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शिक्षा विभाग का फैसला भ्रष्टाचार और अश्लीलता में दोषी शिक्षकों के घर बाहर लगेगी जांच रिपोर्ट

शिक्षा विभाग का फैसला भ्रष्टाचार और अश्लीलता में दोषी शिक्षकों के घर बाहर लगेगी जांच रिपोर्ट

शोभना शर्मा।  राजस्थान का शिक्षा विभाग अब पूरी तरह से सख्त रवैया अपनाने जा रहा है। लंबे समय से विभागीय स्तर पर भ्रष्टाचार और अश्लीलता के मामलों को लेकर कई शिकायतें आती रही हैं। कई बार अधिकारी और कर्मचारी गंभीर आरोपों में फंसे भी हैं, लेकिन कार्रवाई के अभाव में ऐसे लोग बच निकलते थे। अब शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने साफ कर दिया है कि ऐसे दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।

मंगलवार को जयपुर स्थित शिक्षा संकुल सभागार में विभागीय लंबित प्रकरणों की समीक्षा बैठक हुई। इस दौरान शिक्षा मंत्री ने अधिकारियों के साथ बैठक की और सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार, अश्लीलता और एसीबी (ACB) से जुड़े गंभीर मामलों को अब छुपाया नहीं जाएगा, बल्कि इनके दोषियों को सरेआम बेनकाब किया जाएगा।

घर के बाहर लगेगी रिपोर्ट

दिलावर ने स्पष्ट कहा कि भ्रष्टाचार और अश्लीलता जैसे घृणित मामलों में दोषी पाए गए अधिकारियों, शिक्षकों और कर्मचारियों के खिलाफ विभाग सख्त कदम उठाएगा। न केवल उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी, बल्कि जांच प्रकरण की रिपोर्ट भी उनके घर के बाहर चस्पा की जाएगी। ऐसा करने के पीछे विभाग का उद्देश्य यह है कि दोषियों की करतूत सिर्फ दफ्तरों तक सीमित न रहे, बल्कि उनके परिवार और रिश्तेदारों को भी सच पता चल सके।

यह कदम एक तरह से सार्वजनिक शर्मिंदगी (Public Shaming) की नीति है, जिससे विभाग उम्मीद करता है कि भविष्य में कोई भी शिक्षक, कर्मचारी या अधिकारी इस तरह की हरकत करने से पहले दस बार सोचेगा।

लंबित मामलों के निस्तारण पर जोर

बैठक में शिक्षा मंत्री ने लंबित प्रकरणों को प्राथमिकता से निपटाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग में वर्षों से कई फाइलें धूल खा रही हैं। इन मामलों का जल्द निस्तारण होना चाहिए, ताकि साफ और पारदर्शी कार्यप्रणाली सामने आए।

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि अब ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अगर किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार या गैर-जिम्मेदारी पाई जाती है, तो विभाग उस अधिकारी या कर्मचारी को तुरंत कटघरे में खड़ा करेगा।

कांग्रेस पर कड़ा प्रहार

बैठक के बाद जब मंत्री मीडिया से रूबरू हुए, तो उन्होंने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। पंचायत चुनाव से जुड़े सवाल पर दिलावर ने कहा कि कोर्ट का जो भी आदेश होगा, सरकार विधि विशेषज्ञों से राय लेकर आगे की प्रक्रिया तय करेगी। लेकिन कांग्रेस पर वार करते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस की हालत राजस्थान में बेहद कमजोर हो चुकी है।

दिलावर ने कहा कि कांग्रेस नेताओं को जनता ने उनकी “औकात” बता दी है। वे अब सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति कर सकते हैं, लेकिन जनता ने उन्हें नकार दिया है। उन्होंने आगे कहा कि विधानसभा सत्र में भी हम कांग्रेस को उसी तरह जवाब देंगे जैसे अब तक देते आए हैं।

भ्रष्टाचार के खिलाफ पावरफुल मैसेज

शिक्षा मंत्री का यह फैसला निश्चित रूप से विभाग में काम कर रहे भ्रष्टाचारियों और अनुशासनहीन कर्मचारियों के लिए बड़ा झटका है। परिवार और समाज में बदनामी का डर ऐसे लोगों को गलत रास्ते पर जाने से रोक सकता है। राजस्थान में पहली बार इस तरह का कदम उठाया जा रहा है, जिसमें दोषियों को घर-घर पर बेनकाब किया जाएगा।

इस फैसले से शिक्षा विभाग के भीतर अनुशासन और पारदर्शिता लाने की कोशिश साफ दिखाई देती है। लंबे समय से शिक्षा विभाग पर यह आरोप लगते रहे हैं कि भ्रष्टाचार और लापरवाही के कारण शिक्षा व्यवस्था चरमराई हुई है। लेकिन अब सरकार के इस कदम से एक बड़ा मैसेज गया है कि कोई भी व्यक्ति कानून और विभागीय अनुशासन से ऊपर नहीं है।

नतीजों का इंतजार

अब सबकी नजर इस बात पर है कि शिक्षा विभाग इस फैसले को कितनी कड़ाई से लागू करता है। क्या वास्तव में दोषियों की रिपोर्ट उनके घरों पर चस्पा की जाएगी या यह सिर्फ एक चेतावनी बनकर रह जाएगी? अगर विभाग ईमानदारी से इसे लागू करता है तो इसका असर दूरगामी होगा।

इस फैसले से न केवल विभागीय अनुशासन मजबूत होगा, बल्कि आम जनता का विश्वास भी शिक्षा व्यवस्था में बढ़ेगा। साथ ही, जो लोग अपने बच्चों को शिक्षा संस्थानों में भेजते हैं, वे भी इस कदम से संतोष महसूस करेंगे कि शिक्षक और अधिकारी अपने पद की गरिमा को निभाने के लिए बाध्य होंगे।

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