मनीषा शर्मा। भारत और पाकिस्तान के बीच हालिया सैन्य टकराव के दौरान, भारतीय सेना ने एक ऐसा अभियान चलाया जिसने न केवल दुश्मन को चौंका दिया बल्कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की रणनीतिक क्षमता का नया उदाहरण पेश किया। इस अभियान का नाम था “ऑपरेशन सिंदूर”, जिसे सेना और वायुसेना ने मिलकर अंजाम दिया। इस ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान के कई आतंकी ठिकानों को तबाह किया गया और उनकी सैन्य क्षमता को भी गहरी चोट पहुंचाई गई।
जनरल उपेंद्र द्विवेदी का बयान: ‘चेस गेम’ जैसा ऑपरेशन
भारतीय थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने ऑपरेशन के बारे में बताते हुए कहा कि सरकार ने उन्हें पूरा “फ्री हैंड” दिया था। उन्होंने इस ऑपरेशन को “चेस गेम” जैसा बताया, जिसमें दोनों पक्ष लगातार चालें चलते रहे। कभी भारतीय सेना ने दुश्मन को मात दी, तो कभी जोखिम उठाकर पीछे हटना पड़ा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह एक ग्रे जोन ऑपरेशन था, यानी पारंपरिक युद्ध की तरह सीधी लड़ाई नहीं, बल्कि खुफिया और रणनीति पर आधारित अभियान। 4 अगस्त को IIT मद्रास में ‘अग्निशोध’- इंडियन आर्मी रिसर्च सेल (IARC) के उद्घाटन के दौरान उन्होंने यह संबोधन दिया।
ऑपरेशन की प्लानिंग और पीएम से मुलाकात
जनरल द्विवेदी के अनुसार, 25 अप्रैल को उत्तरी कमान में ऑपरेशन की योजना बनी। इसमें 9 में से 7 आतंकी ठिकानों को निशाना बनाने का फैसला हुआ। 29 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात हुई और रणनीतिक अनुमति मिली। उन्होंने बताया कि “ऑपरेशन सिंदूर” नाम ने पूरे देश को जोड़ दिया। जनता की अपेक्षा इतनी थी कि लोग पूछने लगे कि इसे क्यों रोका गया।
‘अग्निशोध’ का महत्व
‘अग्निशोध’ यानी इंडियन आर्मी रिसर्च सेल (IARC), डिफेंस टेक्नॉलॉजी में भारत का बड़ा कदम है। इसका उद्देश्य है— सैन्यकर्मियों को एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग, साइबर सिक्योरिटी, क्वांटम कंप्यूटिंग, वायरलेस कम्युनिकेशन और अनमैन्ड सिस्टम्स जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षित करना। तकनीकी रूप से दक्ष और आधुनिक युद्ध के लिए तैयार फोर्स बनाना।
वायुसेना की भूमिका और उपलब्धियां
एयर फोर्स चीफ एपी सिंह ने बेंगलुरु में एक कार्यक्रम के दौरान बताया कि ऑपरेशन सिंदूर में— पाकिस्तान के 5 लड़ाकू विमान गिराए गए। एक सर्विलांस एयरक्राफ्ट को 300 किमी दूर से मार गिराया गया, जो सतह से हवा में लक्ष्य भेदने का अब तक का रिकॉर्ड है। हाल ही में खरीदे गए S-400 एयर डिफेंस सिस्टम गेम-चेंजर साबित हुए। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान लंबी दूरी के ग्लाइड बम होते हुए भी उनका इस्तेमाल नहीं कर पाया। साथ ही, बहावलपुर में हुए हमले से पहले और बाद की तस्वीरें इस बात का सबूत हैं कि वहां तबाही हुई।
पाकिस्तान की प्रतिक्रिया
पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने 9 अगस्त को भारतीय दावों को “यकीन न किए जाने योग्य” बताया। उनका आरोप था कि भारत ने तीन महीनों तक ऐसा कोई दावा नहीं किया, जबकि पाकिस्तान ने तुरंत अंतरराष्ट्रीय मीडिया को जानकारी दी थी। आसिफ ने दावा किया कि भारतीय सेना को बॉर्डर पर भारी नुकसान हुआ और कई भारतीय विमान भी खोए गए। उन्होंने सुझाव दिया कि दोनों देशों को अपने एयरक्राफ्ट स्टॉक की स्वतंत्र जांच करवानी चाहिए, हालांकि उन्हें भारत के ऐसा करने पर शक है। उन्होंने चेतावनी दी कि राजनीतिक फायदे के लिए ऐसे “झूठे” दावे परमाणु हथियार रखने वाले देशों के बीच गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं।
ऑपरेशन सिंदूर की असली कार्रवाई
7 मई की रात डेढ़ बजे, भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में आतंकियों के 9 ठिकानों पर एयर स्ट्राइक की। सेना के मुताबिक, इसमें 100 से ज्यादा आतंकी मारे गए। पाकिस्तान के सरकारी मीडिया के अनुसार, हमले के स्थानों में कोटली, बहावलपुर, मुरीदके, बाग और मुजफ्फराबाद शामिल थे। इसमें लश्कर-ए-तैयबा के हेडक्वॉर्टर और जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर का ठिकाना भी निशाने पर था।
रणनीतिक और राजनीतिक असर
“ऑपरेशन सिंदूर” ने भारत की सैन्य क्षमता, खुफिया दक्षता और आधुनिक हथियारों के उपयोग का स्पष्ट प्रदर्शन किया। इसने दिखाया कि भारत आतंकवाद के खिलाफ सीमापार जाकर भी कार्रवाई करने में सक्षम है। पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ा। घरेलू स्तर पर जनता में सुरक्षा बलों के प्रति विश्वास और समर्थन और मजबूत हुआ।