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बोराज तालाब की पाल टूटी: आक्रोशित लोगों ने टीम को लौटाया

बोराज तालाब की पाल टूटी: आक्रोशित लोगों ने टीम को लौटाया

शोभना शर्मा। बोराज तालाब की पाल टूटने से उपजा जल संकट अब स्थानीय निवासियों के आक्रोश में तब्दील हो गया है। गुरुवार देर रात करीब 11:45 बजे पाल टूटने के बाद स्वास्तिक नगर, वरुणसागर रोड और आसपास की बस्तियां पूरी तरह पानी में डूब गईं। रातों-रात हालात बिगड़ने से लोगों को अपनी जान बचाने के लिए छतों पर शरण लेनी पड़ी। शुक्रवार सुबह तक हालात और खराब हो गए और क्षेत्रवासियों का गुस्सा प्रशासन पर खुलकर फूट पड़ा।

सड़कों पर जाम और नारेबाजी

शुक्रवार सुबह प्रभावित क्षेत्र के लोगों ने सड़कों पर जाम लगाकर प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। लोगों का कहना था कि वे लंबे समय से पाल की मरम्मत की मांग कर रहे थे, लेकिन प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया। अब पाल टूटने से उनकी वर्षों की मेहनत और जमा पूंजी बर्बाद हो गई है। कई परिवारों ने लोन लेकर मकान बनाए थे, जो अब पूरी तरह पानी में डूब गए हैं। नाराज लोगों ने कहा, “मकान तो डूब गए, अब बैंक का कर्ज कहां से चुकाएंगे?”

चाय-नाश्ता लेकर पहुंची टीम को लौटाया

हालात संभालने के लिए सिविल डिफेंस की टीम मौके पर पहुंची। लेकिन टीम के साथ आए कुछ अफसर जब चाय-नाश्ते के पैकेट लेकर लोगों के बीच पहुंचे तो गुस्साए निवासियों ने उन्हें फटकार लगाई और वापस लौटा दिया। ग्रामीणों ने साफ कहा कि उन्हें खान-पान नहीं, बल्कि ठोस समाधान चाहिए। लोगों ने मांग रखी कि जब तक जिला कलक्टर मौके पर नहीं आएंगे और उनकी समस्याओं को सुनकर आश्वासन नहीं देंगे, तब तक सड़क से जाम नहीं हटेगा।

रातभर मची अफरा-तफरी

गुरुवार देर रात अचानक पाल टूटने से भारी मात्रा में पानी स्वास्तिक नगर और आसपास के इलाकों में घुस गया। कई घरों में 5 से 8 फीट तक पानी भर गया। पानी के तेज बहाव से कई मकानों की दीवारें गिर गईं और घरेलू सामान बह गया। अचानक आई इस स्थिति में लोग अपनी जान बचाने के लिए छतों पर चढ़ गए।
राहत कार्य के लिए प्रशासन और एसडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंचीं। नावों और जेसीबी की मदद से कई लोगों को सुरक्षित निकाला गया। हालांकि, स्थानीय लोग मानते हैं कि यदि पहले ही सावधानी बरती जाती तो यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती।

प्रशासन की तैयारियों पर सवाल

स्थानीय निवासियों ने प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि बोराज तालाब की पाल लंबे समय से कमजोर थी और इसकी मरम्मत की मांग बार-बार की गई थी। बावजूद इसके जिम्मेदार विभागों ने इस पर ध्यान नहीं दिया। अब तालाब का पानी पूरे इलाके में फैलने से लोगों की जिंदगी खतरे में है और उनका जीवनभर की पूंजी पलभर में बर्बाद हो गई।

प्रभावित परिवारों की दिक्कतें

स्वास्तिक नगर और आसपास के इलाकों में रहने वाले परिवारों के घर पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं। घरों में रखे सामान, फर्नीचर और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण पानी में बह गए। महिलाएं और बच्चे सबसे ज्यादा परेशान हैं। लोग फिलहाल शेल्टर होम या रिश्तेदारों के घरों में शरण ले रहे हैं। ग्रामीणों ने कहा कि उन्हें फिलहाल राहत सामग्री और चिकित्सा सुविधाओं की तत्काल जरूरत है।

मुआवजे की मांग

स्थानीय लोगों ने सरकार और जिला प्रशासन से मुआवजे की मांग की है। उनका कहना है कि घर और सामान पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं, इसलिए प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा और पुनर्वास पैकेज दिया जाए। साथ ही बैंकों से लिए गए लोन को माफ करने की भी मांग उठी है। लोगों का कहना है कि जब मकान ही नहीं बचे तो लोन चुकाना असंभव है।

प्रशासनिक इंतजाम

हालात की गंभीरता को देखते हुए फायसागर रोड पर यातायात रोकना पड़ा है। इलाके में पुलिस और प्रशासनिक अमला लगातार तैनात है। जिला प्रशासन ने प्रभावित लोगों के लिए शेल्टर होम, भोजन, पानी और दवाओं की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। लेकिन स्थानीय लोग कहते हैं कि यह कदम बहुत देर से उठाया गया और नुकसान इतना बड़ा है कि सिर्फ राहत सामग्री से बात नहीं बनेगी।

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