मनीषा शर्मा। राजस्थान सरकार ने आमजन को अपने घर का सपना पूरा करने का एक और अवसर दिया है। नगरीय विकास एवं आवास मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने मंगलवार को राजस्थान हाउसिंग बोर्ड की पांच नई आवासीय योजनाओं की शुरुआत की। इन योजनाओं का मकसद प्रदेश के उन लोगों को सस्ते और गुणवत्तापूर्ण मकान उपलब्ध कराना है, जो लंबे समय से घर खरीदने का सपना देख रहे थे लेकिन महंगी कीमतों के कारण यह संभव नहीं हो पा रहा था।
इन योजनाओं के तहत बूंदी, बारां, बाड़मेर, उदयपुर और धौलपुर में कुल 667 मकान बनाए जाएंगे। इनमें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS), निम्न आय वर्ग (LIG) और मध्यम आय वर्ग (MIG) के लिए स्वतंत्र मकान उपलब्ध होंगे। खास बात यह है कि इन मकानों की कीमत 7.80 लाख रुपए से शुरू होकर 51 लाख रुपए तक होगी। आवेदन करने की अंतिम तिथि 19 सितंबर 2025 तय की गई है, जिससे इच्छुक आवेदक समय रहते योजना में शामिल हो सकें।
कहां-कहां मिलेंगे नए मकान
हाउसिंग बोर्ड की योजनाओं के तहत उदयपुर के पनेरियों की मादड़ी, बारां जिले के अटरू, बूंदी जिले के नैनवां और धौलपुर के बाड़ी रोड पर आवासीय कॉलोनियां विकसित की जाएंगी। इन स्थानों पर कुल 667 मकान बनने हैं। यह मकान आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगे और सामान्य परिवारों की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिज़ाइन किए गए हैं। उदयपुर, जो पर्यटन और शिक्षा का बड़ा केंद्र है, वहां इस योजना से स्थानीय निवासियों के साथ-साथ बाहर से आए लोगों को भी आवास की सुविधा मिलेगी। वहीं बूंदी, बारां और बाड़मेर जैसे अपेक्षाकृत छोटे शहरों में योजनाएं शुरू होने से यहां रियल एस्टेट विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।
आवेदन शुल्क और नियम
राजस्थान हाउसिंग बोर्ड ने इन योजनाओं के लिए स्पष्ट शुल्क संरचना जारी की है।
ईडब्ल्यूएस (EWS) श्रेणी: आवेदन के लिए कुल 8014 रुपए चुकाने होंगे। इसमें 7070 रुपए रजिस्ट्रेशन फीस (7000 + 70 जीएसटी), 354 रुपए आवेदन शुल्क और 590 रुपए प्रोसेसिंग फीस शामिल है। अगर लॉटरी में मकान आवंटित नहीं होता है, तो केवल रजिस्ट्रेशन फीस (7000 रुपए) वापस की जाएगी। बाकी राशि न तो रिफंड होगी और न ही भविष्य में एडजस्ट होगी।
एलआईजी (LIG) श्रेणी: इसमें रजिस्ट्रेशन फीस 15,150 रुपए (15,000 + 150 जीएसटी), आवेदन शुल्क 354 रुपए और प्रोसेसिंग शुल्क 826 रुपए होगा।
एमआईजी (MIG-A) श्रेणी: इसमें रजिस्ट्रेशन फीस 52,500 रुपए (50,000 + 2,500 जीएसटी), आवेदन शुल्क 354 रुपए और प्रोसेसिंग शुल्क 1180 रुपए देना होगा।
यह स्पष्ट किया गया है कि मकान न मिलने की स्थिति में केवल रजिस्ट्रेशन फीस ही वापस होगी। इसका मतलब है कि आवेदकों को आवेदन और प्रोसेसिंग शुल्क का नुकसान उठाना पड़ सकता है।
मंत्री गोदारा ने उठाया शिवबाड़ी योजना का मुद्दा
आवासीय योजनाओं की लॉन्चिंग के दौरान खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा भी मौजूद रहे। उन्होंने बीकानेर की शिवबाड़ी योजना का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इस योजना के लिए लगभग 2200 बीघा जमीन का अधिग्रहण तो किया जा चुका है, लेकिन योजना की प्लानिंग पूरी नहीं हो पाई है। इस वजह से प्रभावित खातेदारों को अब तक मुआवजे की जमीन के पट्टे नहीं दिए गए हैं। गोदारा ने मांग की कि बोर्ड स्तर पर लंबित कार्यों को जल्द पूरा किया जाए और बीकानेर में भी नई आवासीय योजना शुरू की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि योजनाओं का समय पर पूरा होना बेहद जरूरी है ताकि आम लोगों का भरोसा हाउसिंग बोर्ड पर बना रहे।
आवासीय योजनाओं का महत्व
राजस्थान में लगातार बढ़ती जनसंख्या और शहरीकरण के कारण मकानों की मांग तेजी से बढ़ी है। खासतौर पर आर्थिक रूप से कमजोर और मध्यम वर्ग के लोग किराए पर रहने के लिए मजबूर हैं। ऐसे में हाउसिंग बोर्ड की यह पहल उनके लिए राहत लेकर आई है। सस्ती दरों पर गुणवत्तापूर्ण मकान उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता रही है। इन योजनाओं से न केवल आवास संकट कम होगा बल्कि छोटे शहरों में रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
वन स्टेट वन हाउसिंग विज़न की ओर कदम
राज्य सरकार लगातार ‘वन स्टेट वन हाउसिंग विज़न’ की दिशा में काम कर रही है। हर जिले में योजनाएं शुरू करने से यह सुनिश्चित होगा कि कोई भी परिवार बिना घर के न रहे। हाउसिंग बोर्ड की यह पहल प्रदेश में किफायती आवास उपलब्ध कराने की दिशा में एक सशक्त कदम है।


