मनीषा शर्मा। अजमेर के आनासागर वेटलैंड और ग्रीन बेल्ट क्षेत्र में बनाए गए ‘सेवन वंडर्स पार्क’ को ध्वस्त करने की कार्रवाई छठे दिन भी जारी रही। बुधवार को यह काम अपने अंतिम चरण में पहुंचा, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट में अजमेर विकास प्राधिकरण (ADA) ने 17 सितंबर तक इन संरचनाओं को हटाने का हलफनामा दिया था। कोर्ट के आदेश पर आज इस कार्रवाई की डेडलाइन खत्म हो रही है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शुरू हुई कार्रवाई
साल 2022 में लगभग 11 करोड़ रुपये की लागत से बनाए गए इन ‘सेवन वंडर्स’ को स्थानीय प्रशासन ने आनासागर वेटलैंड में अवैध निर्माण घोषित होने के बाद ध्वस्त करना शुरू किया। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि वेटलैंड और ग्रीन बेल्ट क्षेत्र में किसी भी तरह का पक्का निर्माण पर्यावरण के खिलाफ है और इसे तुरंत हटाया जाए। आदेश के बाद ADA ने 12 सितंबर से तोड़फोड़ की कार्रवाई शुरू की।
अब तक ध्वस्त हुए वंडर्स
कार्रवाई के तहत सबसे पहले 12 सितंबर को रोम का कोलोसियम गिराया गया। इसके बाद 13 सितंबर को मिस्र के पिरामिड, स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी और क्राइस्ट द रिडीमर को तोड़ा गया। चौथे दिन यानी 15 सितंबर को एफिल टावर को हटाया गया। अब छठे दिन ताजमहल और पीसा की झुकी हुई मीनार को ध्वस्त करने की प्रक्रिया जारी है। साथ ही, यहां जमा मलबे को हटाने का काम भी तेजी से किया जा रहा है।
इन वंडर्स की चारदीवारी और अन्य पक्के निर्माण को भी हटाना है, ताकि वेटलैंड का स्वरूप अपने मूल रूप में लौट सके। प्रशासन का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट की समयसीमा को देखते हुए काम तेजी से चल रहा है।
आगे क्या होगा?
आनासागर वेटलैंड और ग्रीन बेल्ट क्षेत्र में हुए निर्माण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में लगातार सुनवाई चल रही है। पिछली सुनवाई 4 अगस्त को होनी थी, लेकिन मामला लिस्टेड नहीं हो सका। अगली सुनवाई की तारीख अभी तय नहीं हुई है।
इससे पहले, कोर्ट के आदेश पर यहां बने फूड कोर्ट को ध्वस्त किया जा चुका था। अब सेवन वंडर्स को हटाने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। इसके अलावा, आगामी सुनवाई में वेटलैंड में करीब 39 करोड़ रुपये खर्च कर बनाए गए पाथवे, ग्रीन बेल्ट में बने आजाद पार्क और गांधी पार्क जैसे निर्माण कार्यों पर भी चर्चा होगी। कोर्ट तय करेगा कि इन निर्माणों को लेकर आगे क्या कार्रवाई की जाए।
अजमेर में पर्यावरण संरक्षण के लिए बड़ा कदम
वेटलैंड और ग्रीन बेल्ट जैसे प्राकृतिक क्षेत्रों में पक्के निर्माण पर्यावरणीय संतुलन को नुकसान पहुंचाते हैं। आनासागर झील और इसके आसपास का क्षेत्र शहर की पारिस्थितिकी के लिए महत्वपूर्ण है। यहां हर साल प्रवासी पक्षी आते हैं और प्राकृतिक संतुलन बना रहता है। इस कारण सुप्रीम कोर्ट ने इन संरचनाओं को हटाने का आदेश दिया, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए यह क्षेत्र सुरक्षित रह सके।


