मनीषा शर्मा, अजमेर । राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड आज 1 अगस्त को अपना 69वां स्थापना दिवस मना रहा है। 1957 में स्थापित इस बोर्ड ने राज्य की स्कूली शिक्षा व्यवस्था को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वर्तमान में यह संस्था हर वर्ष कक्षा 10वीं और 12वीं के करीब 20 लाख विद्यार्थियों की परीक्षा आयोजित करती है। इसके अलावा बोर्ड पर रीट (REET) जैसी अन्य प्रमुख परीक्षाओं की भी जिम्मेदारी है। लेकिन इस संस्थान के समक्ष सबसे बड़ा संकट यह है कि पिछले तीन वर्षों से इसका कोई स्थायी अध्यक्ष (चेयरमैन) नहीं है।
तीन साल से पद खाली, बोर्ड संचालन का भार प्रशासक पर
वर्ष 2022 में रीट 2021 पेपर लीक घोटाले के बाद सरकार ने तत्कालीन चेयरमैन डी.पी. जारोली को बर्खास्त कर दिया था। तब से अब तक बोर्ड का नेतृत्व किसी स्थायी अधिकारी के हाथ में नहीं सौंपा गया है। वर्तमान में अजमेर के संभागीय आयुक्त शक्ति सिंह को बोर्ड का प्रशासकीय प्रभार दिया गया है, जो एक अतिरिक्त जिम्मेदारी है।
बोर्ड का इतिहास और स्थापना से अब तक की यात्रा
राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की स्थापना 1 अगस्त 1957 को की गई थी। शुरुआत में इसका कार्यालय जयपुर के गांधी नगर क्षेत्र में स्थित कालाजी बिल्डिंग में था। पहले चेयरमैन जी.सी. चटर्जी के नेतृत्व में बोर्ड ने 1958 में पहली परीक्षा आयोजित की, जिसमें 250 स्कूलों के 29,142 विद्यार्थी शामिल हुए। 1961 में बोर्ड का मुख्यालय जयपुर से अजमेर स्थानांतरित किया गया और 1973 से यह अपना संचालन वर्तमान बहुमंजिला भवन से कर रहा है।
आज बोर्ड के अधीनस्थ स्कूलों की संख्या 34,000 से अधिक हो चुकी है और हर वर्ष परीक्षाओं में भाग लेने वाले छात्रों की संख्या 20 लाख के करीब पहुंच गई है। इसमें 10वीं, 12वीं, प्रवेशिका और वरिष्ठ उपाध्याय परीक्षाएं शामिल हैं। साथ ही बोर्ड राष्ट्रीय प्रतिभा खोज और राज्य विज्ञान प्रतिभा खोज परीक्षा जैसी प्रतिस्पर्धी परीक्षाएं भी आयोजित करता है। 2016 से रीट परीक्षा का आयोजन भी बोर्ड के अंतर्गत किया जा रहा है।
ऑनलाइन व्यवस्था और संसाधनों की कमी
बोर्ड सचिव कैलाश चंद्र शर्मा के अनुसार, स्थापना दिवस के मौके पर यह महत्वपूर्ण है कि हम संस्थान की अब तक की उपलब्धियों को याद करें। उन्होंने बताया कि समय के साथ बोर्ड ने कई नवाचार किए हैं और अधिकांश कार्य अब ऑनलाइन प्रक्रिया के अंतर्गत किए जा रहे हैं। हालांकि, स्टाफ की संख्या लगातार घट रही है, जबकि विद्यार्थियों की संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है, जिससे प्रबंधन पर बोझ बढ़ा है।
REET पेपर लीक मामला: अब तक की सबसे बड़ी चुनौती
राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी चुनौती रही है – वर्ष 2021 में आयोजित रीट परीक्षा का पेपर लीक कांड। इस मामले में तत्कालीन चेयरमैन डी.पी. जारोली को बर्खास्त किया गया। SOG (विशेष अभियोजन शाखा) ने इस मामले में अब तक कुल 131 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें मुख्य आरोपी रामकृपाल मीणा और प्रदीप पाराशर भी शामिल हैं।
SOG की जांच में खुलासा हुआ कि पेपर जयपुर स्थित शिक्षा संकुल के स्ट्रॉन्ग रूम से लीक किया गया था। मुख्य आरोपी प्रदीप पाराशर उस समय REET का जयपुर जिला कोऑर्डिनेटर था, और उसी के माध्यम से पेपर रामकृपाल मीणा को मिला। रामकृपाल ने अपने नेटवर्क के माध्यम से पेपर को कई परीक्षार्थियों तक पहुंचाया।
प्रवर्तन निदेशालय की जांच और संपत्तियों की जब्ती
SOG की कार्रवाई के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) को भी इस मामले में जांच के लिए फाइल भेजी गई। सितंबर 2024 में ED ने रामकृपाल और पाराशर के कुल चार बैंक खातों को फ्रीज किया, जिनमें 10 लाख 89 हजार रुपए जमा थे। इसके अतिरिक्त फरवरी 2022 में JDA (जयपुर विकास प्राधिकरण) ने रामकृपाल की गोपालपुरा बाइपास स्थित स्कूल और कॉलेज की तीन मंजिला बिल्डिंग को भी ढहा दिया था।
1.25 करोड़ में बिका पेपर, 50 सेंटरों तक पहुंचाया गया
SOG की रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि J-सीरीज का पेपर 1.25 करोड़ रुपए में बेचा गया था। पेपर लीक होने के बाद इसे जयपुर, टोंक, करौली, दौसा, गंगापुर सिटी, सवाई माधोपुर, सिरोही और जालोर जैसे जिलों में लगभग 50 सेंटरों तक पहुंचाया गया था। नकल गिरोह ने परीक्षा से एक दिन पहले ही छात्रों को पेपर उपलब्ध करा दिया था।
बोर्ड की साख पर संकट, लेकिन सुधार की उम्मीद
रीट पेपर लीक कांड के बाद बोर्ड की साख पर गंभीर सवाल उठे हैं। तीन वर्षों से चेयरमैन का पद खाली होने से निर्णय लेने में देरी और पारदर्शिता की कमी देखी जा रही है। स्थापना दिवस के अवसर पर यह आवश्यक हो जाता है कि बोर्ड को एक स्थायी और सक्षम नेतृत्व दिया जाए, जो संस्थान की साख को पुनः स्थापित कर सके और भविष्य की चुनौतियों का सामना प्रभावी रूप से कर सके।


