शोभना शर्मा। राजस्थान की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी के भीतर लंबे समय से खिंचाव और गुटबाज़ी के संकेत मिलते रहे हैं, खासकर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और वरिष्ठ नेता व मंत्री किरोड़ी लाल मीणा के बीच रिश्तों को लेकर कई अटकलें लगाई जाती रही हैं। इस्तीफों, तीखे बयानों और सार्वजनिक मंचों से दूरियों ने यह संदेश दिया कि दोनों नेताओं के बीच सब कुछ ठीक नहीं है। मगर हालिया घटनाक्रम ने यह तस्वीर बदल दी है।
हवाई सर्वेक्षण में साथ नजर आए दोनों नेता
सोमवार को सवाई माधोपुर जिले में आई बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लेने पहुंचे मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और कृषि एवं आपदा प्रबंधन मंत्री किरोड़ी लाल मीणा एक साथ हवाई सर्वेक्षण करते दिखाई दिए। यह दृश्य केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी तक सीमित नहीं था, बल्कि यह उस राजनीतिक समीकरण का प्रतीक भी था, जो अब एकजुटता की ओर संकेत कर रहा है। मुख्यमंत्री ने बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों चकेरी, जड़ावता, मैनपुरा, धनौली और खण्डार सहित कई इलाकों का निरीक्षण किया और मौके पर उपस्थित अधिकारियों को राहत व पुनर्वास कार्य तेज करने के निर्देश दिए। इस दौरान उन्होंने मंत्री किरोड़ी लाल मीणा से सीधे फीडबैक लेकर कार्यों की समीक्षा की, जिससे दोनों नेताओं के बीच समन्वय और विश्वास की झलक भी स्पष्ट हुई।
सीएम की कार्यशैली की सराहना कर चुके हैं मीणा
हाल ही में मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने साफ किया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के साथ उनके संबंध हमेशा सकारात्मक रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि पूर्व में मीडिया में जो मतभेद प्रचारित हुए, वे अब पूरी तरह समाप्त हो चुके हैं। इसके साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री की कार्यशैली की खुलकर प्रशंसा करते हुए कहा कि सरकार जनहित के निर्णयों को प्राथमिकता दे रही है।
सियासी संदेश और पार्टी को लाभ
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव केवल दो नेताओं की व्यक्तिगत निकटता भर नहीं है, बल्कि यह भाजपा के अंदरूनी संतुलन को सुदृढ़ करने की रणनीति का हिस्सा भी है। भाजपा लंबे समय से गुटबाज़ी और असंतोष जैसी चुनौतियों से जूझ रही है। ऐसे में यदि मुख्यमंत्री और प्रमुख मंत्री एकजुट दिखते हैं, तो इससे संगठनात्मक मजबूती का संदेश जाएगा। विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि यह एकता आगामी निकाय और पंचायत चुनावों में भाजपा को बड़ा लाभ पहुंचा सकती है। जनता के बीच यह संकेत जाएगा कि पार्टी में अनुशासन और आपसी सामंजस्य कायम है। इससे विपक्ष को भी कम हमलावर होने का मौका मिलेगा।
पिछली नाराजगी और इस्तीफे की पृष्ठभूमि
उल्लेखनीय है कि इससे पहले किरोड़ी लाल मीणा ने एक महत्वपूर्ण बैठक में अनुपस्थित रहकर और मंत्रिपद से इस्तीफे की पेशकश कर यह जता दिया था कि वह सरकार से असंतुष्ट हैं। उन्होंने कई मौकों पर सार्वजनिक तौर पर फैसलों पर सवाल भी उठाए। उस समय मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की चुप्पी ने इन मतभेदों को और हवा दी थी। मगर अब जिस तरह दोनों नेता सार्वजनिक मंचों पर एक साथ दिख रहे हैं, और एक-दूसरे की कार्यशैली की सराहना कर रहे हैं, उससे स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि भाजपा आलाकमान की मध्यस्थता या आपसी संवाद से इन दरारों को भरने का काम सफल रहा है।


