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5 साल की शिक्षक भर्ती जांच: दस्तावेजों की होगी दोबारा जांच

5 साल की शिक्षक भर्ती जांच: दस्तावेजों की होगी दोबारा जांच

शोभना शर्मा। राजस्थान में शिक्षक भर्ती घोटाले को लेकर शिक्षा विभाग ने अब सख्त रुख अपना लिया है। पिछले पांच वर्षों के भीतर भर्ती हुए 4819 शिक्षकों के दस्तावेजों की दोबारा जांच की जाएगी। इस बड़े अभियान की शुरुआत बाड़मेर जिले से की गई है। जांच की जिम्मेदारी जालौर शिक्षा विभाग की विशेष टीम को सौंपी गई है। यह जांच अब तक की सबसे बड़ी जांच मानी जा रही है, जिसमें उन सभी शिक्षकों को अपने-अपने प्रमाणपत्रों और दस्तावेजों के साथ व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा।

कैसे शुरू हुई जांच

पिछले कुछ वर्षों से शिक्षक भर्ती परीक्षाओं में धांधली, पेपर लीक और फर्जीवाड़े की खबरें लगातार सामने आती रही हैं। कई अभ्यर्थियों पर आरोप है कि उन्होंने डमी कैंडिडेट, फर्जी फिजिकल सर्टिफिकेट और गलत दस्तावेजों के आधार पर नौकरी हासिल की है। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए SOG और ATS ने शिक्षा विभाग को रिपोर्ट सौंपी और संदेह जताया कि बाड़मेर सहित कई जिलों में हजारों भर्ती संदिग्ध हो सकती हैं। इसी आधार पर अब पांच वर्षों में भर्ती हुए कुल 4819 शिक्षकों की विस्तृत जांच कराई जा रही है।

कब और कहां होगी जांच

बाड़मेर जिले में जांच की प्रक्रिया ब्लॉकवार शुरू की गई है। दस्तावेज सत्यापन के लिए डाइट बाड़मेर को जांच केंद्र बनाया गया है, जहां दर्जनों काउंटर लगाए गए हैं। प्रत्येक ब्लॉक के शिक्षकों की अलग-अलग तारीखों पर जांच की जाएगी।

  • 28 अगस्त को गुढ़ामालानी ब्लॉक के 378 अभ्यर्थियों की जांच होगी।

  • 29 अगस्त को पटौदी पंचायत के 37 अभ्यर्थियों के दस्तावेज देखे जाएंगे।

  • 1 सितम्बर को सिणधरी ब्लॉक के 363 शिक्षकों की जांच होगी।

  • 3 सितम्बर को धोरीमन्ना ब्लॉक के 499 शिक्षकों की जांच होगी।

  • 7 सितम्बर को चौहटन ब्लॉक के 568 शिक्षकों के दस्तावेज देखे जाएंगे।

  • 13 सितम्बर को शिव ब्लॉक के 423 अभ्यर्थियों की जांच तय की गई है।

  • 16 सितम्बर को बालोतरा ब्लॉक के 502 शिक्षकों की जांच होगी।

  • 17 सितम्बर को बाड़मेर मुख्यालय की 20 पंचायतों के शिक्षकों की अंतिम जांच की जाएगी।

जांच प्रक्रिया के दौरान प्रत्येक अभ्यर्थी को समय पर उपस्थित रहने और सभी मूल दस्तावेजों के साथ पहुंचने के लिए कहा गया है।

जांच का तरीका

इस बार की जांच में केवल सामान्य प्रमाणपत्रों की जांच ही नहीं होगी बल्कि फोटोग्राफ और हस्ताक्षर का मिलान भी किया जाएगा। जांच टीम इस बात को सुनिश्चित करेगी कि जिस नाम से नौकरी मिली है, वह व्यक्ति वास्तव में वही है या नहीं। खासतौर पर फिजिकल टेस्ट से संबंधित प्रमाणपत्रों और शिक्षा योग्यता के दस्तावेजों की गहन जांच होगी।

क्या होगा अगर फर्जीवाड़ा पकड़ा गया?

शिक्षा विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर किसी भी शिक्षक का प्रमाणपत्र या दस्तावेज फर्जी पाया गया, तो उसकी नौकरी तुरंत रद्द कर दी जाएगी। इसके अलावा उसके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाएगा और आगे की सेवा पर भी प्रतिबंध लगाया जा सकता है। इस जांच का उद्देश्य उन शिक्षकों को चिन्हित करना है जिन्होंने फर्जीवाड़े से नौकरी हासिल की है और साथ ही ईमानदार और योग्य अभ्यर्थियों के साथ न्याय करना है।

क्यों जरूरी हुई यह जांच

राजस्थान में बीते कुछ सालों से शिक्षक भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं की खबरें लगातार सुर्खियों में रही हैं। पेपर लीक और डमी कैंडिडेट की घटनाओं ने सरकार और शिक्षा विभाग की साख पर सवाल खड़े किए। हजारों युवाओं ने इस भर्ती में हिस्सा लिया और मेहनत के बावजूद कई योग्य अभ्यर्थी पीछे रह गए। अब जब जांच हो रही है, तो उम्मीद की जा रही है कि गलत तरीके से नौकरी पाने वालों को बाहर कर दिया जाएगा और भविष्य की भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी।

प्रशासन की सख्ती

जांच को लेकर प्रशासन ने कड़े निर्देश दिए हैं। सभी शिक्षकों को समय पर डाइट बाड़मेर पहुंचने का आदेश दिया गया है। जो अभ्यर्थी जांच के समय अनुपस्थित रहेंगे, उनके खिलाफ विभाग सख्त कार्रवाई कर सकता है। इस प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों को भी निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से काम करने के निर्देश दिए गए हैं।

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