शोभना शर्मा। राजस्थान सरकार ने उज्ज्वला योजना और मुख्यमंत्री रसोई गैस सब्सिडी योजना को और ज्यादा पारदर्शी बनाने के लिए एक अहम फैसला लिया है। अब राज्य में एलपीजी सिलेंडर की डिलीवरी सिर्फ तभी होगी जब लाभार्थी के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर ओटीपी आएगा और वह सत्यापित होगा। इसका सीधा मतलब है कि अब कोई दूसरा व्यक्ति किसी महिला या एनएफएसए कार्डधारक की सब्सिडी पर सिलेंडर नहीं ले सकेगा।
सरकार का मानना है कि यह कदम योजनाओं को फर्जीवाड़ा मुक्त करेगा और हर पात्र परिवार तक सरकार की ओर से दी जाने वाली आर्थिक मदद सीधे और सुरक्षित तरीके से पहुंचेगी।
सब्सिडी वितरण का नया सुरक्षा कवच
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि अब एलपीजी एजेंसियों को नए नियमों का पालन करना होगा। एलपीजी सिलेंडर की डिलीवरी सिर्फ लाभार्थी के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर आए ओटीपी दर्ज करने के बाद ही होगी। इसका उद्देश्य है कि जो सब्सिडी सरकार द्वारा दी जा रही है, वह सिर्फ वास्तविक पात्र को ही मिले।
राजस्थान में एक करोड़ नौ लाख तीन हजार राशन कार्डधारक हैं, जिनमें से लगभग 70 लाख परिवारों की एलपीजी आईडी राशन कार्ड से पहले ही लिंक हो चुकी है। सरकार चाहती है कि यह सब्सिडी किसी भी प्रकार की गड़बड़ी से मुक्त होकर पात्र लोगों तक पहुँचे।
उज्ज्वला और मुख्यमंत्री गैस सिलेंडर योजना की शर्तें
योजना के तहत एक राशन कार्ड पर प्रति माह अधिकतम एक और पूरे वर्ष में 12 रिफिल पर ही सब्सिडी का लाभ दिया जाएगा। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना से जुड़े लाभार्थियों को राज्य सरकार द्वारा प्रति सिलेंडर 106 रुपये की सब्सिडी दी जाती है, जबकि एनएफएसए लाभार्थियों को लगभग 406 रुपये की सब्सिडी मिलती है।
वर्तमान समय में उज्ज्वला और मुख्यमंत्री गैस सिलेंडर योजना के तहत प्रतिमाह लगभग 29 से 30 लाख परिवार सिलेंडर रिफिल करवाते हैं। इन परिवारों को राज्य सरकार की ओर से प्रतिमाह औसतन 68 से 70 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी जाती है। यह राशि प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) के माध्यम से सीधे खातों में जाती है।
फर्जीवाड़ा रोकने की कवायद
अब तक कई बार यह शिकायतें सामने आती रही हैं कि लाभार्थियों की जानकारी का दुरुपयोग करके कोई और व्यक्ति सब्सिडी वाले सिलेंडर ले जाता है। नई व्यवस्था से यह समस्या पूरी तरह खत्म हो जाएगी क्योंकि बिना ओटीपी के सिलेंडर की डिलीवरी संभव नहीं होगी।
अतिरिक्त खाद्य आयुक्त पूनम सागर ने इस संबंध में तीनों तेल कंपनियों के राज्य स्तरीय समन्वयकों को पत्र लिखकर नए नियमों का पालन करने के निर्देश दिए हैं।
पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी
अधिकारियों का कहना है कि ओटीपी आधारित डिलीवरी से योजनाओं की पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों बढ़ेंगी। सरकार चाहती है कि सब्सिडी की राशि सिर्फ वास्तविक लाभार्थियों तक पहुँचे और किसी भी तरह की अनियमितता न हो। चूंकि योजनाओं के तहत प्रतिमाह करोड़ों रुपये खर्च होते हैं, इसलिए यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि यह धनराशि सही व्यक्ति के हाथों में ही पहुँचे।
महिलाओं और गरीब परिवारों को सीधा लाभ
उज्ज्वला योजना का मकसद महिलाओं को धुएँ से मुक्ति दिलाकर उनकी सेहत और जीवन स्तर में सुधार करना है। वहीं मुख्यमंत्री गैस सब्सिडी योजना राज्य के गरीब परिवारों को राहत देती है। नई व्यवस्था से अब लाभार्थियों को इस बात की चिंता नहीं होगी कि उनकी सब्सिडी पर कोई और फायदा उठा रहा है।
सरकार की मंशा
राज्य सरकार की मंशा साफ है कि हर पात्र परिवार को सीधे और पारदर्शी तरीके से सब्सिडी का लाभ मिले। नए नियम से यह सुनिश्चित होगा कि रसोई तक पहुँचने वाली यह राहत अब सिर्फ उसी परिवार की होगी, जिसके लिए योजना बनाई गई है।
सरकार का दावा है कि इस कदम से अनियमितताओं पर पूरी तरह से रोक लगेगी और हर रुपया सही हाथों में पहुँचेगा। यह व्यवस्था न केवल पारदर्शिता सुनिश्चित करेगी बल्कि योजनाओं में जनता का भरोसा भी मजबूत करेगी।


