शोभना शर्मा। राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) ने भर्ती परीक्षाओं में फर्जीवाड़ा करने वाले अभ्यर्थियों पर अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। आयोग ने चेतावनी देने के बावजूद फर्जी डिग्री, नकल और अन्य अनियमितताओं में शामिल उम्मीदवारों पर सख्त कदम उठाते हुए 524 अभ्यर्थियों को डिबार कर दिया है। इनमें से 415 उम्मीदवारों को आजीवन भर्ती परीक्षाओं से बाहर कर दिया गया है, जबकि 109 अभ्यर्थियों को 1 से 5 साल की अवधि तक परीक्षा देने से रोका गया है।
चेतावनी को हल्के में लिया, अब भुगतना पड़ा खामियाजा
कुछ समय पहले ही आयोग ने उम्मीदवारों को साफ चेतावनी दी थी कि फर्जीवाड़ा करने या गलत जानकारी देने पर उन्हें आजीवन डिबार किया जा सकता है। बावजूद इसके कई अभ्यर्थियों ने इस चेतावनी को गंभीरता से नहीं लिया और गलत तरीके अपनाकर नौकरी पाने की कोशिश जारी रखी। नतीजा यह हुआ कि अब इन उम्मीदवारों का पूरा करियर दांव पर लग गया है।
जिलावार डिबार सूची – जालौर सबसे आगे
डिबार किए गए अभ्यर्थियों में सबसे ज्यादा संख्या जालौर जिले की है। यहां से 128 उम्मीदवारों को डिबार किया गया है। बांसवाड़ा 81 और डूंगरपुर 40 उम्मीदवारों के साथ दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे। आयोग की सूची में राजस्थान के अलावा अन्य राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, हरियाणा, बिहार, दिल्ली और मध्य प्रदेश के 10 उम्मीदवार भी शामिल हैं।
किन-किन कारणों से हुए डिबार?
RPSC ने साफ किया है कि डिबार किए गए अभ्यर्थियों के खिलाफ कई तरह की गड़बड़ियां पाई गई हैं। सबसे ज्यादा मामले फर्जी डिग्री और दस्तावेजों से जुड़े हुए हैं। आंकड़े बताते हैं कि—
157 मामले फर्जी डिग्री और दस्तावेजों से संबंधित
इनमें से 126 मामले फर्जी बीएड डिग्री के पाए गए।
148 मामले परीक्षा में अनुचित साधन का उपयोग करने के
68 मामले डमी अभ्यर्थियों से संबंधित
38 मामले ब्लूटूथ और मोबाइल से नकल करने के
62 मामले प्रश्न पत्र और ओएमआर शीट से छेड़छाड़ करने के
51 मामले अन्य कारणों जैसे गलत जानकारी देना और परीक्षा आयोजन में व्यवधान डालने से संबंधित
इन गड़बड़ियों ने आयोग की साख पर सवाल खड़े किए थे। इसी वजह से आयोग ने सख्त कार्रवाई करते हुए ऐसे सभी अभ्यर्थियों को डिबार कर दिया है।
आजीवन बनाम अस्थायी डिबार
आयोग ने गंभीर फर्जीवाड़ा करने वाले 415 अभ्यर्थियों को आजीवन डिबार कर दिया है। इसका मतलब यह है कि अब ये उम्मीदवार जीवन भर किसी भी भर्ती परीक्षा में शामिल नहीं हो पाएंगे। वहीं कम गंभीर मामलों में पकड़े गए 109 अभ्यर्थियों को 1 से 5 साल की अवधि के लिए प्रतिबंधित किया गया है।
ई-केवाईसी अनिवार्य, धांधली पर रोक लगाने की तैयारी
भविष्य में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए आयोग ने नई व्यवस्था लागू की है। अब 7 जुलाई 2025 से वन टाइम रजिस्ट्रेशन (OTR) में आधार या जन आधार से ई-केवाईसी अनिवार्य कर दिया गया है। इस कदम का उद्देश्य उम्मीदवारों की पहचान को पूरी तरह से प्रमाणित करना है।
अभी तक 69.72 लाख पंजीकृत अभ्यर्थियों में से 59.23 लाख ने सत्यापन प्रक्रिया पूरी कर ली है।
हाल ही में 48 हजार से अधिक अभ्यर्थियों ने ई-केवाईसी पूरी की है।
अब बिना ई-केवाईसी कोई भी उम्मीदवार आगामी परीक्षाओं में आवेदन नहीं कर सकेगा।
यह कदम नकल माफिया और फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करने वाले अभ्यर्थियों पर लगाम लगाने में अहम साबित होगा।
तलाकशुदा महिला कोटे का दुरुपयोग भी जांच के दायरे में
सिर्फ फर्जी डिग्री और नकल ही नहीं, बल्कि आयोग ने तलाकशुदा महिला वर्ग के आरक्षण कोटे में हो रहे दुरुपयोग पर भी सख्ती दिखाई है। सचिव रामनिवास मेहता ने बताया कि कई उम्मीदवार फर्जी तलाक सर्टिफिकेट बनवाकर इस आरक्षित श्रेणी का लाभ लेने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे मामलों की जांच एजेंसियों से करवाई जा रही है और रिपोर्ट आने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उम्मीदवारों के करियर पर संकट
यह कार्रवाई उन अभ्यर्थियों के लिए बड़ा झटका है जो किसी भी तरह से सरकारी नौकरी पाने की कोशिश में थे। आजीवन डिबार हुए उम्मीदवारों का पूरा करियर अब समाप्त हो गया है। वहीं अस्थायी रूप से डिबार हुए अभ्यर्थी भी अगले कुछ वर्षों तक किसी परीक्षा में शामिल नहीं हो सकेंगे, जिससे उनका करियर प्रभावित होगा।
आयोग की साख बचाने की कोशिश
बीते कुछ वर्षों में राजस्थान में भर्ती परीक्षाओं पर बार-बार सवाल उठते रहे हैं। पेपर लीक, नकल और फर्जीवाड़े की घटनाओं ने RPSC और अन्य परीक्षा कराने वाली एजेंसियों की विश्वसनीयता पर असर डाला है। ऐसे में यह कार्रवाई आयोग की साख बचाने और अभ्यर्थियों को कड़ा संदेश देने का काम करेगी कि गलत तरीके अपनाने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।


