मनीषा शर्मा। राजस्थान की राजनीति में इन दिनों शिक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा टकराव देखने को मिल रहा है। भाजपा सरकार के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर द्वारा शिक्षा, पंचायती राज और संस्कृत शिक्षा विभागों में विदेशी वस्तुओं की खरीद पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के फैसले ने सियासी हलकों में हलचल मचा दी है। इस निर्णय के बाद कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। डोटासरा ने बुधवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट जारी करते हुए मदन दिलावर को ‘बौद्धिक रूप से बीमार’ तक कह डाला और उनके फैसले को “अविवेकी और अनुपयुक्त” बताया।
“बौद्धिक रूप से बीमार हैं शिक्षा मंत्री” – डोटासरा
डोटासरा ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर बौद्धिक रूप से बीमार, बेहद बीमार चल रहे हैं। उन्हें किसी अच्छे अस्पताल में इलाज और आराम की सख्त आवश्यकता है।” उन्होंने आरोप लगाया कि दिलावर हर दिन बेतुके बयान और फैसले लेकर आ रहे हैं, जिससे राज्य की शिक्षा व्यवस्था चरमरा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि यह निर्णय शिक्षा प्रणाली की आधुनिक जरूरतों और तकनीकी प्रगति को पूरी तरह नज़रअंदाज़ करता है।
छह तीखे सवालों से घेरा शिक्षा मंत्री को
डोटासरा ने अपने पोस्ट में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर से छह महत्वपूर्ण और व्यंग्यात्मक सवाल पूछे, जो उनके निर्णय की व्यावहारिकता पर सवाल खड़े करते हैं:
क्या शिक्षा विभाग की आधिकारिक वेबसाइट बंद कर दी जाएगी, क्योंकि वह किसी विदेशी कंपनी द्वारा विकसित की गई है?
क्या मंत्री जी अब वह विदेशी ब्रांड का मोबाइल फोन फेंक देंगे, जिसे वे खुद इस्तेमाल कर रहे हैं?
क्या अब स्कूलों में बच्चों को कंप्यूटर शिक्षा नहीं दी जाएगी, क्योंकि कंप्यूटर और लैपटॉप विदेशी कंपनियों के होते हैं?
क्या स्मार्ट क्लास और डिजिटल बोर्ड का उपयोग रोक दिया जाएगा, जो आधुनिक शिक्षा का हिस्सा बन चुके हैं?
क्या अब विभागीय ईमेल और कंप्यूटर आधारित फाइलें बंद कर दी जाएंगी, क्योंकि ये सभी उपकरण विदेशी तकनीक पर आधारित हैं?
क्या प्रोजेक्टर, स्कैनर और प्रिंटर जैसे उपकरणों का भी अब उपयोग नहीं किया जाएगा, क्योंकि वे भी विदेशी हैं?
इन सवालों के माध्यम से डोटासरा ने सरकार के आदेश की प्रायोगिक अव्यवहारिकता को उजागर करने का प्रयास किया है।
RSS एजेंडे को थोपने का आरोप
डोटासरा ने भाजपा सरकार और शिक्षा मंत्री पर आरोप लगाया कि वे RSS के एजेंडे को लागू करने के लिए तुगलकी फरमान जारी कर रहे हैं, जिसका सीधा नुकसान प्रदेश के लाखों विद्यार्थियों को होगा। उन्होंने कहा, “तकनीकी उपकरणों, संसाधनों और डिजिटलीकरण का उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता, पारदर्शिता और कार्य की तीव्रता को बढ़ाना है। लेकिन दिलावर जैसे मंत्री आधुनिक शिक्षा को पीछे ले जाने में जुटे हैं।”
मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने इस पूरे विवाद पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से दखल देने की मांग की। उन्होंने लिखा, “शिक्षा मंत्री प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को खोखले राष्ट्रवाद की आड़ में रसातल में ले जाने का काम कर रहे हैं। मेरा मुख्यमंत्री से आग्रह है कि प्रदेश के लाखों बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए इसका संज्ञान लें और अविचारी मंत्री का मार्गदर्शन करें।” यह स्पष्ट संकेत है कि कांग्रेस अब इस मामले को राजनीतिक हथियार बनाकर राज्य सरकार को घेरने की रणनीति पर काम कर रही है।
बयानबाजी बनाम नीति: क्या है असल मुद्दा?
मदन दिलावर ने विदेशी वस्तुओं पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा करते हुए इसे मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य से जोड़ा था। उन्होंने यह भी कहा था कि यदि कोई वस्तु भारत में उपलब्ध नहीं है, तो उसे मंत्री स्तर पर अनुमति लेकर खरीदा जा सकता है। लेकिन डोटासरा का कहना है कि इस तरह के फैसले नीति आधारित नहीं, बल्कि राजनीतिक और वैचारिक उद्देश्यों से प्रेरित हैं, जो शिक्षा के मूल उद्देश्य और आधुनिक जरूरतों को नजरअंदाज करते हैं।