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अभिनव राजस्थान पार्टी के संस्थापक भाजपा में शामिल

अभिनव राजस्थान पार्टी के संस्थापक भाजपा में शामिल

शोभना शर्मा।  राजस्थान की राजनीति में शनिवार, 9 अगस्त 2025 को एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला। रक्षाबंधन के दिन अभिनव राजस्थान पार्टी के संस्थापक और प्रमुख नेता डॉ. अशोक चौधरी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गए। जयपुर स्थित भाजपा प्रदेश मुख्यालय में प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई। इस अवसर पर भाजपा के कई वरिष्ठ पदाधिकारी, कार्यकर्ता और समर्थक मौजूद थे। भाजपा में शामिल होने के बाद डॉ. चौधरी ने कहा कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों, दृष्टिकोण और कार्यशैली से काफी प्रभावित हैं। उन्होंने यह भी बताया कि देश और प्रदेश के विकास के लिए भाजपा की नीतियां प्रभावी और दूरदर्शी हैं, और यही कारण है कि उन्होंने भाजपा में शामिल होने का निर्णय लिया।

अभिनव राजस्थान पार्टी का भविष्य अनिश्चित
डॉ. अशोक चौधरी केवल एक नेता नहीं बल्कि एक राजनीतिक दल के संस्थापक भी हैं। वे अभिनव राजस्थान पार्टी के मुखिया हैं, जिसने पिछले कई वर्षों से प्रदेश की राजनीति में अपनी पहचान बनाने की कोशिश की है। हालांकि, भाजपा में उनके शामिल होने के बाद उनकी पार्टी का भविष्य अब सवालों के घेरे में है।
इस मौके पर डॉ. चौधरी ने अपनी पार्टी के विलय या उसे खत्म करने के संबंध में कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एक पार्टी के प्रमुख का किसी दूसरी पार्टी में जाना आमतौर पर पूर्व की पार्टी के अस्तित्व को कमजोर कर देता है। अब देखना यह होगा कि अभिनव राजस्थान पार्टी का अस्तित्व बरकरार रहता है या यह भाजपा में औपचारिक रूप से विलय हो जाती है।

कई चुनावों में उतरे, लेकिन सफलता नहीं मिली
डॉ. अशोक चौधरी का राजनीतिक करियर चुनौतियों से भरा रहा है। नागौर जिले के निवासी और पेशे से किसान व कारोबारी डॉ. चौधरी ने कई बार विधानसभा और लोकसभा चुनावों में अपनी किस्मत आजमाई, लेकिन उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिली।
वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी ने 63 सीटों पर प्रत्याशी उतारे, लेकिन कोई बड़ी जीत हासिल नहीं कर सकी। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में वे खुद खींवसर विधानसभा सीट से मैदान में उतरे थे, जहां उन्हें 4,357 वोट मिले।
इसके बाद वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने नागौर संसदीय सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन इस बार भी वे जीत से दूर रहे। उन्हें कुल 26,294 वोट मिले। इन परिणामों से साफ है कि अकेले दम पर वे प्रदेश की राजनीति में अपेक्षित पकड़ नहीं बना पाए।

भाजपा में शामिल होने से क्या बदल सकता है
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि भाजपा में शामिल होकर डॉ. चौधरी को संगठन, संसाधन और राजनीतिक नेटवर्क का फायदा मिलेगा। भाजपा के मजबूत जनाधार और संगठनात्मक ढांचे के सहारे वे अपने राजनीतिक करियर को नई दिशा देने की कोशिश कर सकते हैं।
दूसरी ओर, भाजपा को भी नागौर और आसपास के क्षेत्रों में डॉ. चौधरी के स्थानीय प्रभाव का फायदा मिल सकता है। हालांकि, यह भी सच है कि चुनावी नतीजों में उनकी व्यक्तिगत सफलता सीमित रही है, इसलिए भाजपा में उनकी भूमिका और प्रभाव भविष्य की राजनीति तय करेंगे।

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