मनीषा शर्मा। राजस्थान की राजनीति में आने वाले दिनों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 20 सितंबर को राज्य का दौरा कर सकते हैं। हालांकि अभी तक आधिकारिक मंजूरी नहीं मिली है, लेकिन भाजपा ने इस संभावित कार्यक्रम को लेकर तैयारियां शुरू कर दी हैं।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, यह दौरा विशेष रूप से आदिवासी बहुल क्षेत्रों पर केंद्रित हो सकता है। राजस्थान में आदिवासी समुदाय लंबे समय से राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित करता रहा है और आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों में यह वोट बैंक निर्णायक साबित हो सकता है।
सेवा पखवाड़े के बीच दौरे की तैयारी
भाजपा इस समय 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक सेवा पखवाड़ा मना रही है। यह आयोजन प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन के अवसर पर किया जा रहा है। इस दौरान पार्टी कार्यकर्ता रक्तदान शिविर, स्वास्थ्य जांच, स्वच्छता अभियान और गरीबों को भोजन वितरण जैसे कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं।
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा है कि पीएम मोदी से समय मांगा गया है और इसी पखवाड़े के दौरान उनका दौरा संभव है। अभी अंतिम तारीख और स्थान की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन संकेत हैं कि यह कार्यक्रम आदिवासी इलाकों में हो सकता है।
क्यों अहम है आदिवासी समुदाय?
राजस्थान की राजनीति में आदिवासी समुदाय का महत्व किसी से छिपा नहीं है। प्रदेश के कई विधानसभा क्षेत्रों में आदिवासी वोट निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
आदिवासी बहुल इलाकों में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियां अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही हैं।
कांग्रेस लंबे समय से आदिवासी वोटों पर पकड़ बनाए हुए है।
भाजपा पिछले कुछ वर्षों से लगातार आदिवासी इलाकों में कार्यक्रम और योजनाएँ लाकर इस वोट बैंक को साधने का प्रयास कर रही है।
यदि प्रधानमंत्री मोदी वास्तव में इन क्षेत्रों का दौरा करते हैं, तो यह सीधे तौर पर आदिवासी मतदाताओं को संदेश देने का काम करेगा।
राजनीतिक हलचल और रणनीति
पीएम मोदी का यह संभावित दौरा सिर्फ औपचारिक कार्यक्रम नहीं माना जा रहा है, बल्कि इसके पीछे गहरी राजनीतिक रणनीति देखी जा रही है।
चुनावी तैयारी – राजस्थान में आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है।
कांग्रेस को चुनौती – कांग्रेस इस समय आदिवासी इलाकों में अपनी स्थिति मजबूत करने में जुटी है। मोदी का दौरा सीधे कांग्रेस की रणनीति को चुनौती देगा।
पार्टी कार्यकर्ताओं में ऊर्जा – सेवा पखवाड़े के बीच पीएम मोदी की मौजूदगी से भाजपा कार्यकर्ताओं का उत्साह दोगुना होगा।
सेवा पखवाड़ा और जनसंपर्क
सेवा पखवाड़ा सिर्फ एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं बल्कि जनता से जुड़ने का एक बड़ा मंच भी है। भाजपा इस पहल के जरिए समाज के हर तबके तक अपनी पहुंच बनाने की कोशिश कर रही है।
यदि इस पखवाड़े के दौरान प्रधानमंत्री मोदी राजस्थान आते हैं, तो इसका असर दोहरा होगा। एक तरफ सामाजिक और सेवा भाव की छवि मजबूत होगी और दूसरी तरफ चुनावी राजनीति में भाजपा को फायदा मिल सकता है।
सियासी खेल बदलने की संभावना
राजस्थान की राजनीति में इस समय कांग्रेस और भाजपा दोनों ही पूरी ताकत से जुटी हुई हैं। आदिवासी वोट बैंक पर पकड़ बनाने की कोशिश दोनों ही पार्टियों की रणनीति का अहम हिस्सा है।
यदि प्रधानमंत्री मोदी का दौरा तय होता है तो यह कांग्रेस के लिए चुनौतीपूर्ण होगा।
भाजपा इसे चुनावी मोड़ पर एक ‘गेम चेंजर’ कदम के रूप में पेश कर सकती है।
इस दौरे से न सिर्फ आदिवासी समुदाय बल्कि अन्य वर्गों तक भी यह संदेश जाएगा कि भाजपा उनकी चिंता कर रही है।


