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राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश के बाद पंचायती और निकाय चुनाव 2025 की तैयारियां तेज

राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश के बाद पंचायती और निकाय चुनाव 2025 की तैयारियां तेज

शोभना शर्मा।  राजस्थान में पंचायती राज संस्थाओं और शहरी निकाय के चुनाव को लेकर लंबे समय से चल रही अनिश्चितता अब खत्म होती नजर आ रही है। राजस्थान हाईकोर्ट के हालिया आदेश के बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायत और निकाय चुनाव कराने की तैयारी शुरू कर दी है। राज्य निर्वाचन आयुक्त मधुकर गुप्ता ने स्पष्ट किया कि जिन पंचायतों और शहरी निकायों का पांच साल का कार्यकाल पूरा हो चुका है या अगले दो महीने में पूरा होने वाला है, वहां चुनाव कराए जाएंगे। आयोग ने साफ कर दिया है कि कानून के मुताबिक हर पांच साल में चुनाव होना अनिवार्य है। ऐसे में देरी की कोई गुंजाइश नहीं है। आयोग ने अगले सात से दस दिनों के भीतर चुनाव की औपचारिक घोषणा करने की तैयारी कर ली है। इस घोषणा के बाद करीब 11 हजार पंचायतों और 150 से ज्यादा नगर निकायों में चुनावी बिगुल बज जाएगा।

‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ को बताया अव्यावहारिक

चुनाव को लेकर उठ रहे “वन स्टेट, वन इलेक्शन” के सवाल पर राज्य निर्वाचन आयुक्त मधुकर गुप्ता ने दो टूक कहा कि यह अभी व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने साफ किया कि जब तक संविधान में संशोधन नहीं होता, तब तक इस व्यवस्था को लागू नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि किसी भी निकाय या पंचायती राज संस्था का कार्यकाल पूरा हुए बिना समय से पहले चुनाव करवाने का कोई प्रावधान नहीं है। इसके अलावा गुप्ता ने यह भी कहा कि ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ के लिए पर्याप्त संसाधनों की भी जरूरत होगी। इसमें अतिरिक्त ईवीएम, मतदान कर्मियों और लॉजिस्टिक व्यवस्था शामिल है। फिलहाल ऐसी कोई संभावना नहीं है कि सभी पंचायत और निकायों के चुनाव एक साथ कराए जा सकें।

अन्य राज्यों के उदाहरण भी दिए

मधुकर गुप्ता ने इस मुद्दे पर विस्तार से अपनी बात रखते हुए कहा कि चुनाव में देरी केवल राजस्थान की समस्या नहीं है। हरियाणा और पंजाब में भी चुनाव में देरी हुई थी, तब पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने इसमें दखल देकर आदेश दिए थे। इसी तरह कर्नाटक में भी पंचायत चुनाव में देरी हुई थी, वहां भी हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट को दखल देना पड़ा था। उन्होंने कहा कि न्यायालयों ने हमेशा यह सुनिश्चित किया है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं का कार्यकाल पांच साल से आगे न बढ़े। यही वजह है कि राजस्थान हाईकोर्ट का आदेश भी इन्हीं कानूनी प्रावधानों के अनुरूप है।

पंचायत राज मंत्री ने दिया बयान

राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ को अव्यावहारिक करार देने के बाद पंचायत राज मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि इस मुद्दे पर सामूहिक फैसला लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार इस पर सभी पक्षों से विचार-विमर्श करेगी और जो भी निर्णय लिया जाएगा, उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।

जिला परिषद और पंचायत समिति चुनाव की घोषणा बाद में

फिलहाल राज्य निर्वाचन आयोग ने साफ किया है कि जिला परिषदों और पंचायत समितियों के चुनाव की घोषणा बाद में की जाएगी। इसका कारण यह है कि वर्तमान में 21 जिला परिषदों और 222 पंचायत समितियों का कार्यकाल नवंबर-दिसंबर 2025 में समाप्त होगा। ऐसे में इनके चुनाव की अधिसूचना बाद में जारी की जाएगी। वहीं, 6 जिला परिषदों और 78 पंचायत समितियों का कार्यकाल अगस्त-सितंबर 2026 तक चलेगा और 4 जिला परिषदों तथा 30 पंचायत समितियों का कार्यकाल नवंबर-दिसंबर 2026 में समाप्त होगा। इसलिए इन चुनावों का ऐलान अलग से किया जाएगा।

परिसीमन को लेकर स्थिति स्पष्ट

राज्य सरकार ने हाल ही में शहरी निकायों और पंचायतों के वार्डों का परिसीमन किया है। इसके साथ ही कई नई पंचायतों के गठन का भी निर्णय लिया गया है। इस संदर्भ में राज्य निर्वाचन आयुक्त ने कहा कि यदि सरकार इन नए परिसीमन और गठन से संबंधित नोटिफिकेशन जारी कर देती है, तो चुनाव उसी आधार पर कराए जाएंगे। लेकिन यदि परिसीमन से संबंधित नोटिफिकेशन जारी नहीं होता, तो फिर चुनाव पुराने परिसीमन के अनुसार ही कराए जाएंगे। इससे स्पष्ट है कि सरकार की अधिसूचना आने या न आने से चुनाव प्रक्रिया पर सीधा असर पड़ेगा।

लोकतांत्रिक प्रक्रिया को समय पर पूरा करना जरूरी

राज्य निर्वाचन आयोग का यह कदम लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूती देने वाला है। पंचायत और निकाय चुनाव केवल सत्ता हस्तांतरण का माध्यम नहीं हैं, बल्कि ग्रामीण और शहरी स्तर पर लोकतंत्र की नींव को मजबूत करने वाले स्तंभ हैं। ऐसे में इन चुनावों में देरी न होकर समय पर होना जरूरी है। हाईकोर्ट का आदेश इस बात को रेखांकित करता है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं का कार्यकाल पांच साल से ज्यादा नहीं बढ़ाया जा सकता। समय रहते चुनाव होना ही संविधान और लोकतंत्र की असली आत्मा है।

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