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SMS अस्पताल में डॉक्टरों का धरना जारी: NMC नोटिफिकेशन और बायोमेट्रिक सैलरी सिस्टम पर विवाद

SMS अस्पताल में डॉक्टरों का धरना जारी: NMC नोटिफिकेशन और बायोमेट्रिक सैलरी सिस्टम पर विवाद

मनीषा शर्मा। जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल में मेडिकल कॉलेज के फैकल्टी डॉक्टरों का धरना मंगलवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। इस आंदोलन की अगुवाई राजस्थान मेडिकल कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन (RMCTA) कर रही है। एसोसिएशन का कहना है कि सरकार ने नेशनल मेडिकल कमिशन (NMC) द्वारा जारी किए गए नोटिफिकेशन का गलत अर्थ निकालकर फैकल्टी डॉक्टरों के खिलाफ कदम उठाए हैं।

फैकल्टी नियुक्ति को लेकर आपत्ति

एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा कि सरकार ग्रुप-2 के डॉक्टरों को सीधे फैकल्टी मेम्बर नियुक्त करने की तैयारी कर रही है, जबकि NMC का आदेश केवल योग्यता तय करने तक ही सीमित है। एसोसिएशन की ओर से एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. प्रवीण जोशी ने बताया— “NMC के नोटिफिकेशन में स्पष्ट है कि ग्रुप-2 के डॉक्टर असिस्टेंट और एसोसिएट प्रोफेसर के लिए आवश्यक योग्यता पूरी करते हैं। लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि सरकार सीधे उन्हें फैकल्टी नियुक्त कर दे। नियुक्ति की प्रक्रिया आरपीएससी (RPSC) जैसी संस्थाओं के जरिए ही होनी चाहिए।”

डॉ. जोशी ने सवाल उठाया कि जब राज्य में प्रोफेसर, एसोसिएट और असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर भर्ती RPSC की प्रतियोगी परीक्षाओं के जरिए होती है, तो फैकल्टी नियुक्ति को दरकिनार कर सीधी भर्ती का रास्ता क्यों अपनाया जा रहा है? यदि सरकार ऐसा करना चाहती है तो पहले RPSC के नियमों में संशोधन करना चाहिए।

बायोमेट्रिक हाजिरी को सैलरी से जोड़ने का विरोध

धरने का दूसरा बड़ा कारण बायोमेट्रिक हाजिरी सिस्टम है। NMC ने हाल ही में फैकल्टी मेम्बर्स के लिए आधार-आधारित बायोमेट्रिक हाजिरी अनिवार्य की थी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि कोई भी फैकल्टी सदस्य एक साथ अलग-अलग कॉलेजों में सेवाएं न दे सके। डॉ. प्रवीण जोशी ने कहा— “बायोमेट्रिक हाजिरी का मकसद डुप्लीकेसी रोकना था। लेकिन राज्य सरकार ने इस नियम को वेतन से जोड़ दिया। अब अगर कोई फैकल्टी सदस्य आठ घंटे की उपस्थिति पूरी नहीं करता तो उसकी सैलरी काट ली जाएगी। यह बिल्कुल गलत है।” उन्होंने सवाल किया कि अगर सरकार डॉक्टरों के लिए यह नियम लागू करती है तो अन्य विभागों में क्यों नहीं? सचिवालय, पीएचईडी, पीडब्ल्यूडी और शिक्षा विभाग में भी बायोमेट्रिक उपस्थिति के आधार पर सैलरी काटी जानी चाहिए। केवल मेडिकल कॉलेज फैकल्टी को निशाना बनाना अनुचित है।

आंदोलन का कारण और डॉक्टरों की नाराजगी

डॉक्टरों का कहना है कि सरकार ने बिना चर्चा किए और बिना स्पष्ट नियम बनाए सीधे नोटिफिकेशन लागू कर दिया है। इससे न केवल फैकल्टी डॉक्टरों की कार्यशैली प्रभावित होगी बल्कि भविष्य की भर्ती प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े होंगे। धरने पर बैठे डॉक्टरों ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार की इस नीति से मेडिकल कॉलेजों में शिक्षण व्यवस्था चरमरा सकती है। योग्य डॉक्टरों को नियुक्ति प्रक्रिया से बाहर कर दिया जाएगा और सीधे नियुक्तियां कर दी जाएंगी, जिससे पारदर्शिता खत्म हो जाएगी।

NMC की मंशा और राज्य सरकार का कदम

NMC का उद्देश्य था कि मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी सदस्य ईमानदारी से और एक ही संस्थान में सेवाएं दें। लेकिन राज्य सरकार ने इसे वेतन कटौती से जोड़ दिया। यही कारण है कि फैकल्टी सदस्य नाराज हैं। उनका कहना है कि वेतन कटौती का नियम एकतरफा और भेदभावपूर्ण है।

स्वास्थ्य सेवाओं पर असर का खतरा

धरने के चलते SMS अस्पताल सहित राज्य के कई मेडिकल कॉलेजों की शिक्षण और चिकित्सा सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। डॉक्टरों का कहना है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों को नहीं माना तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। डॉक्टरों ने चेतावनी दी कि यदि यह स्थिति बनी रही तो मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं दोनों बुरी तरह प्रभावित होंगी। इससे न केवल छात्रों की पढ़ाई पर असर पड़ेगा बल्कि मरीजों को भी समय पर इलाज नहीं मिल पाएगा।

सरकार के लिए चुनौती

यह धरना राज्य सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। एक ओर सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर मेडिकल कॉलेजों के फैकल्टी सदस्य सड़कों पर हैं। डॉक्टरों का कहना है कि वेतन से जुड़ी सख्ती और सीधी नियुक्ति का नियम दोनों ही असंवैधानिक और अनुचित हैं। सरकार को तुरंत बातचीत कर समाधान निकालना चाहिए।

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