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बाड़मेर रिफाइनरी से राजस्थान में आएगी क्रांति, 90% काम पुरा

बाड़मेर रिफाइनरी से राजस्थान में आएगी क्रांति, 90% काम पुरा

शोभना शर्मा। राजस्थान के रेगिस्तान में अब तेल नहीं, विकास की गूंज सुनाई दे रही है बाड़मेर ज़िले के पचपदरा में बन रही बाड़मेर रिफाइनरी  न केवल भारत की ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने में मददगार साबित होगी, बल्कि यह पूरे राजस्थान की आर्थिक और सामाजिक तस्वीर बदलने की क्षमता रखती है। राज्यसभा में बुधवार को राजस्थान बीजेपी अध्यक्ष और सांसद मदन राठौड़ द्वारा इस परियोजना को लेकर सवाल उठाए जाने पर केंद्र सरकार ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना की स्थिति पर विस्तृत जानकारी दी।

केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने बताया कि बाड़मेर रिफाइनरी का 90.3% कार्य 15 जुलाई 2025 तक पूरा हो चुका है। यह परियोजना मार्च 2026 तक पूर्ण रूप से चालू हो जाएगी, और तब से यहां पेट्रोलियम उत्पादों का व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो जाएगा। मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि रिफाइनरी की कई प्रमुख यूनिट्स जैसे क्रूड डिस्टिलेशन यूनिट (CDU), वैक्यूम डिस्टिलेशन यूनिट (VDU), फ्यूल हाइड्रो ट्रीटिंग यूनिट (FHTU), और डीजल हाइड्रो ट्रीटिंग यूनिट (DHTU) का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है।

इस परियोजना के तहत पर्यावरण और सामाजिक प्रभाव आकलन (EIA और SIA) से जुड़ी सभी प्रक्रियाएं सफलतापूर्वक पूरी की जा चुकी हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि यह प्रोजेक्ट तकनीकी दक्षता के साथ-साथ पर्यावरणीय संतुलन का भी ध्यान रखता है। इससे क्षेत्र में सतत विकास की नींव रखी गई है।

अब तक ₹52,877 करोड़ का निवेश इस रिफाइनरी प्रोजेक्ट में किया जा चुका है। यह न केवल देश के ऊर्जा क्षेत्र को मजबूती देगा बल्कि सीधे तौर पर 35,000 से अधिक लोगों को रोजगार भी प्रदान कर चुका है। राठौड़ ने राज्यसभा में यह बात ज़ोर देकर कही कि यह सिर्फ एक रिफाइनरी नहीं है, बल्कि यह राजस्थान के रेगिस्तान में एक नई जीवनधारा है। इस परियोजना से जुड़े क्षेत्र में सड़कों का निर्माण, बिजली और पानी की आपूर्ति, प्रशिक्षण केंद्रों की स्थापना जैसी सुविधाओं में बड़ा विस्तार हुआ है।

रिफाइनरी के आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में अब युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण देकर उन्हें हुनरमंद बनाया जा रहा है। इससे गांवों में ही रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं, जिससे स्थानीय लोगों का जीवनस्तर ऊंचा हो रहा है। इस प्रकार, पचपदरा रिफाइनरी केवल एक औद्योगिक इकाई नहीं, बल्कि एक सामाजिक बदलाव की प्रतीक बनकर उभर रही है।

राठौड़ ने इस प्रोजेक्ट को ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ की दिशा में एक जीवंत उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि यह रिफाइनरी भारत की विदेशी पेट्रोलियम पर निर्भरता को कम करेगी, जिससे आयात बिल में बड़ी कटौती होगी। इसके साथ ही भारत अपनी ऊर्जा ज़रूरतों के लिए अन्य देशों पर निर्भर नहीं रहेगा और निर्यात के ज़रिए विदेशी मुद्रा भी कमा सकेगा।

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