मनीषा शर्मा। राजस्थान में उच्च शिक्षा की चाहत रखने वाले हजारों स्टूडेंट्स के लिए बड़ी खबर आई है। प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में खाली पड़ी सीटों को भरने के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने एक बार फिर एडमिशन प्रक्रिया शुरू करने का फैसला लिया है। यह प्रक्रिया 23 अगस्त तक ऑफलाइन मोड में चलेगी, जिसमें स्टूडेंट्स अपने संबंधित कॉलेज जाकर दस्तावेज और फीस जमा कर दाखिला ले सकेंगे। राजस्थान कॉलेज शिक्षा आयुक्त डॉ. ओपी बैरवा ने जानकारी दी कि प्रदेशभर में कुल 665 सरकारी कॉलेजों में एडमिशन के लिए अब तक 1 लाख 95 हजार 935 स्टूडेंट्स ने अपनी फीस जमा कर दाखिला ले लिया है। हालांकि, कॉलेजों में कुल 2 लाख 68 हजार सीटें उपलब्ध थीं, जिनके लिए चार लाख से ज्यादा आवेदन आए थे।
डिफॉल्टर स्टूडेंट्स के कारण खाली रहीं सीटें
बैरवा ने बताया कि एडमिशन प्रक्रिया के दौरान लगभग 1 लाख 54 हजार स्टूडेंट्स ऐसे थे, जो मेरिट लिस्ट में शामिल होने के बावजूद निर्धारित समय पर फीस जमा नहीं कर पाए। फीस जमा न कराने की वजह से ये सभी स्टूडेंट डिफॉल्टर की श्रेणी में आ गए और उनकी सीटें खाली रह गईं। इन्हें मौका देने के लिए विभाग ने पहले ही एक अतिरिक्त अवसर प्रदान किया था, लेकिन उसके बाद भी प्रदेशभर में लगभग 68 हजार सीटें खाली रह गईं। यही कारण है कि अब विभाग ने सीधे ऑफलाइन एडमिशन का रास्ता अपनाने का निर्णय लिया है।
मेरिट के आधार पर होगा दाखिला
ऑफलाइन एडमिशन प्रक्रिया में स्टूडेंट्स को दाखिला मेरिट के आधार पर दिया जाएगा। अगर किसी कॉलेज में सीट से ज्यादा आवेदन आते हैं तो प्राथमिकता मेरिट लिस्ट को दी जाएगी। वहीं, जिन कॉलेजों में सीटें जल्दी भर जाएंगी और वहां अभी भी आवेदन लंबित रहेंगे, तो ऐसे स्टूडेंट्स को उन कॉलेजों में एडजस्ट किया जाएगा, जहां आवेदन अपेक्षाकृत कम आए हैं और सीटें अभी भी रिक्त हैं।
कॉलेजों में बढ़ेगी गतिविधि
इस घोषणा के बाद अब प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। हजारों स्टूडेंट्स, जो अब तक दाखिले से वंचित रह गए थे, उनके पास उच्च शिक्षा पाने का यह एक नया मौका है। यह फैसला खासकर ग्रामीण और पिछड़े इलाकों के उन युवाओं के लिए राहतभरी खबर है, जिनके पास प्राइवेट कॉलेजों की महंगी फीस वहन करने का विकल्प नहीं होता।
शिक्षा विभाग की पहल
राजस्थान का उच्च शिक्षा विभाग पिछले कुछ वर्षों से सरकारी कॉलेजों में शिक्षा का स्तर और पहुंच बढ़ाने की दिशा में लगातार काम कर रहा है। इस बार की एडमिशन प्रक्रिया से यह स्पष्ट होता है कि विभाग चाहता है कि कोई भी सीट खाली न रहे और अधिक से अधिक स्टूडेंट्स सरकारी कॉलेजों से उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकें। बैरवा ने कहा कि विभाग का उद्देश्य हर deserving छात्र को उच्च शिक्षा का अवसर प्रदान करना है। यही वजह है कि ऑफलाइन एडमिशन प्रक्रिया शुरू की गई है ताकि वे स्टूडेंट्स, जो तकनीकी कारणों या समय पर फीस जमा न कर पाने की वजह से पीछे रह गए थे, उन्हें एक और अवसर मिल सके।
स्टूडेंट्स में उत्साह
इस नई प्रक्रिया की घोषणा के बाद स्टूडेंट्स में उत्साह है। जो छात्र पहले एडमिशन नहीं ले पाए थे, वे अब कॉलेज जाकर दस्तावेज जमा कर सकते हैं। इससे हजारों परिवारों को राहत मिलेगी क्योंकि सरकारी कॉलेजों में न केवल फीस कम होती है बल्कि शिक्षा का स्तर भी लगातार सुधर रहा है।


