मनीषा शर्मा। जयपुर शहर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की नई कार्यकारिणी की घोषणा सोमवार सुबह होते ही विवादों में घिर गई। जिला अध्यक्ष अमित गोयल द्वारा जारी की गई इस लिस्ट में यह स्पष्ट रूप से उल्लेख था कि किस नेता की सिफारिश पर किसे कौन-सा पद दिया गया है। पोस्ट सामने आते ही सोशल मीडिया पर विरोध शुरू हो गया, जिसके चलते पार्टी को वह सूची हटानी पड़ी और इसे “कंप्यूटर ऑपरेटर की गलती” बताकर सफाई दी गई।
इस कार्यकारिणी की सूची में कुल 34 पदाधिकारी शामिल थे, जिनमें से 22 को सिफारिश के आधार पर नियुक्त किया गया बताया गया, जबकि केवल 8 लोगों को उनके “कार्य के आधार” पर नियुक्त किया गया। चार पदाधिकारियों के नामों के साथ कोई विवरण नहीं दिया गया था। सोशल मीडिया पर जारी इस लिस्ट में उपाध्यक्ष, महामंत्री, मंत्री, कार्यालय मंत्री, प्रवक्ता, आईटी संयोजक, सोशल मीडिया संयोजक, प्रकोष्ठ संयोजक और मीडिया सह संयोजक जैसे पद शामिल थे।
विशेष रूप से मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी की सिफारिश पर सबसे अधिक — कुल आठ पदाधिकारी नियुक्त किए गए। इसके अलावा केंद्रीय मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ और विधायक बालमुकुंदाचार्य की सिफारिश पर दो-दो लोगों को पद मिला। वहीं उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा, सांसद मंजू शर्मा, विधायक गोपाल शर्मा, कैलाश वर्मा, कालीचरण सराफ, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी, एबीवीपी और संघ की सिफारिश पर एक-एक व्यक्ति को कार्यकारिणी में स्थान दिया गया।
जैसे ही यह सूची सोशल मीडिया पर वायरल हुई, भाजपा कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच असंतोष फैल गया। महिला भाजपा नेता अनुराधा माहेश्वरी, जिनका नाम लिस्ट में नहीं था, उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी जताई। उनके समर्थकों ने सोशल मीडिया पर खुलकर कमेंट किए। इसी तरह, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी, अशोक परनामी और विधायक कालीचरण सराफ के समर्थकों की उपेक्षा किए जाने पर नाराजगी जाहिर की गई।
विवाद बढ़ते देख भाजपा जिला अध्यक्ष ने कुछ ही देर में पोस्ट हटाते हुए सफाई दी कि यह लिस्ट केवल प्रस्तावित थी और गलती से सार्वजनिक हो गई। नई कार्यकारिणी विधिवत रूप से बाद में घोषित की जाएगी। यह मामला अब भाजपा के भीतर सिफारिश और पारदर्शिता को लेकर गहन बहस का विषय बन गया है।


