मनीषा शर्मा। जयपुर के बिड़ला ऑडिटोरियम में मंगलवार को विभाजन विभिषिका स्मृति दिवस के अवसर पर एक भव्य संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में प्रदेश के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 1947 में हुए भारत के विभाजन को दुनिया की सबसे बड़ी मानवीय त्रासदी बताया। उन्होंने कहा कि उस समय सत्ता का लालच, तुष्टिकरण की राजनीति और स्वार्थपूर्ण नीतियों ने देश को बांट दिया, जिसके परिणामस्वरूप लाखों लोगों ने अपनी जान गंवाई, करोड़ों लोग बेघर हो गए और देश का इतिहास खून से लिखा गया।
सीएम शर्मा ने अपने संबोधन में सीधे तौर पर कांग्रेस पार्टी पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की गलत नीतियों और सत्ता के मोह के चलते भारत भूमि का दुखद विभाजन हुआ। उन्होंने कहा कि यह केवल सीमाओं का बंटवारा नहीं था, बल्कि करोड़ों लोगों के सपनों, जीवन और भविष्य का भी विनाश था।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि विभाजन के बाद पाकिस्तान से आए हिंदुओं के साथ भी कांग्रेस सरकारों ने अन्याय किया। उन्होंने नागरिकता देने में विफलता का आरोप लगाते हुए कहा कि उल्टे उनकी संपत्ति के मुआवजे से भी इनकार कर दिया गया। सीएम शर्मा के अनुसार, “जिसने देश तोड़ा, वो कभी देश को जोड़ नहीं सकता।”
इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार की सराहना करते हुए कहा कि नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के जरिए उन पीड़ितों को न्याय दिलाने का ऐतिहासिक काम हुआ है, जिन्हें दशकों से अनदेखा किया जा रहा था। सीएम ने कहा कि यह दिवस हमें राष्ट्र की एकता और अखंडता के संकल्प को और मजबूत करने की प्रेरणा देता है।
कार्यक्रम के दौरान प्रदेश संयोजक अशोक परनामी ने भी कांग्रेस की नीतियों को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि विभाजन कोई मजबूरी नहीं था, बल्कि यह कांग्रेस की मंजूरी और सत्ता के लोभ का परिणाम था। उनका मानना है कि यदि उस समय सत्ता सरदार वल्लभभाई पटेल को मिली होती, तो देश का बंटवारा रोका जा सकता था।
परनामी ने पाकिस्तान से आए हिंदुओं को “शरणार्थी नहीं, बल्कि पुरुषार्थी” बताते हुए कहा कि उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी जीवन को आगे बढ़ाया और भारत की प्रगति में योगदान दिया। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का 14 अगस्त को विभाजन विभिषिका स्मृति दिवस मनाने का फैसला ऐतिहासिक है, जिससे आने वाली पीढ़ियां इस त्रासदी को याद रखेंगी और उससे सबक ले सकेंगी।
इस संगोष्ठी में वक्ताओं ने 1947 के विभाजन के दौरान झेली गई पीड़ा, विस्थापन और कठिनाइयों को विस्तार से याद किया। उन्होंने कहा कि विभाजन केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि मानवता के लिए एक गहरा घाव है, जिसकी टीस आज भी महसूस की जाती है।