शोभना शर्मा। राजस्थान के दौसा जिले में शनिवार को बड़ा हादसा सामने आया, जब सरकारी स्कूल के मिड डे मील खाने से 100 से ज्यादा बच्चों की अचानक तबीयत बिगड़ गई। बच्चों में उल्टी, पेट दर्द और बेचैनी जैसे लक्षण दिखे। यह घटना नांगल राजावतान उपखंड की ग्राम पंचायत चूड़ियावास स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय की है। घटना सामने आते ही स्कूल प्रशासन, चिकित्सा विभाग और जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया।
कैसे बिगड़ी बच्चों की हालत?
मामले की शुरुआती जानकारी के अनुसार, स्कूल में मिड डे मील के तहत रोटी और आलू की सब्जी परोसी गई थी। भोजन करने के कुछ ही समय बाद बच्चों को पेट दर्द, उल्टी और चक्कर आने लगे। स्कूल परिसर में बच्चे जमीन पर तड़पने लगे, जिससे अफरा-तफरी मच गई।
अचानक हुई इस घटना से शिक्षक और स्टाफ के हाथ-पांव फूल गए। आनन-फानन में सभी बच्चों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नांगल राजावतान ले जाया गया। वहां बच्चों का इलाज शुरू किया गया।
100 से ज्यादा बच्चे अस्पताल में भर्ती
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, करीब 100 बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इनमें से 16 बच्चों की हालत गंभीर बताई जा रही है। गंभीर रूप से बीमार बच्चों को प्राथमिक उपचार देने के बाद जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया है। अस्पताल पहुंचते ही परिजनों की भीड़ उमड़ गई और वहां भारी अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
परिजनों और ग्रामीणों में आक्रोश
बच्चों की तबीयत बिगड़ने की खबर मिलते ही परिजन भागे-भागे अस्पताल पहुंचे। कई लोग अपने बच्चों को देखकर भावुक हो उठे। ग्रामीणों का आरोप है कि मिड डे मील में परोसी गई आलू की सब्जी से ही बच्चों की हालत बिगड़ी है। उनका कहना है कि स्कूल प्रशासन और भोजन बनाने वाली संस्था की बड़ी लापरवाही सामने आई है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों।
दौसा के प्रशासनिक अधिकारियों का दौरा
सूचना मिलते ही अतिरिक्त जिला कलक्टर रामस्वरूप चौहान, सीबीईओ सत्यनारायण मीणा, नांगल राजावतान थानाधिकारी हुसैन अली और कार्यवाहक तहसीलदार अजय मधुकर सहित कई प्रशासनिक अधिकारी अस्पताल पहुंचे। उन्होंने बच्चों की हालत के बारे में डॉक्टरों से जानकारी ली और स्वास्थ्यकर्मियों को इलाज में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतने के सख्त निर्देश दिए।
जांच के आदेश
अतिरिक्त जिला कलक्टर ने आश्वासन दिया है कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। फूड सैंपल लेकर लैब में जांच के लिए भेजे गए हैं। प्रारंभिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि बच्चों की तबीयत बिगड़ने की असली वजह क्या थी।
मिड डे मील पर सवाल
इस घटना के बाद मिड डे मील की गुणवत्ता और निगरानी को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार बच्चों को परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता सही नहीं होती। इस बार यह बड़ी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती थी।
बच्चों की हालत में सुधार
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि भर्ती बच्चों का लगातार इलाज किया जा रहा है। जिनकी हालत गंभीर है, उन्हें विशेष निगरानी में रखा गया है। डॉक्टरों का कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है और अधिकांश बच्चों की हालत में सुधार हो रहा है।


