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जयपुर आमेर किले में बारिश से गिरी 200 फीट पुरानी दीवार, हाथी सवारी अस्थायी रूप से बंद

जयपुर आमेर किले में बारिश से गिरी 200 फीट पुरानी दीवार, हाथी सवारी अस्थायी रूप से बंद

मनीषा शर्मा।  राजस्थान की राजधानी जयपुर में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने आमेर किले में बड़ा हादसा होते-होते टाल दिया। शनिवार को किले की ओर जाने वाले रास्ते में स्थित रामबाग क्षेत्र की लगभग 200 फीट लंबी और पुरानी दीवार अचानक भरभराकर गिर गई। दीवार गिरने के साथ तेज धमाके जैसी आवाज हुई, जिससे आसपास अफरा-तफरी का माहौल बन गया। इस दौरान मौके पर मौजूद देसी और विदेशी पर्यटक घबरा गए और सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे।

गनीमत रही कि हादसे के समय दीवार के पास कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था, अन्यथा बड़ा नुकसान हो सकता था। हालांकि, इस घटना में पास खड़ी दो मोटरसाइकिल दीवार के मलबे की चपेट में आकर क्षतिग्रस्त हो गईं।

पर्यटक सहमे, प्रशासन ने बढ़ाई सुरक्षा

आमेर किला जयपुर का ऐतिहासिक और प्रमुख पर्यटन स्थल है। बारिश के कारण यहां शनिवार को भी बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचे हुए थे। दीवार गिरने के बाद मौके पर सुरक्षा व्यवस्था को तुरंत मजबूत किया गया। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने तुरंत किले के विभिन्न हिस्सों का निरीक्षण किया और पर्यटकों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा।

पर्यटकों को आश्वस्त किया गया कि किले की सुरक्षा को लेकर लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। हादसे की सूचना मिलते ही पर्यटन विभाग और पुरातत्व विभाग के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया।

हाथी सवारी अस्थायी रूप से बंद

आमेर किले में होने वाली हाथी सवारी पर्यटकों के बीच बेहद लोकप्रिय है। रोजाना सैकड़ों देसी और विदेशी सैलानी इस सवारी का आनंद लेने पहुंचते हैं। लेकिन दीवार गिरने और सुरक्षा कारणों को देखते हुए प्रशासन ने हाथी सवारी को तत्काल प्रभाव से अस्थायी रूप से बंद करने का निर्णय लिया है।

राजकीय संग्रहालय और महल कार्यालय ने आदेश जारी करते हुए कहा है कि जब तक सुरक्षा की पूरी जांच और आवश्यक मरम्मत कार्य पूरा नहीं हो जाता, तब तक हाथी सवारी किले के भीतर उपलब्ध नहीं होगी। फिलहाल हाथी सवारी केवल हाथी गांव (Elephant Village) में ही कराई जाएगी।

बारिश बनी बड़ी चुनौती

जयपुर समेत राजस्थान के कई हिस्सों में पिछले कुछ दिनों से लगातार बारिश हो रही है। भारी बारिश के चलते आमेर किले जैसे ऐतिहासिक धरोहरों की संरचनाएं भी प्रभावित हो रही हैं। पुरानी दीवारों और पत्थरों से बने हिस्सों में पानी भरने और नमी की वजह से टूट-फूट का खतरा बढ़ जाता है। यही वजह रही कि शनिवार को रामबाग क्षेत्र की यह लंबी दीवार दबाव सहन नहीं कर पाई और गिर गई।

स्थानीय लोगों और गाइड्स का कहना है कि पिछले कई दिनों से लगातार पानी रिसने के कारण दीवार में दरारें आ गई थीं। लेकिन इतनी बड़ी दुर्घटना हो जाएगी, इसकी आशंका किसी को नहीं थी।

पर्यटन विभाग ने की अपील

घटना के बाद पर्यटन विभाग ने बयान जारी कर कहा है कि पर्यटकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। आमेर किला राजस्थान की ऐतिहासिक धरोहर है और इसकी संरक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। विभाग ने सैलानियों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और सुरक्षा व्यवस्था का पालन करते हुए सहयोग करें।

विभाग के अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि किले में दीवार गिरने से कोई जनहानि नहीं हुई है और पर्यटकों की सुरक्षा को देखते हुए ही हाथी सवारी अस्थायी रूप से रोकी गई है।

पर्यटकों में चिंता, लेकिन राहत भी

दीवार गिरने की घटना से आमेर किला घूमने आए पर्यटक सहम गए। विदेशी सैलानियों ने भी कहा कि यह घटना अचानक हुई और आवाज इतनी तेज थी कि कुछ देर के लिए सबको लगा कोई बड़ा हादसा हो गया है। हालांकि जब यह साफ हो गया कि कोई घायल नहीं हुआ है, तो सभी ने राहत की सांस ली।

कई पर्यटकों का कहना था कि यह अच्छा हुआ कि प्रशासन ने तुरंत हाथी सवारी और अन्य गतिविधियों पर रोक लगा दी। इससे यह साबित होता है कि सुरक्षा को लेकर सरकार और विभाग गंभीर हैं।

ऐतिहासिक धरोहर की देखभाल जरूरी

विशेषज्ञों का मानना है कि आमेर किले जैसी सैकड़ों साल पुरानी धरोहरों की नियमित देखभाल और मरम्मत बेहद जरूरी है। बारिश और मौसम की मार इन संरचनाओं को कमजोर बना देती है। ऐसे में समय-समय पर जांच और संरक्षण कार्य किया जाना चाहिए ताकि पर्यटकों की सुरक्षा के साथ-साथ धरोहर की विरासत भी सुरक्षित रह सके।

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