मनीषा शर्मा। राजस्थान में छात्र संघ चुनाव को लेकर लंबे समय से चली आ रही खींचतान एक बार फिर सियासी गर्मी में तब्दील हो गई है। मंगलवार को जयपुर में नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के छात्रों ने जबरदस्त प्रदर्शन किया, जिसमें कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने भी भाग लिया। सचिन पायलट की मौजूदगी ने प्रदर्शन को राजनीतिक गति दी और छात्रों के मनोबल को नई ऊर्जा दी। प्रदर्शन के दौरान छात्रों और पुलिस के बीच टकराव की स्थिति बनी और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया, जिसमें खुद सचिन पायलट भी भीगते नजर आए। उन्होंने छात्रों के समर्थन में खुलकर राज्य सरकार की नीतियों की आलोचना की और चुनाव न कराए जाने को छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया।
छात्र संघ चुनावों पर सरकार का इनकार
दूसरी ओर, राज्य के डिप्टी सीएम और उच्च शिक्षा मंत्री प्रेमचंद बैरवा ने छात्र संघ चुनावों को लेकर सरकार का रुख स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि फिलहाल प्रदेश में छात्र संघ चुनाव कराना संभव नहीं है। प्रेमचंद बैरवा ने यह भी जोड़ा कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए राज्य सरकार की अभी चुनाव कराने की कोई मंशा नहीं है। इस बयान से यह स्पष्ट हो गया है कि सरकार की प्राथमिकता फिलहाल छात्र संघ चुनाव नहीं है, और यह मामला अब राजनीति और प्रशासनिक निर्णयों के बीच फंसा हुआ प्रतीत हो रहा है।
सचिन पायलट की मुखर भूमिका
सचिन पायलट ने जयपुर में प्रदर्शन के दौरान कहा कि छात्र संघ चुनाव छात्रों का संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि जब देश और प्रदेश में आम चुनाव हो सकते हैं, कॉलेज खुल सकते हैं, तो छात्र संघ चुनाव क्यों नहीं कराए जा सकते? उन्होंने सरकार पर दोगली नीति अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि छात्र आवाज उठाएंगे तो सत्ता को जवाब देना ही होगा।
बैरवा ने सचिन पायलट को ही घेरा
प्रेमचंद बैरवा ने अपने बयान में यह भी कहा कि छात्र संघ चुनावों पर रोक तो पिछली गहलोत सरकार के कार्यकाल में ही लगी थी। उन्होंने सवाल उठाया कि आज जिस मुद्दे को लेकर सचिन पायलट सड़कों पर उतर रहे हैं, क्या उस समय वे चुप थे? उन्होंने कहा कि इस सवाल का जवाब अब पायलट और गहलोत दोनों को देना होगा कि उस समय छात्र संघ चुनाव क्यों नहीं कराए गए।
भविष्य में नीति की संभावना, लेकिन अभी नहीं
डिप्टी सीएम बैरवा ने यह जरूर संकेत दिए कि राज्य सरकार आने वाले समय में छात्र संघ चुनावों को लेकर एक ठोस नीति पर विचार कर रही है, ताकि भविष्य में स्पष्ट दिशा तय की जा सके। उन्होंने कहा कि भाजपा हमेशा छात्र हितों की पक्षधर रही है, लेकिन फिलहाल की परिस्थितियों में चुनाव कराना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। यह बयान सत्तारूढ़ दल की अंदरूनी राजनीति के साथ-साथ छात्रों की मांगों और प्रशासनिक सीमाओं के बीच की खाई को स्पष्ट करता है।
NSUI का आक्रामक रुख और आने वाले दिन
NSUI ने सरकार से मांग की है कि वे जल्द से जल्द छात्र संघ चुनाव की घोषणा करें, अन्यथा यह आंदोलन पूरे प्रदेश में फैलेगा। सचिन पायलट की अगुवाई में यह विरोध प्रदर्शन केवल एक राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि एक छात्र अधिकार आंदोलन का रूप लेता जा रहा है। पायलट की सक्रियता से साफ है कि वे प्रदेश की छात्र राजनीति में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहते हैं और इसे सरकार पर दबाव बनाने के माध्यम के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।
राजनीति में बढ़ते टकराव के संकेत
छात्र संघ चुनावों को लेकर इस विवाद ने राजस्थान की कांग्रेस सरकार के आंतरिक मतभेदों को भी उजागर किया है। एक तरफ सरकार के वरिष्ठ मंत्री और डिप्टी सीएम कह रहे हैं कि चुनाव संभव नहीं है, वहीं कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व डिप्टी सीएम छात्रों के साथ सड़कों पर हैं। यह टकराव आने वाले दिनों में और अधिक बढ़ सकता है और इसका असर राज्य की शिक्षा व्यवस्था और युवाओं की राजनीति पर भी पड़ सकता है।


