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जोधपुर में आरएसएस की अखिल भारतीय समन्वय बैठक: शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों पर गहन मंथन

जोधपुर में आरएसएस की अखिल भारतीय समन्वय बैठक: शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों पर गहन मंथन

मनीषा शर्मा।   जोधपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की अखिल भारतीय समन्वय बैठक जारी है। यह तीन दिवसीय बैठक संघ के शताब्दी वर्ष (विजयादशमी 2025 से विजयादशमी 2026) के महत्वाकांक्षी कार्यक्रमों और योजनाओं के लिए रणनीति तय करने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बैठक में संघ प्रेरित 32 संगठनों के 320 प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं।

मोहन भागवत ने किए दर्शन

बैठक की शुरुआत से पहले संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने लाल सागर स्थित हनुमान मंदिर में दर्शन किए। यहां उन्होंने हनुमानजी की आरती कर सर्वजन की खुशहाली की कामना की। इसके बाद स्थानीय स्वयंसेवकों ने साफा पहनाकर उनका स्वागत किया। तत्पश्चात वे सीधे बैठक स्थल पहुंचे।

पंच परिवर्तन पर गहन चर्चा

आरएसएस के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने जानकारी दी कि बैठक में पंच परिवर्तन यानी – सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण अनुकूल जीवन, स्व-आधारित रचना और नागरिक कर्तव्य पालन पर गहन विमर्श किया जा रहा है। इसके साथ ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, जनजातीय क्षेत्रों का विकास और महिला सशक्तिकरण भी एजेंडे में शामिल हैं।

‘सक्षम’ संस्था की उपलब्धियां

बैठक में ‘सक्षम’ संस्था के कार्यों पर विशेष चर्चा की गई। संस्था ने हाल ही में सीमावर्ती क्षेत्र रामदेवरा में आयोजित नेत्र कुंभ में उल्लेखनीय कार्य किया। यह वृहद नेत्र शिविर 1 अगस्त से 2 सितंबर तक आयोजित हुआ था।

  • 1,00,797 लाभार्थियों की नेत्र जांच हुई।

  • 85,337 लोगों को निःशुल्क चश्मे वितरित किए गए।

  • 6,234 मरीजों को ऑपरेशन के लिए चिन्हित किया गया।

देशभर से आए श्रद्धालुओं के बीच इस प्रयास को काफी सराहना मिली और यह सामाजिक समरसता की दिशा में एक बड़ा प्रयोग साबित हुआ।

महिला सशक्तिकरण पर खास ध्यान

बैठक में महिला सशक्तिकरण को लेकर भी विस्तार से चर्चा हुई। राष्ट्र सेविका समिति की प्रमुख संचालिका शांता अक्का और प्रमुख कार्यवाहिका ए. सीता गायत्री की मौजूदगी में महिलाओं की समाज जीवन में बढ़ती सहभागिता को लेकर योजनाएं बनाई गईं। इनमें प्रशिक्षण कार्यक्रम, कौशल विकास और नेतृत्व क्षमता निर्माण पर विशेष जोर दिया गया।

कृषि और ग्रामीण विकास योजनाएं

बैठक में ग्रामीण विकास और कृषि को मजबूती देने के लिए दो बड़े मुद्दों पर चर्चा हुई—

  1. दुग्ध सहकारिता विकास: ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए दुग्ध संघों को बढ़ावा देने पर सहमति बनी।

  2. जैविक खेती को प्रोत्साहन: भारतीय किसान संघ ने किसानों को रासायनिक खेती से हटाकर जैविक पद्धति अपनाने की योजना पर काम शुरू करने की बात कही। इसके लिए प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग की योजना भी बनाई गई।

सामाजिक समस्याओं के समाधान पर फोकस

समाज में व्याप्त चुनौतियों पर भी विचार-विमर्श हुआ।

  • नशा उन्मूलन अभियान: विश्व हिंदू परिषद ने युवाओं में बढ़ते नशे की समस्या पर व्यापक जनजागरण अभियान चलाने की रणनीति रखी।

  • एनीमिया मुक्त भारत अभियान: भारत विकास परिषद द्वारा महिलाओं और बच्चों की सेहत सुधारने के लिए विशेष योजना पर चर्चा हुई।

  • स्वदेशी और आत्मनिर्भरता: स्वदेशी जागरण मंच ने स्वदेशी उत्पादों के उपयोग और आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में कार्ययोजना प्रस्तुत की।

पर्यावरण संरक्षण की झलक

बैठक स्थल पर पर्यावरण संरक्षण का जीवंत उदाहरण भी पेश किया गया।

  • भोजन और जलपान में केवल धातु पात्रों का उपयोग किया गया।

  • परिसर में प्लास्टिक मुक्त व्यवस्था रखी गई।

  • सजावट के लिए प्राकृतिक रंगोली और पौधों का सहारा लिया गया।

सांस्कृतिक धरोहर का प्रदर्शन

परिसर में रानी अबक्का द्वार, मीराबाई और अमृता देवी बिश्नोई के बलिदान को रंगोली और चित्रों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया। यह भारतीय संस्कृति और परंपराओं को जीवंत बनाए रखने का प्रयास था।

सेवा भावना का प्रत्यक्ष उदाहरण

बैठक स्थल पर दोपहर और शाम का भोजन वितरण नगर की शाखाओं के स्वयंसेवकों द्वारा निःस्वार्थ सेवा भाव से किया जा रहा है। यह संघ की सेवा परंपरा को प्रत्यक्ष रूप से प्रदर्शित करता है।

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