शोभना शर्मा, अजमेर। मोर, जिसे अंग्रेजी में Peacock कहते हैं, भारत का राष्ट्रीय पक्षी है और अपनी खूबसूरत पंखों और मोहक नृत्य के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। मोर का सांस्कृतिक, धार्मिक और पारिस्थितिक महत्व बहुत गहरा है। हाल के वर्षों में, मोर पालन (Peacock Farming) को लेकर लोगों में रुचि बढ़ी है, खासकर पर्यटन, सजावटी पक्षी पालन और जैव विविधता संरक्षण के संदर्भ में। लेकिन, भारत में मोर पालन के लिए कड़े कानूनी नियम लागू हैं, क्योंकि यह वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत संरक्षित प्रजाति है।
1. Peacock Farming क्या है?
Peacock Farming का अर्थ है नियंत्रित वातावरण में मोरों का संरक्षण, प्रजनन और पालन-पोषण करना। इसे सामान्यतः निम्नलिखित उद्देश्यों से किया जाता है:
जैव विविधता संरक्षण
सजावटी और पर्यटन आकर्षण
पंख संग्रह (केवल प्राकृतिक रूप से गिरे हुए पंख)
शोध एवं शिक्षा
2. Peacock Farming के कानूनी पहलू
भारत में मोर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I में शामिल है। इसका मतलब है कि: बिना सरकारी अनुमति मोर का शिकार, व्यापार या नुकसान पहुंचाना गैरकानूनी है। मोरों का पालन केवल वन्यजीव विभाग से विशेष लाइसेंस मिलने पर ही संभव है। मोर के पंख केवल तब बेचे जा सकते हैं जब वे प्राकृतिक रूप से गिरे हों। मोर की बिक्री, अंडों का व्यापार या मांस का उपयोग प्रतिबंधित है।
लाइसेंस प्रक्रिया:
आवेदन – राज्य के वन्यजीव विभाग में
पालन का उद्देश्य – शोध, पर्यटन, या संरक्षण
निरीक्षण – पालन स्थल की सुरक्षा और सुविधाएं
लाइसेंस जारी – वैधता अवधि और शर्तों के साथ
3. Peacock Farming का व्यवसायिक दृष्टिकोण
हालांकि भारत में Peacock Farming सीधे मांस या अंडों के लिए संभव नहीं है, लेकिन कुछ राज्यों में संरक्षण-पर्यटन, पंख बिक्री (गिरे हुए पंख), और फार्म विजिट से आय प्राप्त की जा सकती है।
संभावित आय स्रोत:
प्राकृतिक रूप से गिरे हुए पंखों की बिक्री
फार्म विजिट और इको-टूरिज्म
फोटोशूट लोकेशन रेंट
मोर संरक्षण प्रोजेक्ट्स में सरकारी फंडिंग
4. Peacock Farming के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं
स्थान का चयन
खुले, हरे-भरे और सुरक्षित वातावरण वाला क्षेत्र
कम से कम 1000–1500 वर्गमीटर जगह 5–6 मोरों के लिए
शेड और सुरक्षा
ऊंची बाउंड्री वॉल या नेटिंग
बारिश और धूप से बचाव के लिए शेड
जमीन पर घास और प्राकृतिक पौधे
खान-पान (Diet)
अनाज – गेहूं, मक्का, ज्वार
फल – पपीता, केला, अंगूर
हरी पत्तियां – पालक, मेथी, गाजर पत्तियां
कीड़े-मकोड़े और प्रोटीन युक्त आहार
पानी की व्यवस्था
हमेशा साफ और ताजा पानी उपलब्ध
गर्मियों में ठंडा पानी और छांव
5. प्रजनन (Breeding) प्रक्रिया
प्रजनन का मौसम – मार्च से अगस्त
एक नर मोर कई मादा मोरों के साथ प्रजनन करता है।
मादा मोर 4–8 अंडे देती है
अंडों का इनक्यूबेशन समय – 27–30 दिन
6. लागत और मुनाफा
प्रारंभिक लागत:
शेड और बाड़ – ₹1,00,000 से ₹2,00,000
लाइसेंस प्रक्रिया और दस्तावेज़ – ₹10,000–₹25,000
शुरुआती 5–6 मोरों के लिए व्यवस्था – ₹50,000–₹70,000
सालाना आहार और रखरखाव – ₹40,000–₹60,000
संभावित मुनाफा:
पंख बिक्री से आय – ₹1,500–₹3,000 प्रति किलो
फार्म विजिट – ₹20,000–₹50,000 सालाना
टूरिज्म पैकेज – ₹50,000–₹1,00,000 सालाना
7. Peacock Farming के फायदे
जैव विविधता का संरक्षण
ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा
सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व
कम बीमारियां और आसान देखभाल
8. Peacock Farming में आने वाली चुनौतियां
कानूनी प्रक्रिया लंबी और जटिल
सीमित व्यवसायिक अवसर
मौसम और वातावरण पर निर्भरता
शिकारी जानवरों से खतरा
9. Peacock Farming शुरू करने के सुझाव
पहले कानूनी अनुमति सुनिश्चित करें । सुरक्षित और प्राकृतिक माहौल तैयार करें। आहार में विविधता रखें । स्वास्थ्य जांच नियमित कराए। पर्यावरण और सांस्कृतिक पहलुओं का सम्मान करें। Peacock Farming केवल एक व्यवसाय नहीं, बल्कि जैव विविधता और सांस्कृतिक धरोहर की रक्षा का माध्यम है। भारत में इसकी कानूनी सीमाएं हैं, इसलिए इसे केवल अनुमति के साथ और जिम्मेदारी से किया जाना चाहिए। सही योजना, पर्यावरण-अनुकूल तकनीक और पर्यटन से जुड़े इनोवेशन के जरिए मोर पालन एक सम्मानजनक और स्थायी आय का स्रोत बन सकता है।


