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डिजिटल जनगणना: राजस्थान में पहली बार 2026 से सेल्फ सेंसस

डिजिटल जनगणना: राजस्थान में पहली बार 2026 से सेल्फ सेंसस

मनीषा शर्मा। राजस्थान में पहली बार डिजिटल जनगणना की तैयारी शुरू हो चुकी है। यह जनगणना 1 जनवरी 2026 से 31 मार्च 2027 तक चलेगी और इसमें लोगों को घर बैठे खुद अपना जनगणना फॉर्म भरने की सुविधा मिलेगी। इसके लिए सेल्फ सेंसस वेब पोर्टल और मोबाइल ऐप लॉन्च किया जाएगा, जिसके जरिए नागरिक सीधे ऑनलाइन अपने परिवार और मकान से जुड़ी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। बाद में इस डाटा की जांच और सत्यापन सरकारी कर्मचारी करेंगे।

जयपुर स्थित जनगणना के क्षेत्रीय निदेशालय में जनगणना निदेशक बिष्णु चरण मल्लिक ने मीडिया को बताया कि यह पहली बार है जब देशभर में डिजिटल मोड पर जनगणना होगी। इसके तहत राजस्थान सहित सभी राज्यों में ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से डेटा एकत्र किया जाएगा। इस बार जातिगत जनगणना भी की जाएगी और फॉर्म में कुछ नए सवाल जोड़े जाएंगे, जबकि कुछ पुराने सवाल हटा दिए जाएंगे।

जनगणना प्रक्रिया दो चरणों में होगी। पहले चरण में अप्रैल 2026 से सितंबर 2026 तक मकानों की लिस्टिंग और गणना की जाएगी। इसके बाद दूसरे चरण में 9 से 20 फरवरी 2027 के बीच लोगों की गिनती होगी, जबकि 28 फरवरी 2027 को बेघरों की गिनती की जाएगी।

डिजिटल जनगणना में कुल 2 लाख से अधिक कर्मचारी और अधिकारी जुटेंगे। इनमें लगभग 1.50 लाख प्रगणक घर-घर जाकर डेटा एकत्र करेंगे, जबकि 30 से 40 हजार सुपरवाइजर और अन्य प्रशासनिक अधिकारी निगरानी और सत्यापन का कार्य करेंगे। जनगणना में ज्यादातर शिक्षक और स्थानीय निकायों के कर्मचारी शामिल होंगे। इस अवधि में, यानी 1 जनवरी 2026 से 31 मार्च 2027 तक, इन कर्मचारियों के तबादले नहीं होंगे। इसके लिए राज्य सरकार विशेष अधिसूचना जारी करेगी।

जनगणना प्रक्रिया के दौरान प्रशासनिक सीमाएं भी पूरी तरह फ्रीज रहेंगी। यानी इस अवधि में कोई नया गांव, शहर, तहसील, उपखंड या जिला नहीं बनाया जा सकेगा और न ही मौजूदा सीमाओं में बदलाव किया जा सकेगा। यह नियम वार्ड स्तर से लेकर जिले तक सभी इकाइयों पर लागू होगा।

जनगणना में बाहरी राज्यों से आए लोगों की भी गिनती की जाएगी। यदि कोई व्यक्ति छह महीने से अधिक समय से किसी इलाके में रह रहा है, तो उसकी गणना उसी क्षेत्र में होगी। इससे जनसंख्या के वास्तविक आंकड़े और अधिक सटीकता से दर्ज किए जा सकेंगे।

डिजिटल मोड के इस्तेमाल से जनगणना की निगरानी रियल टाइम में होगी। जनगणना कर्मियों के मोबाइल ऐप में हर घर और व्यक्ति की जानकारी सीधे दर्ज की जाएगी। साथ ही डिजिटल मैप की सुविधा भी उपलब्ध होगी, जिससे यह पता लगाया जा सकेगा कि किस कर्मचारी ने कितने घरों तक पहुंच बनाई और कितने लोगों का डेटा दर्ज किया। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और गलतियों की संभावना कम होगी।

डिजिटल जनगणना का यह नया स्वरूप न केवल प्रशासनिक कार्यों में तेजी लाएगा, बल्कि नागरिकों के लिए भी प्रक्रिया को आसान और सुलभ बनाएगा। सेल्फ सेंसस पोर्टल के जरिए घर बैठे जानकारी भरने की सुविधा समय और संसाधनों की बचत करेगी। साथ ही, तकनीकी उपयोग से डेटा की शुद्धता और सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।

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