मनीषा शर्मा। राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर बिजली बिल को लेकर तीखा विवाद देखने को मिल रहा है। नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल और प्रदेश के ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर आमने-सामने हैं। विवाद की शुरुआत तब हुई जब बेनीवाल ने आरोप लगाया कि उनके घर बिजली विभाग की ओर से जानबूझकर कार्रवाई की गई है और यह कार्रवाई पूरी तरह राजनीतिक द्वेष से प्रेरित है। उन्होंने यहां तक कहा कि ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर पर भी 2 लाख रुपये का बिजली बिल बकाया है, ऐसे में उनके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।
इस आरोप का जवाब देते हुए ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने बेनीवाल की सोच और रवैये पर सीधा हमला बोला। नागर का कहना था कि हनुमान बेनीवाल की शुरू से ही ऐसी धारणा रही है कि बिजली का बिल जमा करने की जरूरत ही नहीं है। उनके अनुसार, बेनीवाल का रवैया यह रहा है कि ट्रांसफार्मर को बिना बिल चुकाए ले जाओ और बिजली विभाग की नियमावली की अनदेखी करो। मंत्री ने यह भी कहा कि अब इस तरह की सोच पर रोक लगाई गई है और कानून के अनुसार सभी पर कार्रवाई की जा रही है।
नागर ने साफ किया कि उनके घर का बिजली बिल सरकार द्वारा जमा किया जाता है, इसलिए बेनीवाल का आरोप पूरी तरह तथ्यहीन है। उन्होंने यह भी कहा कि बेनीवाल कई बार आवेश में आकर ऐसी बातें कह जाते हैं, जिन पर खुद उनका नियंत्रण नहीं होता। मंत्री के मुताबिक, यह कोई नई बात नहीं है, बल्कि बेनीवाल का यह पुराना रवैया रहा है कि बिजली के नियमों का पालन न किया जाए।
ऊर्जा मंत्री ने इस विवाद में आगे स्पष्ट किया कि सरकार ने सभी अधिकारियों को समानता के साथ कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। कोई भी व्यक्ति, चाहे वह जनप्रतिनिधि हो या सरकारी अधिकारी, अगर बिजली के उपयोग में अनियमितता करता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। मंत्री ने यह भी कहा कि बिजली चोरी कम होगी तो राज्य के लोगों को बिना रुकावट के पूरी बिजली उपलब्ध कराई जा सकेगी।
इस विवाद की पृष्ठभूमि में देखा जाए तो हाल ही में बिजली विभाग ने बकाया बिल और अनियमितताओं के मामलों में कई जगह कार्रवाई की है। इसी कड़ी में बेनीवाल के घर पर भी विभाग की टीम पहुंची, जिसके बाद यह मुद्दा राजनीतिक रंग लेने लगा। बेनीवाल का कहना है कि यह कार्रवाई उन्हें राजनीतिक रूप से दबाने के लिए की गई है, जबकि मंत्री का कहना है कि कानून सभी के लिए समान है और किसी पर भी पक्षपात नहीं किया जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद सिर्फ बिजली बिल तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे आने वाले चुनावों की राजनीतिक रणनीतियां भी छिपी हुई हैं। बेनीवाल, जो अक्सर सरकार की नीतियों पर खुलकर सवाल उठाते हैं, इस मुद्दे के जरिए सरकार पर सीधा हमला कर रहे हैं। वहीं, ऊर्जा मंत्री नागर इस मामले में अपने विभाग और सरकारी कार्रवाई को सही ठहराने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।
बिजली चोरी और बकाया बिल का मुद्दा राजस्थान में लंबे समय से बहस का विषय रहा है। सरकार का कहना है कि बिजली चोरी और बिल बकाया रहने से वितरण व्यवस्था पर असर पड़ता है और आम जनता को सुचारू बिजली आपूर्ति में कठिनाई होती है। इसी कारण, इस बार सरकार ने सख्ती का रुख अपनाया है और सभी पर कार्रवाई करने की नीति अपनाई है, चाहे वह आम उपभोक्ता हो या फिर कोई बड़ा नेता।


