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भजनलाल सरकार कैबिनेट बैठक: टोल कम और शिक्षा-स्वास्थ्य सुधार

भजनलाल सरकार कैबिनेट बैठक: टोल कम और शिक्षा-स्वास्थ्य सुधार

मनीषा शर्मा । राजस्थान की राजनीति और प्रशासनिक दिशा तय करने वाली भजनलाल सरकार कैबिनेट की बैठकें हमेशा से चर्चा में रहती हैं। शनिवार को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) में हुई कैबिनेट बैठक में कई ऐतिहासिक फैसले लिए गए, जिनका सीधा असर आम जनता से लेकर उद्योग जगत तक पड़ेगा। बैठक के बाद सचिवालय के कॉन्फ्रेंस हॉल में संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल और उद्योग मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इन फैसलों की जानकारी साझा की।

भजनलाल सरकार कैबिनेट का 2047 तक विकसित राजस्थान का संकल्प

बैठक का सबसे महत्वपूर्ण एजेंडा राजस्थान को विकसित राज्यों की श्रेणी में शामिल करने का विजन था। मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने बताया कि 2047 तक राजस्थान को 4.7 मिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए नीति आयोग और विशेषज्ञों की सलाह से एक विजन डॉक्यूमेंट तैयार किया गया है। इस रोडमैप में 13 विभागों को शामिल किया गया है, जिससे हर गांव में शिक्षा और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। सरकार का मानना है कि यदि यह योजना समयबद्ध तरीके से लागू होती है तो 2047 तक राजस्थान देश की आर्थिक और सामाजिक प्रगति में अहम भूमिका निभाएगा।

रिन्यूएबल एनर्जी पर बड़ा निवेश

कैबिनेट बैठक में ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में भी बड़ा कदम उठाया गया। 1280 हैक्टेयर भूमि पर ढाई हजार मेगावाट बिजली उत्पादन का प्रोजेक्ट मंजूर किया गया। इस दौरान पर्यावरण संरक्षण का भी ध्यान रखा गया है। काटे जाने वाले हर पेड़ के बदले पांच पेड़ लगाने का प्रावधान होगा। साथ ही, जहां-जहां पावर प्लांट लगाए जाएंगे, उन गांवों की पेयजल व्यवस्था के लिए कंपनियों को CSR फंड का उपयोग करने का निर्देश दिया गया है। राजस्थान को देश का ग्रीन एनर्जी हब बनाने की दिशा में यह बड़ा कदम माना जा रहा है।

टोल टैक्स और तेज रफ्तार पर निर्णय

आम जनता के लिए राहत भरी खबर यह रही कि राज्य सरकार ने टोल टैक्स कम करने का फैसला लिया है। इससे वाहन चालकों और आम यात्रियों पर आर्थिक बोझ घटेगा। इसके अलावा राजधानी जयपुर में एक वर्ल्ड क्लास कन्वेंशन सेंटर बनाने की योजना को भी हरी झंडी दी गई। टोंक रोड पर साढ़े तीन हजार करोड़ की लागत से बनने वाले इस मेगा प्रोजेक्ट में सात हजार से ज्यादा लोगों की क्षमता होगी। इसमें दो बड़े होटल भी बनेंगे और इसे 36 महीनों में पूरा करने का लक्ष्य है। यह प्रोजेक्ट राजस्थान को नई पहचान देगा और बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों के लिए राज्य को आकर्षण का केंद्र बनाएगा।

युवाओं और उद्यमियों के लिए योजनाएं

सरकार ने आत्मनिर्भर भारत की दिशा में “विश्वकर्मा युवा उद्यमी प्रोत्साहन योजना” को मंजूरी दी है। इसके तहत व्यापार और स्टार्टअप शुरू करने वाले युवाओं को लोन और सब्सिडी दी जाएगी। इस योजना के लिए 150 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। इससे राज्य में उद्यमिता और स्वरोजगार को बढ़ावा मिलेगा और नई पीढ़ी को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा सकेगा।

हवाई पट्टियों का बेहतर उपयोग

राज्य सरकार ने उन हवाई पट्टियों को किराए पर देने का फैसला लिया है, जिनका कम उपयोग हो रहा है। इन्हें एयरोस्पोर्ट्स कंपनियों को 100 रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से अधिकतम 20 साल की लीज पर दिया जाएगा। इससे राज्य में पर्यटन और खेल गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।

चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार

कैबिनेट ने चिकित्सा क्षेत्र में बड़ा फैसला लेते हुए “राजस्थान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज” (RIMS) नामक संस्थान के गठन का निर्णय लिया। यह RUHS का विस्तारित रूप होगा और इसमें कैंसर अस्पताल भी शामिल होगा। यह संस्थान PG स्तर का होगा और राज्य में चिकित्सा शिक्षा व स्वास्थ्य सुविधाओं में क्रांति लाएगा। मुख्य सचिव RIMS के अध्यक्ष होंगे और फैकल्टी की नियुक्ति के लिए एक समिति का गठन किया जाएगा।

भूमि आवंटन नीति–2025

राज्य सरकार ने भूमि आवंटन से जुड़े विवादों और पारदर्शिता की कमी को देखते हुए “भूमि आवंटन नीति–2025” को मंजूरी दी। इसके तहत किसी भी उद्देश्य के लिए भूमि का आवंटन निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से किया जाएगा। यह कदम औद्योगिक निवेश, शहरी विकास और ग्रामीण क्षेत्रों की योजनाओं में तेजी लाने में सहायक होगा।

मत्स्य अधिनियम में बदलाव और जनजाति क्षेत्रों पर ध्यान

राजस्थान मत्स्य अधिनियम में बदलाव करते हुए सरकार ने यह तय किया कि मछलियों को गैर जरूरी तरीके से मारने पर रोक लगाई जाएगी। वहीं, जनजातीय क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे की मजबूती के लिए “धरती अंबा जनजाति और ग्राम उत्कृष्ट अभियान” पर जोर दिया जाएगा। इस योजना के तहत 500 या उससे अधिक जनसंख्या वाले गांवों को शामिल किया जाएगा। सरकार का मानना है कि आदिवासी क्षेत्रों में आज भी कई जगह बिजली और अन्य सुविधाओं की कमी है, इसलिए अब इस दिशा में विशेष ध्यान दिया जाएगा।

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