मनीष शर्मा। राजस्थान की महत्वाकांक्षी खाद्य सुरक्षा योजना (Food Security Scheme) में सरकार ने अब सख्ती बरतने का फैसला किया है। योजना के तहत अपात्र और लखपति गरीबों की सूची सार्वजनिक स्थलों पर चस्पा की जाएगी। यह सूची कलेक्ट्रेट, रसद कार्यालय, पंचायत समिति और नगर पालिका के दफ्तरों में लगाई जाएगी।
सरकार का उद्देश्य है कि अपात्र लोगों को इस योजना से बाहर किया जाए ताकि असली पात्र परिवारों तक योजना का लाभ पहुंच सके। खाद्य एवं रसद मंत्री सुमित गोदारा स्वयं इस गिवअप अभियान (Give-Up Campaign) की मॉनिटरिंग कर रहे हैं।
अपात्रों से वसूली होगी गेहूं की कीमत
मंत्री सुमित गोदारा ने स्पष्ट किया है कि अगर अपात्र व्यक्ति 31 अक्टूबर तक स्वेच्छा से योजना से बाहर नहीं आते हैं, तो 1 नवंबर से उनसे अब तक उठाया गया गेहूं बाजार दर पर वसूला जाएगा। यह दर 30.57 रुपये प्रति किलो तय की गई है। इसका सीधा मतलब है कि जो लोग जानबूझकर योजना का लाभ ले रहे हैं, उन्हें अब सख्त कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
डोर-टू-डोर सत्यापन की तैयारी
सरकार ने योजना के लाभार्थियों की पात्रता की जांच को लेकर नया सिस्टम तैयार किया है। प्रवर्तन अधिकारी अब डोर-टू-डोर जाकर लाभार्थियों की स्थिति का सत्यापन करेंगे। राशन की दुकान स्तर पर यह जानकारी जुटाई जाएगी कि कौन पात्र है और कौन अपात्र। इस प्रक्रिया में लखपति और अन्य अपात्र लोगों की सूची बनाकर सार्वजनिक कर दी जाएगी ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
खाद्य सुरक्षा योजना का वर्तमान परिदृश्य
राजस्थान की खाद्य सुरक्षा योजना देश की सबसे बड़ी योजनाओं में से एक है। इसके अंतर्गत गरीब परिवारों को कम दर पर गेहूं उपलब्ध कराया जाता है।
योजना में अधिकतम 4.46 करोड़ लोगों को जोड़ने की सीमा तय है।
अब तक 4.43 करोड़ लोगों के नाम जोड़े जा चुके हैं।
31.19 लाख नाम योजना से हटाए जा चुके हैं।
इनमें से 27.47 लाख नाम केवाईसी नहीं कराने की वजह से हटाए गए।
कुल मिलाकर 58.67 लाख नाम अब तक हट चुके हैं।
फिलहाल, 3.18 लाख और पात्र नाम योजना में जोड़े जा सकते हैं।
ये आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि सरकार लगातार योजना को पारदर्शी बनाने के प्रयास कर रही है और अपात्र लोगों को हटाने की प्रक्रिया तेज है।
जयपुर का हाल और बांरा की उपलब्धि
दिलचस्प बात यह है कि गिवअप अभियान में सबसे ज्यादा हो-हल्ला जयपुर जिले में हो रहा है, लेकिन प्रदर्शन के मामले में यह जिला चौथे स्थान पर है। इसके विपरीत संसाधनों की कमी वाला बांरा जिला अपात्रों के नाम हटाने की प्रक्रिया में पहले स्थान पर है। यह स्थिति इस ओर इशारा करती है कि प्रशासनिक इच्छाशक्ति और स्थानीय स्तर पर जागरूकता अभियान से बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।
सरकार की मंशा और जनता पर असर
राजस्थान सरकार की इस पहल से गरीबों के नाम पर अपात्र और सक्षम लोग जो लाभ ले रहे थे, उन्हें हटाकर वास्तव में जरूरतमंद परिवारों तक योजना का फायदा पहुंचाने का लक्ष्य है।
मंत्री सुमित गोदारा का कहना है कि अपात्र लोगों से वसूली करने और लखपति गरीबों की सूची सार्वजनिक करने का कदम केवल अनुशासनात्मक कार्रवाई ही नहीं बल्कि चेतावनी भी है। सरकार चाहती है कि लोग खुद आगे आकर गिवअप अभियान का हिस्सा बनें।


