मनीषा शर्मा। राजस्थान की राजनीतिक बहस में नया तीखा मोड़ आ गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा द्वारा विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी पर लगाए गए जासूसी कैमरों के आरोपों ने सत्तार और विपक्ष के बीच तनातनी तेज कर दी थी। डोटासरा के उन आरोपों के बाद भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पर पलटवार तेज कर दिया है और इसी कड़ी में राज्य के मंत्री मदन दिलावर ने कांग्रेस नेतृत्व पर तीखे शब्दों का प्रयोग करते हुए उन्हें “बेशर्म” और “चरित्रहीन” करार दिया। डोटासरा ने आरोप लगाया था कि विधानसभा में लगे कैमरों के जरिए महिला विधायकों की गतिविधियों और निजता पर नजर रखी जा रही है — इस आरोप ने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया।
मदन दिलावर ने प्रेसवार्ता और सार्वजनिक बयानों में कहा कि जो लोग दूसरों पर चरित्र संबंधी आरोप लगाते हैं, उन्हें पहले अपने आचरण और इतिहास पर नजर डालनी चाहिए। उन्होंने सीधे तौर पर कहा कि ऐसे बयान देने वाले लोग स्वयं चरित्रहीन होते हैं और लोगों के गांवों में पूछताछ कर उनके व्यवहार के प्रमाण मिल जाएंगे। दिलावर ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं पर भी तीखा हमला करते हुए राहुल गांधी का नाम लेकर तीखी टिप्पणी की; उन्होंने कटाक्ष करते हुए पूछा कि क्या राहुल गांधी के मंदिर जाने का मतलब यह होता है कि वे वहां लड़कियों को छेड़ने जाते हैं—यह टिप्पणी विपक्षी नेता के प्रति व्यक्तिगत आरोपों और भावना-उत्तेजक भाषा का उदाहरण मानी जा रही है।
भाजपा नेताओं की ओर से यह बयान कांग्रेस पर प्रतिशोध और बदनामी परोसने का प्रयास बताया जा रहा है। मदन दिलावर ने यह भी कहा कि कांग्रेस के कार्यालयों में कैमरे लगे होने के तथाकथित अनुमानों पर भी सवाल उठाने योग्य हैं और जोर देकर कहा कि विपक्ष अपनी आचरण समीक्षा करें। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि इस तरह के बयान दोनों पक्षों के बीच ध्रुवीकरण बढ़ाते हैं और सार्वजनिक बहस को मुद्दों से भटका कर व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप की ओर ले जाते हैं।
डोटासरा ने विधानसभा अध्यक्ष पर लगाए गए आरोपों में यह भी कहा था कि स्पीकर विशेष रूप से महिला विधायकों पर विशेष ध्यान देते हैं और रिकॉर्डिंग/निगरानी के माध्यम से उनकी निजी बातचीत और आचरण को देखा जा रहा है — इस दावे के बाद कांग्रेस ने इस मुद्दे को विधानसभा की गरिमा और महिला विधायकों की सुरक्षा का मामला बताया और गवर्नर से शिकायत की प्रक्रिया भी अपनाई गई। कांग्रेस का कहना रहा है कि ऐसी निगरानी लोकतांत्रिक संस्थाओं और विधायकों की निजता के सिद्धांतों के खिलाफ है।
वहीं सत्तार पक्ष ने डोटासरा के आरोपों को आधारहीन और विनोदपूर्ण बताया है। मुख्यमंत्री और भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह मुद्दाविहीन होकर सूर्खियों के लिए विवादग्रस्त बयान दे रही है। सरकार की ओर से यह दावा भी सामने आया कि विधानसभा में कैमरों का उपयोग पारदर्शिता और रिकॉर्डिंग हेतु होता है, न कि किसी व्यक्तिगत निगरानी के लिए—और यदि किसी तरह की अनियमितता सामने आती है तो प्रशासन और सचिवालय उपयुक्त कदम उठाएगा। इस गतिरोध के बीच विधानसभा सत्र में हंगामे और विरोध-प्रदर्शन भी देखे गए।
राजनीतिक माहौल पर असर और आगे की संभावनाएँ:
इस विवाद ने राजस्थान की राजनीति में दोनों दलों के बीच तनाव और व्यावहारिक असहमति को और बढ़ा दिया है। कांग्रेस ने मामले की संवैधानिक जांच की मांग उठाई है, जबकि भाजपा इसे विपक्ष की रणनीति करार दे रही है। विशेषज्ञों के अनुसार अगर मामला बढ़ता है तो विधानसभा की कार्यवाही और विधायी प्रक्रियाओं पर प्रभाव पड़ेगा और मीडिया तथा सिविल समाज भी इस विषय पर तेज़ी से प्रतिक्रिया दे सकते हैं। फिलहाल जनता और महिला समूह भी इस मुद्दे पर संवेदनशील बने हुए हैं, क्योंकि निजता और महिला सम्मान का प्रश्न राजनीति से आगे सामाजिक बहस का विषय बन गया है।


