मनीषा शर्मा। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक बार फिर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए केंद्र की सत्तारूढ़ पार्टी बीजेपी के साथ मिलीभगत के आरोप लगाए हैं। जयपुर के बड़ी चौपड़ पर मीडिया से बातचीत करते हुए गहलोत ने कहा कि चुनाव आयोग का रवैया लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक दिशा में जा रहा है। उन्होंने आयोग पर दबाव में काम करने और विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने का आरोप लगाया।
गहलोत ने विशेष रूप से कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के खिलाफ आयोग की कार्रवाई पर नाराज़गी जाहिर की। उन्होंने कहा, “चुनाव आयोग राहुल गांधी से एफिडेविट मांग रहा है, यह बेहूदी बात है। आप जांच करवा लीजिए और देश को सच्चाई बता दीजिए, लेकिन आपकी नीयत खराब है। आप बीजेपी से मिले हुए हैं और दबाव में काम कर रहे हैं। यह मेरा मानना है और यह देश के लिए खतरनाक है।”
अशोक गहलोत बोले चीन-रूस जैसे हालात की आशंका
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियां चिंताजनक हैं और ऐसा माहौल बनता जा रहा है जैसे चीन और रूस जैसे देशों में होता है, जहां चुनाव आयोग होते हुए भी चुनाव एकतरफा ही होते हैं। गहलोत ने सवाल उठाया कि क्या भारत भी उसी दिशा में जा रहा है? उन्होंने कहा, “राहुल गांधी संविधान बचाने की बात कर रहे हैं और कह रहे हैं कि वोट चोरी हो रहा है, तो चुनाव आयोग को स्पष्टीकरण देने में क्या तकलीफ है?”
गहलोत का मानना है कि यह मुद्दा केवल एक राजनीतिक बहस नहीं है बल्कि देश के लोकतांत्रिक ढांचे और आम नागरिक के अधिकारों की रक्षा से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति का वोट का अधिकार कायम रहना चाहिए क्योंकि अगर लोकतंत्र खत्म हो गया तो देश का मान-सम्मान भी खत्म हो जाएगा।
गरीब के वोट का महत्व
गहलोत ने अपने बयान में इस बात पर जोर दिया कि भारत का लोकतंत्र गरीब से गरीब व्यक्ति को भी मतदान का अधिकार देकर उसे सम्मान प्रदान करता है। उन्होंने कहा, “आज सबसे गरीब आदमी भी वोट डालकर अपनी बात कह सकता है। यही लोकतंत्र की ताकत है, लेकिन मौजूदा हालात में यह ताकत कमजोर होती दिख रही है। अगर यह अधिकार छिन गया तो लोकतंत्र का मूल स्वरूप खत्म हो जाएगा।”
टीकाराम जूली का समर्थन
राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी गहलोत के सुर में सुर मिलाते हुए चुनाव आयोग की स्वतंत्रता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भारत की स्वायत्तशासी संस्थाएं देश की रीढ़ हैं और इनकी निष्पक्षता पर किसी भी प्रकार का संदेह लोकतंत्र के लिए खतरनाक है।
जूली ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने सबूतों के साथ वोट चोरी के मामलों को उजागर किया है, लेकिन चुनाव आयोग इस पर कोई जवाब नहीं दे रहा है। उन्होंने बिहार का उदाहरण देते हुए कहा, “बिहार में 65 लाख वोट काट दिए गए। ऐसे कई मामले हैं जहां लोग एक से अधिक बार वोट डाल रहे हैं, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही।”
संस्थाओं की स्वतंत्रता पर खतरा
टीकाराम जूली ने कहा कि देश की प्रमुख संस्थाएं जैसे चुनाव आयोग, ईडी और इनकम टैक्स विभाग पूरी तरह स्वतंत्र और निष्पक्ष रहनी चाहिएं। उन्होंने कहा, “ये संस्थाएं किसी भी राजनीतिक दल के इशारे पर काम नहीं करें, यही लोकतंत्र की मजबूती का आधार है। लेकिन आज ऐसा लगता है कि इन पर राजनीतिक दबाव हावी हो रहा है।”
जूली का मानना है कि देश को जाति, धर्म और संप्रदाय के आधार पर बांटने के बजाय महंगाई, बेरोजगारी और अशिक्षा जैसी समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश की ऊर्जा विकास और प्रगति में लगनी चाहिए, न कि समाज को विभाजित करने में।
लोकतंत्र की रक्षा का आह्वान
अशोक गहलोत और टीकाराम जूली, दोनों ने ही इस बात पर जोर दिया कि लोकतंत्र की रक्षा हर नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने देशवासियों से अपील की कि वे अपने वोट के अधिकार और संविधान की रक्षा के लिए एकजुट हों। गहलोत ने कहा कि अगर जनता सजग और सक्रिय रहेगी तो किसी भी संस्था को दबाव में काम करने की हिम्मत नहीं होगी।


