मनीषा शर्मा। राजस्थान की राजधानी जयपुर में कांग्रेस पार्टी ने ‘वोट चोरी’ और चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन न केवल प्रदेश बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी सुर्खियों में रहा, क्योंकि इसमें कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने सरकार और चुनाव आयोग दोनों पर गंभीर आरोप लगाए। पायलट ने कहा कि लोकतंत्र को बचाने के लिए लोगों को जागरूक करना आवश्यक है और वोट चोरी जैसे कृत्य को रोकना देश के लिए अनिवार्य है।
सचिन पायलट ने अपने संबोधन में कहा कि आज संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में भारी कमी है और पारदर्शिता लगभग समाप्त हो गई है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी पहले ही सबूतों के साथ मतदाता सूची में गड़बड़ी का खुलासा कर चुके हैं, लेकिन चुनाव आयोग ने इन आरोपों का कोई जवाब नहीं दिया। पायलट ने आश्चर्य जताया कि जब चुनाव आयोग को सफाई देनी चाहिए थी, तब बीजेपी आगे आकर आयोग का बचाव करने लगी, जो लोकतंत्र के लिए बेहद चिंताजनक है।
पायलट ने कहा कि यह केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने का प्रयास है। उन्होंने वोट चोरी को लोकतंत्र का “सबसे बड़ा पाप” बताते हुए कहा कि अगर मतदाता सूची में हेरफेर होगी, तो चुनाव की निष्पक्षता खत्म हो जाएगी और जनता का भरोसा टूट जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग का दायित्व है कि वह हर एक वोट की शुचिता सुनिश्चित करे, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में यह जिम्मेदारी पूरी नहीं हो रही है।
अपने बयान में पायलट ने मतदाता सूची में गड़बड़ियों के कई उदाहरण भी दिए। उन्होंने कहा कि कई सीटों पर यह सवाल उठता है कि वोट कहां गए – क्या वे जानबूझकर हटा दिए गए या अवैध तरीके से जोड़े गए? उन्होंने बिहार का उदाहरण देते हुए कहा कि कुछ जगहों पर वोट कम किए जा रहे हैं और कुछ स्थानों पर बढ़ाए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि एक ही पते पर 100-100 लोगों के नाम दर्ज हैं और 125 वर्ष से अधिक उम्र के मतदाताओं के नाम भी सूचियों में मौजूद हैं, जो साफ तौर पर फर्जी हैं।
पायलट ने जोर देकर कहा कि ऐसी गड़बड़ियों पर चुनाव आयोग को तुरंत संज्ञान लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि वोटरों की सही पहचान, सही पते और सही उम्र सुनिश्चित करना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है। यदि इन बुनियादी बातों में ही हेरफेर होगी, तो चुनाव परिणाम की विश्वसनीयता संदेह के घेरे में आ जाएगी।
सचिन पायलट ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने चुनाव आयोग के अधिकारियों की चयन प्रक्रिया में बदलाव किया है, जिससे उसकी स्वतंत्रता पर असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि सरकार सीसीटीवी फुटेज खत्म करना चाहती है, जिससे चुनाव प्रक्रिया के दौरान होने वाली गड़बड़ियों का प्रमाण नष्ट हो जाए। पायलट ने यह भी बताया कि वोटर लिस्ट मांगे जाने पर कांग्रेस को वह उपलब्ध नहीं कराई जाती और चोरी-छिपे डेटा डिलीट किया जा रहा है। उन्होंने इस कार्रवाई को बेहद गलत बताते हुए कहा कि इससे जनता के अधिकारों का हनन हो रहा है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे को लेकर अपनी जिम्मेदारी निभाएगी और इस पर लंबा आंदोलन करेगी। यह कोई एक दिन का प्रदर्शन नहीं बल्कि लोकतंत्र को बचाने का अभियान होगा। पायलट ने जनता से अपील की कि वे इस लड़ाई में कांग्रेस का साथ दें, क्योंकि यह केवल एक राजनीतिक दल का मुद्दा नहीं बल्कि पूरे देश के लोकतंत्र की सुरक्षा का मामला है।
इस मामले की पृष्ठभूमि में, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पिछले हफ्ते एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बड़ा आरोप लगाया था। उन्होंने दावा किया था कि 2024 लोकसभा चुनाव में बड़े पैमाने पर वोटरों की धोखाधड़ी हुई। राहुल गांधी के अनुसार, डुप्लिकेट प्रविष्टियां, फर्जी पते, थोक पंजीकरण और एक ही EPIC नंबर का उपयोग करके कई वोट डाले गए, जिससे 1,00,000 से अधिक वोट चोरी हुए। उन्होंने इस संबंध में सबूत भी पेश किए थे।
सचिन पायलट ने कहा कि इन आरोपों को हल्के में नहीं लिया जा सकता, क्योंकि ये केवल चुनाव की प्रक्रिया को नहीं बल्कि लोकतंत्र की नींव को भी प्रभावित करते हैं। उन्होंने मांग की कि चुनाव आयोग तुरंत इस मामले में स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच करे और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।
पायलट ने अंत में कहा कि हार-जीत राजनीति का हिस्सा है, लेकिन अगर लाखों मतदाताओं के अधिकार छीन लिए जाएंगे, तो लोकतंत्र का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर चुनाव आयोग ने इस पर कार्रवाई नहीं की, तो कांग्रेस सड़क से संसद तक आंदोलन करेगी।


