latest-newsभरतपुर

विधायक नौक्षम चौधरी का पंचायत उपचुनाव में बीजेपी की जीत पर बयान

विधायक नौक्षम चौधरी का पंचायत उपचुनाव में बीजेपी की जीत पर  बयान

शोभना शर्मा।  राजस्थान की राजनीति में स्थानीय चुनाव हमेशा बड़े संदेश लेकर आते हैं। डीग में हुए पंचायत उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कामां और पहाड़ी दोनों पंचायत समिति क्षेत्रों में जीत दर्ज कर अपने कार्यकर्ताओं की ताकत और जनसमर्थन को एक बार फिर साबित किया। इस जीत के बाद बीजेपी विधायक नौक्षम चौधरी ने बड़ा बयान देते हुए न केवल विपक्ष को घेरा बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से अपने ही दल के एक मंत्री पर निशाना साध दिया।

दरअसल, डीग क्षेत्र की कामां और पहाड़ी पंचायतों में प्रधान पद के लिए उपचुनाव कराए गए थे। कामां पंचायत समिति से बीजेपी समर्थित प्रत्याशी सुरज्ञान देवी ने निर्दलीय प्रत्याशी धर्मवती को केवल 1 वोट से पराजित किया। वहीं पहाड़ी पंचायत समिति से बीजेपी प्रत्याशी निसार खान ने कांग्रेस उम्मीदवार इमरान को महज 2 वोटों से मात दी। बेहद नजदीकी मुकाबले में मिली यह जीत भाजपा के लिए इसलिए भी खास रही क्योंकि यहां विपक्ष ने पूरी ताकत झोंक दी थी और बीजेपी के ही एक मंत्री पर भी पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप लग रहा था।

विधायक नौक्षम चौधरी ने चुनाव परिणामों के बाद मीडिया से बातचीत में कहा कि पंचायत उपचुनाव हमेशा चुनौतीपूर्ण रहते हैं, क्योंकि इन चुनावों में मतदाताओं का रुझान अलग-अलग मुद्दों पर प्रभावित होता है। उन्होंने कहा कि इस बार चुनाव इसलिए भी कठिन था क्योंकि विपक्ष में कांग्रेस की पूर्व मंत्री ही नहीं बल्कि भाजपा सरकार के एक मौजूदा मंत्री भी अप्रत्यक्ष रूप से भाजपा के खिलाफ काम कर रहे थे। इसके बावजूद कार्यकर्ताओं की मेहनत और जनता के विश्वास के बल पर दोनों सीटों पर जीत हासिल हुई।

उन्होंने यह भी कहा कि जब भारतीय जनता पार्टी का कार्यकर्ता मैदान में उतरता है, तो चाहे परिस्थितियां कितनी भी प्रतिकूल क्यों न हों, अंत में विजयश्री उन्हीं के हाथ लगती है। नौक्षम चौधरी ने स्पष्ट किया कि यह जीत भाजपा के संगठन की मजबूती और कार्यकर्ताओं के अथक परिश्रम का नतीजा है। साथ ही उन्होंने कामां की सुरज्ञान देवी और पहाड़ी के निसार खान को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल कार्यकाल की शुभकामनाएं दीं।

इस उपचुनाव के नतीजे कई कारणों से चर्चा में रहे। एक ओर जहां बीजेपी को बेहद कम अंतर से जीत मिली, वहीं दूसरी ओर पूर्व मंत्री जाहिदा खान के परिवार का सियासी वर्चस्व टूटता हुआ दिखाई दिया। जाहिदा खान के बेटे साजिद खान पहले पहाड़ी पंचायत समिति से और बेटी डॉ. शहनाज कामां पंचायत समिति से प्रधान थे। लेकिन पंचायत राज विभाग ने 22 अगस्त 2025 को, यानी उपचुनाव से एक दिन पहले, दोनों की सदस्यता रद्द कर दी। विभाग की जांच में सामने आया कि प्रधान रहते हुए इन दोनों ने योजनाओं की स्वीकृति में नियमों की अनदेखी की थी और कुछ मामलों में गलत तरीके से भुगतान उठाने की शिकायतें भी सामने आई थीं।

इस कार्रवाई के बाद उपचुनाव की राह खुली और भाजपा ने मौके का फायदा उठाते हुए दोनों सीटों पर जीत दर्ज कर ली। हालांकि, यह जीत आसान नहीं थी। कामां और पहाड़ी में भाजपा को बेहद करीबी मुकाबले में जीत मिली, जिसने यह संकेत दिया कि यहां जनता का जनादेश किसी भी समय पलट सकता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नौक्षम चौधरी का यह बयान केवल विपक्ष पर हमला नहीं बल्कि पार्टी के भीतर असंतोष का इशारा भी है। जब कोई विधायक सार्वजनिक मंच से कहे कि चुनाव में पार्टी का ही मंत्री विरोध कर रहा था, तो यह निश्चित तौर पर सरकार और संगठन के लिए चिंता का विषय है। ऐसे बयान भाजपा की आंतरिक राजनीति को भी उजागर करते हैं।

इस उपचुनाव ने एक और बड़ा संदेश दिया है। पंचायत स्तर पर जनता अब पारिवारिक वर्चस्व की राजनीति से आगे बढ़कर उम्मीदवार की कार्यशैली और छवि को प्राथमिकता देने लगी है। जाहिदा खान के बेटे और बेटी के हटने के बाद जनता ने भाजपा प्रत्याशियों को समर्थन देकर यह जता दिया कि अब विकास कार्य और पारदर्शिता ही प्राथमिक मुद्दे हैं।

भविष्य की राजनीति में इस जीत का असर निश्चित तौर पर दिखाई देगा। स्थानीय स्तर पर भाजपा कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ा है और कांग्रेस को इस हार से बड़ा झटका लगा है। वहीं भाजपा नेतृत्व के सामने यह चुनौती भी है कि पार्टी के भीतर ऐसे मतभेदों को कैसे सुलझाया जाए, ताकि आगे किसी भी चुनाव में कार्यकर्ताओं के उत्साह पर पानी न फिर सके।

post bottom ad

Discover more from MTTV INDIA

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading