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चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर अशोक गहलोत के गंभीर सवाल

चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर अशोक गहलोत के गंभीर सवाल

मनीषा शर्मा।  राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने देश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा बयान देकर बहस को तेज कर दिया है। उन्होंने कांग्रेस नेता और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के आरोपों का समर्थन करते हुए चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। गहलोत ने आरोप लगाया कि बीजेपी के अलोकतांत्रिक बर्ताव ने लोकतांत्रिक संस्थाओं की साख को कमजोर कर दिया है और अब भारत के नागरिक भी चुनाव आयोग को शक की नजर से देखने लगे हैं। गहलोत ने कहा कि पहले चुनाव आयोग की साख इतनी मजबूत थी कि दुनिया के अन्य देश भी अपने यहां चुनाव करवाने के लिए भारत से ट्रेनिंग लेते थे। लेकिन आज स्थिति उलट चुकी है और जनता का भरोसा इस संवैधानिक संस्था से डगमगा गया है।

अशोक गहलोत ने दी राहुल गांधी के खुलासों पर प्रतिक्रिया

अशोक गहलोत ने कहा कि राहुल गांधी के हालिया खुलासों ने देश को चिंता में डाल दिया है। उन्होंने दावा किया कि जब चुनाव आयोग सत्ता पक्ष से मिलीभगत कर ले, तो लोकतंत्र खतरे में पड़ जाता है। गहलोत ने आरोप लगाया कि 2024 लोकसभा चुनाव में सिर्फ 25 सीटों का ही अंतर था और बीजेपी ने यह बढ़त चुनिंदा जगहों पर गड़बड़ी कर हासिल की। उनके अनुसार, बीजेपी ऐसे क्षेत्रों में हस्तक्षेप करती है जहां नतीजे पलट सकते हैं, और उतनी ही गड़बड़ी करती है जिससे वह जीत सुनिश्चित कर सके। यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक है।

मुख्य चुनाव आयुक्त चयन प्रक्रिया में बदलाव पर सवाल

पूर्व सीएम ने कहा कि जब से मुख्य निर्वाचन आयुक्त के चयन की समिति में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को हटाकर केंद्रीय गृह मंत्री को शामिल किया गया है, तब से चुनाव आयोग के व्यवहार में बदलाव स्पष्ट रूप से देखने को मिल रहा है। गहलोत का आरोप है कि इस बदलाव के बाद आयोग का झुकाव सत्ता पक्ष की ओर बढ़ गया है और विपक्ष के नेताओं के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि एक बार जब वे स्वयं विपक्षी प्रतिनिधिमंडल के साथ चुनाव आयोग गए थे, तो आयोग का टोन और रवैया उचित नहीं था।

वोट चोरी के आरोप और आयोग का रवैया

अशोक गहलोत ने कहा कि राहुल गांधी ने बीजेपी के पक्ष में वोट चोरी के ठोस सबूत पेश किए हैं, लेकिन चुनाव आयोग ने निष्पक्ष जांच करने की बजाय राज्य स्तरीय चुनाव आयोगों से सफाई दिलवाना शुरू कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग की यह रणनीति जनता के विश्वास को और कमजोर करेगी। गहलोत ने कहा कि यदि आयोग ईमानदार होता, तो वह वोटर लिस्ट का डाटा मशीन रीडेबल फॉर्मेट जैसे एक्सेल में उपलब्ध करवा देता, जिससे विश्लेषण मिनटों में हो सकता था।

चुनावी फर्जीवाड़ा और वोटर लिस्ट में हेराफेरी

गहलोत के अनुसार, राहुल गांधी ने 2024 लोकसभा चुनाव से ठीक पहले जारी की गई फाइनल वोटर लिस्ट की तारीख बताकर फर्जी वोटों का खुलासा किया। लेकिन कुछ राज्यों के चुनाव आयोग, जैसे उत्तर प्रदेश और कर्नाटक, 2025 की वोटर लिस्ट दिखाकर इन आरोपों को गलत साबित करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पकड़े जाने के बाद इन फर्जी नामों को हटा भी दिया जाता है, जो यह साबित करता है कि चुनावी फर्जीवाड़ा पहले से मौजूद था।

निष्पक्ष जांच की मांग

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि चुनाव आयोग सही तरीके से काम कर रहा होता, तो नेता प्रतिपक्ष या एक आम नागरिक द्वारा इतनी बड़ी गड़बड़ी सामने लाने पर निष्पक्ष जांच शुरू की जाती। उन्होंने कहा कि आयोग को इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करनी चाहिए थी, न कि सफाई देकर मामला दबाना चाहिए था।

राज्यों की वेबसाइट बंद होने का मामला

गहलोत ने एक और गंभीर मुद्दा उठाते हुए कहा कि वर्तमान में राजस्थान, महाराष्ट्र, बिहार और मध्यप्रदेश की निर्वाचन विभाग की वेबसाइटें खुल नहीं रही हैं। उन्होंने आशंका जताई कि शायद इन वेबसाइटों पर कुछ सुधार का काम चल रहा हो या जानकारी छुपाई जा रही हो। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि हो सकता है इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद ये वेबसाइट फिर से चालू कर दी जाएं।

बीजेपी पर सीधा हमला

अशोक गहलोत ने बीजेपी पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि सत्ता में आने के बाद पार्टी ने न केवल लोकतांत्रिक संस्थाओं का दुरुपयोग किया है, बल्कि उनकी विश्वसनीयता भी नष्ट कर दी है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर सवाल खड़े होना पूरे लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी है।

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