शोभना शर्मा । राजस्थान सरकार ने एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए खैरथल-तिजारा जिले का नाम बदलकर “भर्तृहरिनगर” कर दिया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इस प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए इसे राज्य की सांस्कृतिक विरासत और जनभावनाओं के अनुरूप बताया। यह निर्णय पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार द्वारा बनाए गए 17 नए जिलों में से एक जिले को नए सांस्कृतिक और धार्मिक संदर्भ में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।
क्यों बदला गया नाम?
प्रशासन ने भर्तृहरि धाम की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक महत्ता को ध्यान में रखते हुए खैरथल-तिजारा जिले का नाम “भर्तृहरिनगर” करने का निर्णय लिया। यह नाम उस क्षेत्रीय मान्यता को दर्शाता है, जो राजा भर्तृहरि के प्रति लोगों की आस्था और श्रद्धा से जुड़ी हुई है। भर्तृहरि का मंदिर अलवर जिले के सरिस्का क्षेत्र में स्थित है और वर्षों से यह स्थान लाखों श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बना हुआ है।
कौन थे राजा भर्तृहरि?
राजा भर्तृहरि उज्जैन के प्रसिद्ध शासक माने जाते हैं, जिन्होंने सांसारिक जीवन का त्याग कर अध्यात्म का मार्ग अपनाया। वे महान संत, योगी और विचारक के रूप में प्रसिद्ध हुए। उनकी तीन प्रमुख काव्य रचनाएं — नीति शतक, श्रृंगार शतक और वैराग्य शतक — आज भी साहित्य और दर्शन में उच्च स्थान रखती हैं। राजस्थान के अलवर जिले में स्थित भर्तृहरि मंदिर उन्हीं की स्मृति में स्थापित है। यह मंदिर पारंपरिक राजस्थानी स्थापत्य शैली में निर्मित है और प्राकृतिक पहाड़ियों से घिरा हुआ है। यह स्थान केवल धार्मिक ही नहीं, सांस्कृतिक पर्यटन का भी प्रमुख केंद्र है।
भर्तृहरि मेला: आस्था और जनसमागम का पर्व
हर वर्ष भाद्रपद माह की अष्टमी को भर्तृहरि मंदिर में विशाल मेला आयोजित किया जाता है। यह मेला “लख्खी मेले” के नाम से जाना जाता है क्योंकि इसमें लाखों श्रद्धालु भाग लेते हैं। सरिस्का टाइगर रिजर्व क्षेत्र में स्थित यह मंदिर और नजदीक का पांडुपोल मंदिर धार्मिक पर्यटन के प्रमुख स्थल हैं। मेला धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता का भी प्रतीक बन चुका है।
भाजपा सरकार ने 9 नए जिले किए निरस्त
भर्तृहरिनगर नामकरण के साथ ही मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सरकार ने कांग्रेस काल में बनाए गए 17 नए जिलों में से 9 को समाप्त करने का निर्णय भी लिया। शनिवार को हुई कैबिनेट बैठक में जिन 9 जिलों को निरस्त किया गया, उनमें दूदू, केकड़ी, शाहपुरा, नीमकाथाना, गंगापुरसिटी, जयपुर ग्रामीण, जोधपुर ग्रामीण, अनूपगढ़ और सांचौर शामिल हैं। भाजपा सरकार का कहना है कि ये जिले बिना पर्याप्त प्रशासनिक आधार के बनाए गए थे और इससे संसाधनों पर अनावश्यक दबाव पड़ा। सरकार अब नए जिलों की संख्या को यथोचित बनाए रखने के साथ-साथ प्रत्येक जिले की सांस्कृतिक और प्रशासनिक पहचान को सुदृढ़ करने की दिशा में कार्य कर रही है।
सांस्कृतिक पहचान को प्राथमिकता
राजस्थान सरकार द्वारा भर्तृहरिनगर जैसे नामकरण से यह संकेत मिलता है कि अब प्रशासनिक इकाइयों के निर्माण या पुनर्गठन में सांस्कृतिक पहचान और ऐतिहासिक महत्त्व को विशेष महत्व दिया जाएगा। यह कदम जनमानस की भावनाओं के अनुरूप है और स्थानीय लोकआस्था को संस्थागत पहचान देने का प्रयास भी है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इस अवसर पर कहा कि “हमारी सरकार राज्य की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और उसे आधुनिक प्रशासनिक व्यवस्था के साथ जोड़ने के लिए कटिबद्ध है। भर्तृहरिनगर का नाम केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि यह राज्य की आध्यात्मिक परंपरा का सम्मान भी है।”