मनीषा शर्मा। राजस्थान में छात्र संघ चुनाव को लेकर पिछले कुछ समय से माहौल गरमाया हुआ है। प्रदेश के अलग-अलग विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में छात्र नेता लंबे समय से चुनाव की मांग कर रहे हैं। इस बीच कई स्थानों पर विरोध-प्रदर्शन भी हुए हैं। 5 अगस्त को जयपुर में एनएसयूआई (NSUI) ने इस मुद्दे पर जोरदार प्रदर्शन किया था, जिसमें पूर्व उप मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता सचिन पायलट भी शामिल हुए थे। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन कर रही है और चुनाव को लेकर जानबूझकर टालमटोल कर रही है।
इसी मुद्दे पर 24 जुलाई को राजस्थान विश्वविद्यालय के छात्र जय राव ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इस याचिका में कहा गया कि छात्र संघ चुनाव कराना छात्रों का मौलिक अधिकार है, लेकिन पिछले तीन सत्रों से प्रदेश में चुनाव नहीं हो रहे हैं। याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने 29 जुलाई को राज्य सरकार से इस मामले में जवाब मांगा था।
राजस्थान छात्र संघ चुनाव पर सरकार का जवाब और तर्क
राजस्थान की भजनलाल शर्मा सरकार ने अब हाईकोर्ट में अपना जवाब दाखिल कर दिया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल प्रदेश के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में छात्र संघ चुनाव कराना संभव नहीं है। सरकार ने अपने जवाब में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) लागू करने की प्रक्रिया का हवाला दिया। उनका कहना है कि नई शिक्षा नीति के तहत शैक्षणिक सत्र और कक्षाओं के संचालन में बदलाव किए जा रहे हैं, जिसकी वजह से चुनाव कराने की स्थिति नहीं बन पा रही है।
इसके अलावा, सरकार ने अपने पक्ष में लिंगदोह कमेटी की सिफारिश का भी उल्लेख किया। लिंगदोह कमेटी के अनुसार, छात्र संघ चुनाव सत्र शुरू होने के 8 सप्ताह के भीतर कराए जाने चाहिए। लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में यह समयसीमा पूरी करना मुश्किल है। सरकार ने यह भी बताया कि कई विश्वविद्यालयों के कुलगुरुओं (Vice-Chancellors) ने भी फिलहाल चुनाव न कराने की सिफारिश की है। उनका तर्क है कि शैक्षणिक सत्र के कार्यक्रम और कक्षाओं की नियमितता बनाए रखने के लिए अभी चुनाव टालना ही उचित है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि और विवाद
राजस्थान में छात्र संघ चुनाव को लेकर विवाद नया नहीं है। अशोक गहलोत सरकार ने 2023 में प्रदेश में छात्र संघ चुनाव पर रोक लगा दी थी। उस समय सरकार का तर्क था कि इससे शैक्षणिक माहौल प्रभावित हो सकता है। हालांकि, अब गहलोत समेत कांग्रेस के कई नेता इस रोक को हटाने और चुनाव बहाल करने की मांग कर रहे हैं।
वर्तमान भजनलाल शर्मा सरकार के रुख ने छात्र संगठनों में असंतोष बढ़ा दिया है। एनएसयूआई, एबीवीपी और अन्य छात्र संगठन लगातार यह मांग कर रहे हैं कि चुनाव जल्द से जल्द कराए जाएं, ताकि छात्र समुदाय को अपने प्रतिनिधि चुनने का अधिकार मिल सके। एनएसयूआई का कहना है कि छात्र संघ चुनाव लोकतांत्रिक प्रक्रिया का एक अहम हिस्सा हैं और इसे टालना छात्रों की आवाज दबाने जैसा है।
दूसरी ओर, सरकार का दावा है कि वह छात्रों के हित में ही निर्णय ले रही है और फिलहाल शैक्षणिक सत्र को स्थिर रखना प्राथमिकता है।


