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राजस्थान में खत्म हो सकते हैं 100 उपखंड

राजस्थान में खत्म हो सकते हैं 100 उपखंड

राजस्थान सरकार राज्य में प्रशासनिक और राजस्व इकाइयों के पुनर्गठन की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। कांग्रेस शासन के अंतिम बजट में बनाए गए 17 नए जिलों और तीन संभागों को रद्द करने के बाद अब सरकार की नजर उपखंड, तहसील और उपतहसील कार्यालयों पर है।

नई योजना के अनुसार दो से तीन तहसीलों के लिए एक उपखंड कार्यालय (SDM ऑफिस) स्थापित करने की तैयारी चल रही है। इस कदम के लागू होने पर प्रदेश के 323 उपखंडों में से करीब 100 से अधिक उपखंड खत्म किए जा सकते हैं। इससे राज्य के कुल उपखंडों की संख्या 213 के आसपास रह जाएगी।

समिति का गठन, रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया शुरू

राजस्व इकाइयों के पुनर्गठन को लेकर सरकार ने एक उच्च स्तरीय सलाहकार समिति का गठन किया है, जिसकी अध्यक्षता पूर्व आईएएस अधिकारी ललित के. पंवार कर रहे हैं। समिति को छह माह के भीतर अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपनी है।

समिति के कार्यक्षेत्र में निम्नलिखित तीन प्रमुख बिंदु शामिल हैं:

  1. प्रशासनिक इकाइयों का पुनर्गठन:
    संभाग, जिला, उपखंड, तहसील और उपतहसील जैसे ढांचे का प्रभावी संयोजन कर प्रशासनिक संरचना को और अधिक व्यावहारिक और सुलभ बनाना।

  2. पद संरचना का मूल्यांकन:
    प्रत्येक राजस्व इकाई में कर्मचारियों की संख्या, उनकी पदस्थापना, कार्यभार और आवश्यकता का विश्लेषण कर बेहतर पद संरचना की अनुशंसा करना।

  3. भौगोलिक और जन अपेक्षाओं के आधार पर रिपोर्ट:
    राज्य की विविध भौगोलिक परिस्थितियों और जन अपेक्षाओं के अनुरूप प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन पर जिलेवार सुझाव देना।

अब तक आधे जिलों से लिया जा चुका है फीडबैक

समिति अब तक राज्य के आधे से अधिक जिलों से फीडबैक प्राप्त कर चुकी है। समिति का अस्थाई कार्यालय इंदिरा गांधी पंचायतीराज संस्थान, जयपुर में स्थापित है। इसमें राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव दिनेश कुमार, राजस्व मंडल के निबंधक और सेवानिवृत्त आरएएस अधिकारी राजनारायण शर्मा सदस्य सचिव के रूप में कार्यरत हैं।

क्या होगा प्रस्तावित बदलाव का प्रभाव?

  • वर्तमान में राजस्थान में 323 उपखंड, 426 तहसील और 232 उप-तहसील कार्यरत हैं।

  • प्रस्ताव के तहत, हर दो या तीन तहसीलों के लिए एक उपखंड कार्यालय की परिकल्पना की जा रही है।

  • यदि इस प्रस्ताव को लागू किया गया, तो 100 से अधिक उपखंड समाप्त हो सकते हैं और कुल संख्या 213 पर आ सकती है।

इस परिवर्तन का सीधा असर न केवल उपखंड कार्यालयों पर बल्कि तहसील, उपतहसील, राजस्व निरीक्षक (RI) सर्कल और पटवार सर्कल पर भी पड़ेगा।

पटवार सर्कल भी हो सकते हैं कम

सरकार का यह भी मानना है कि अब डिजिटलीकरण के इस दौर में लोगों की जरूरतें बदल गई हैं।

  • नियमों के अनुसार, हर पंचायत पर एक पटवार सर्कल होना चाहिए। लेकिन फिलहाल ऐसी व्यवस्था नहीं है।

  • समिति इस दिशा में भी सुझाव दे सकती है कि दो छोटी पंचायतों पर एक पटवार सर्कल बनाया जाए।

  • इससे पटवार सर्कलों की संख्या में कटौती होगी और इसका सीधा असर भू-अभिलेख निरीक्षक कार्यालयों पर भी पड़ेगा।

अंतिम निर्णय कैबिनेट में होगा

समिति द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट पहले राजस्व विभाग को सौंपी जाएगी। इसके बाद कैबिनेट की बैठक में यह तय किया जाएगा कि किन-किन उपखंड, तहसील, उप-तहसील, आरआई सर्कल या पटवार सर्कल को घटाया या मिलाया जाए।

यह निर्णय प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण के साथ-साथ राज्य के संसाधनों की बचत और बेहतर सेवा वितरण के उद्देश्य से लिया जाएगा।

पृष्ठभूमि: पहले भी किए गए थे बड़े प्रशासनिक बदलाव

करीब छह महीने पहले ही राजस्थान सरकार ने 17 में से 9 नए जिलों और तीन नए संभागों को समाप्त करने का निर्णय लिया था। समाप्त किए गए जिलों में सांचौर, अनूपगढ़, केकड़ी, गंगापुरसिटी, दूदू, शाहपुरा, नीमकाथाना, जोधपुर ग्रामीण और जयपुर ग्रामीण शामिल हैं। इसी तरह सीकर, बांसवाड़ा और पाली संभागों को भी भंग किया गया था।

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