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SI भर्ती 2021 रद्द: सफल अभ्यर्थी जाएंगे हाईकोर्ट की डबल बेंच

SI भर्ती 2021 रद्द: सफल अभ्यर्थी जाएंगे हाईकोर्ट की डबल बेंच

मनीषा शर्मा। राजस्थान में चर्चित SI भर्ती 2021 (Rajasthan SI Recruitment Exam 2021) को लेकर गुरुवार को हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया। जस्टिस ने इस भर्ती को रद्द करते हुए कहा कि यह परीक्षा पूरी तरह से पेपर लीक और अनियमितताओं से प्रभावित थी। कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के कई सदस्य इस घोटाले में शामिल पाए गए, जिसके चलते भर्ती प्रक्रिया पर से विश्वास उठ गया है।

इस फैसले के बाद हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य एक बार फिर अधर में लटक गया है। विशेष रूप से वे अभ्यर्थी, जिन्होंने कड़ी मेहनत के बाद सफलता हासिल की थी, अब खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। इन सफल उम्मीदवारों ने अब डबल बेंच (High Court Double Bench) में अपील करने की तैयारी शुरू कर दी है।

SI भर्ती 2021 रद्द सफल अभ्यर्थियों का पक्ष: “किसी के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए”

भर्ती परीक्षा में चयनित हुए अभ्यर्थियों की ओर से वकील दशरथ सिंह ने कहा कि वे हाईकोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं, लेकिन इसके कारण मेहनती और ईमानदार उम्मीदवारों के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए। उनका कहना था,
“हम डबल बेंच के समक्ष इस फैसले को चुनौती देंगे, यह हमारा मौलिक अधिकार है।”

सिंह ने यह भी सवाल उठाया कि अगर RPSC के सदस्यों की संलिप्तता पर ही भर्ती रद्द की जा रही है, तो इस स्थिति में बीते पांच वर्षों में हुई सभी भर्तियों पर भी प्रश्नचिह्न लगना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि यही सदस्य वर्तमान में RAS जैसे अहम इंटरव्यू तक ले रहे हैं, तो क्या इन पर भी संदेह नहीं होना चाहिए?

याचिकाकर्ता पक्ष का बयान: “RPSC के 6 सदस्य थे शामिल”

दूसरी ओर, याचिकाकर्ताओं की ओर से वकील हरेंद्र नील ने मीडिया को बताया कि कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा है कि RPSC के 6 सदस्य पेपर लीक प्रकरण में सीधे तौर पर शामिल थे। नील ने यह भी दावा किया कि तत्कालीन चेयरमैन के घर पर आरोपी बाबूलाल कटारा गए थे, ताकि कुछ विशेष अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ मिल सके।

कोर्ट ने माना कि जब प्रश्नपत्र पूरे प्रदेश में फैल गया और ब्लूटूथ गिरोह तक पहुंच गया, तब इस परीक्षा को निष्पक्ष और पारदर्शी नहीं माना जा सकता। इस आधार पर हाईकोर्ट ने भर्ती को अवैध करार देते हुए रद्द करने का आदेश दिया।

परीक्षा और घोटाले की पृष्ठभूमि

साल 2021 में राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा सब-इंस्पेक्टर के 859 पदों पर भर्ती के लिए परीक्षा आयोजित की गई थी। इसमें लाखों अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया। शुरुआती चरण में यह भर्ती सामान्य दिखाई दी, लेकिन जल्द ही पेपर लीक की खबरों ने पूरे राज्य को हिला दिया।

जांच में सामने आया कि पेपर परीक्षा से पहले ही कई उम्मीदवारों तक पहुंच चुका था। यहां तक कि ब्लूटूथ और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स के जरिए भी पेपर सॉल्व करने के मामले पकड़े गए। इस घोटाले में कई ट्रेनी एसआई तक गिरफ्तार किए गए, जिससे भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।

हजारों युवाओं का भविष्य अधर में

इस भर्ती के रद्द होने से उन हजारों उम्मीदवारों पर सीधा असर पड़ा है, जिन्होंने अपनी मेहनत और समय इस परीक्षा में लगाया था। सफल अभ्यर्थियों को उम्मीद थी कि वे पुलिस विभाग में अपनी नियुक्ति जल्द प्राप्त करेंगे, लेकिन अब सब कुछ अनिश्चित हो गया है।

अभ्यर्थियों का कहना है कि अगर कुछ लोगों की गलती या मिलीभगत से पूरा तंत्र भ्रष्ट साबित हो रहा है, तो मेहनती उम्मीदवारों को इसकी सजा क्यों भुगतनी चाहिए। इसीलिए वे कोर्ट के डबल बेंच से न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

RPSC की साख पर बड़ा सवाल

यह फैसला केवल SI भर्ती तक ही सीमित नहीं है, बल्कि राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की साख और विश्वसनीयता पर भी गहरा सवाल खड़ा करता है। आयोग, जो प्रदेश की सबसे बड़ी भर्ती संस्था है, अगर उसके सदस्यों पर ही आरोप लगे तो सभी प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता संदिग्ध हो जाती है।

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