इस दौरान वन अधिकारियों और प्रशासनिक टीम ने पूरी सतर्कता बरती, ताकि चीते को किसी प्रकार की परेशानी या खतरा न हो।
आमजन में उत्सुकता और चर्चा
धीरा के स्थानांतरण के दौरान स्थानीय लोगों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। जैसे ही खबर फैली कि चीते का काफिला गुजर रहा है, कस्बे के लोग सड़कों पर निकल आए। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने यह दृश्य देखा और गर्व महसूस किया कि उनके क्षेत्र से इस तरह का महत्वपूर्ण वन्यजीव संरक्षण कार्य गुजर रहा है।
अफ्रीकी चीतों का भारत में नया अध्याय
गौरतलब है कि भारत में अफ्रीकी चीतों का पहला घर कूनो नेशनल पार्क को माना जाता है। वर्ष 2022 में नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से लाए गए चीतों को यहां बसाया गया। इसके बाद धीरे-धीरे चीतों को अन्य अभयारण्यों और संरक्षित क्षेत्रों में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू हुई। गांधी सागर अभयारण्य इस दिशा में अगला प्रमुख केंद्र बन रहा है। इससे पहले भी दो चीतों को यहां भेजा जा चुका है और अब ‘धीरा’ की एंट्री से इस प्रयास को और मजबूती मिली है।


