मनीषा शर्मा। राजस्थान के जोधपुर जिले के लूणी उपखंड कार्यालय के बाहर सोमवार को किसानों का गुस्सा खुलकर सामने आया। किसानों ने फसल बीमा की क्लेम राशि न मिलने के खिलाफ जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। उनका कहना था कि यदि समय रहते मुआवजा नहीं मिला तो उन्हें खेती छोड़ने पर मजबूर होना पड़ेगा और कई किसान आत्महत्या जैसे कदम भी उठा सकते हैं। किसानों ने साफ चेतावनी दी कि 23 सितंबर तक समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे उग्र आंदोलन करेंगे।
धरने में शामिल किसानों ने बताया कि उन्होंने समय पर फसल बीमा प्रीमियम जमा कराया था। इसके बावजूद साल 2023-24 की खरीफ फसल का 92 प्रतिशत हिस्सा खराब होने के बाद भी अब तक बीमा राशि का क्लेम नहीं मिला है।
बीज और डीजल के लिए भटक रहे किसान
प्रदर्शन कर रहे किसानों ने कहा कि बीमा राशि न मिलने से वे पूरी तरह आर्थिक संकट में फंस गए हैं। यदि इस बार भी फसल खराब हो गई तो अगली बुवाई के लिए उनके पास बीज खरीदने तक के पैसे नहीं होंगे। ट्रैक्टरों में डीजल डालना भी मुश्किल हो जाएगा। ऐसे हालात में खेती करना नामुमकिन हो जाएगा।
किसानों का आरोप है कि बीमा कंपनियां और जिम्मेदार अधिकारी मिलीभगत कर किसानों को मुआवजे से वंचित कर रहे हैं। जबकि पटवारी की रिपोर्ट में साफ लिखा है कि खरीफ की फसल 92 प्रतिशत तक नष्ट हुई है। इसके बावजूद किसानों को राहत नहीं मिली।
जोधपुर कलेक्टर को बुलाने पर अड़े किसान
प्रदर्शनकारी किसान जिला कलेक्टर को मौके पर बुलाने की मांग पर अड़े रहे। उनका कहना था कि केवल आश्वासन से अब वे संतुष्ट नहीं होंगे। धरना स्थल पर लूणी, सतलाना, धांधिया, शिकारपुरा, सरेचा, विष्णुनगर, दूदिया, राजौर और रेंदड़ी समेत कई गांवों के किसान बड़ी संख्या में पहुंचे।
इन किसानों ने संयुक्त रूप से चेतावनी दी कि जब तक उन्हें फसल बीमा क्लेम राशि नहीं मिलती, वे चुप नहीं बैठेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन को किसानों की पीड़ा समझनी होगी, वरना आंदोलन और तेज किया जाएगा।
SDM ने दिलाया आश्वासन, धरना खत्म
काफी देर तक चली तनातनी के बाद प्रशासन की ओर से लूणी SDM मौके पर पहुंचे। उन्होंने किसानों को आश्वासन दिया कि 15 दिन के भीतर फसल बीमा क्लेम राशि दिलवाने की कार्रवाई शुरू की जाएगी। इसके बाद किसानों ने फिलहाल धरना खत्म किया, लेकिन स्पष्ट कहा कि यदि 23 सितंबर तक उन्हें राशि नहीं मिली तो वे फिर से आंदोलन करेंगे और इस बार और बड़ा प्रदर्शन होगा।
किसानों की बातों में झलकी नाराजगी
धरने में शामिल किसानों ने भावुक होकर कहा कि खेती उनकी आजीविका का मुख्य साधन है। यदि समय पर बीमा राशि नहीं मिली तो वे जीवन-यापन कैसे करेंगे? एक महिला किसान ने बताया कि घर का खर्च, बच्चों की पढ़ाई और खेती-बाड़ी सब इसी मुआवजे पर निर्भर है। दूसरी ओर कई बुजुर्ग किसानों ने कहा कि सरकारें केवल चुनावों में किसानों की बात करती हैं, लेकिन संकट के समय कोई मदद करने आगे नहीं आता।


