मनीषा शर्मा। पिछले कुछ समय से राजस्थान में संगठन और सत्ता बदलाव और राजनीतिक हलचल चर्चाएं तेज हो गई हैं। सत्ता से लेकर संगठन तक बड़े फेरबदल की अटकलें जोरों पर हैं। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के हालिया दिल्ली दौरों ने इन अटकलों को और मजबूती दी है। वहीं, प्रदेश में लंबे समय से मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा भी गर्म है। इस बीच, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ का बयान इन सियासी कयासों को और हवा देने वाला साबित हुआ है।
हाल ही में एक मीडिया इंटरैक्शन के दौरान जब मदन राठौड़ से संगठन के विस्तार और बदलाव को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने साफ कहा कि पार्टी सत्ता से संगठन और संगठन से सत्ता में नेताओं को भेज सकती है। उनका कहना था कि कई मंत्रियों को संगठन में लेने पर विचार किया जा रहा है। यह संगठन को और मजबूत करने की दिशा में एक कदम हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि संगठन ही सत्ता का निर्माण करता है, इसलिए कार्यकर्ताओं और नेताओं की भूमिकाओं में बदलाव स्वाभाविक है।
मदन राठौड़ ने स्पष्ट किया कि संगठन की मजबूती के लिए कार्यकारिणी का गठन परंपरागत प्रक्रिया के तहत किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि बूथ स्तर से शुरुआत कर मंडल समिति और फिर जिला समिति का गठन किया जाता है। इसी प्रक्रिया में अब प्रदेश कार्यकारिणी के लिए नाम दिल्ली भेजे गए हैं। प्रत्येक पद के लिए तीन-तीन नाम प्रस्तावित किए गए हैं और अब अंतिम निर्णय बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व दिल्ली में करेगा। राठौड़ ने कहा कि उन्हें इस प्रक्रिया में कोई आपत्ति नहीं है और संगठन के सभी कार्यक्रम सुचारू रूप से चल रहे हैं।
प्रदेश अध्यक्ष ने यह भी कहा कि बीजेपी में कोई भी कार्यकर्ता या नेता खाली नहीं रहेगा। पार्टी में हर किसी को उसकी क्षमता और विशेषज्ञता के अनुसार काम दिया जाएगा। मोर्चे बदलते रहना एक सामान्य प्रक्रिया है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर संगठन में किसी मंत्री की जरूरत है तो उसे वहां भेजा जाएगा, वहीं अगर सत्ता में किसी नेता की योजनाओं को बनाने या क्रियान्वित करने में उपयोगिता है तो उसे सरकार में रखा जाएगा।
मदन राठौड़ के इस बयान को प्रदेश की राजनीति में हो रहे संभावित बदलावों के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह बयान मंत्रिमंडल विस्तार, निष्क्रिय मंत्रियों की भूमिकाओं में बदलाव और संगठन को नए सिरे से सशक्त करने की दिशा में उठाए जाने वाले कदमों का संकेत हो सकता है। दिल्ली से मंजूरी मिलने के बाद यह बदलाव प्रदेश की राजनीति में एक नया संतुलन स्थापित कर सकते हैं।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और वसुंधरा राजे के दिल्ली दौरों के साथ-साथ कई अन्य नेताओं की शीर्ष नेतृत्व से मुलाकातें पहले ही इन बदलावों की ओर इशारा कर रही थीं। ऐसे में अब प्रदेश अध्यक्ष का यह बयान यह साबित करता है कि संगठन और सत्ता में फेरबदल महज अटकल नहीं, बल्कि एक योजनाबद्ध प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि बीजेपी नेतृत्व संगठन को और अधिक सक्रिय, चुस्त और कार्यक्षम बनाने के लिए उन नेताओं को नई जिम्मेदारियां देने पर विचार कर रहा है, जो वर्तमान में अपनी भूमिका में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं। वहीं, संगठन के अनुभवी नेताओं को सत्ता में लाकर नीतियों और योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन का प्रयास किया जाएगा।