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कांग्रेस के दो विधायकों को कोर्ट से 1-1 साल की सजा, 11 साल पुराना मामला

कांग्रेस के दो विधायकों को कोर्ट से 1-1 साल की सजा, 11 साल पुराना मामला

शोभना शर्मा । राजस्थान की राजनीति में बुधवार को एक बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला जब जयपुर महानगर प्रथम की एसीजेएम कोर्ट-19 (ACJM-19 Court) ने कांग्रेस के दो विधायकों को एक-एक साल की सजा सुनाई। यह मामला करीब 11 साल पुराना है और सार्वजनिक रास्ता जाम करने तथा विधि विरुद्ध जमावड़े से जुड़ा हुआ है।

सजा पाने वाले विधायक हैं – लाडनूं से कांग्रेस विधायक मुकेश भाकर और शाहपुरा (जयपुर) से विधायक मनीष यादव। इन दोनों के साथ ही कुल 9 आरोपियों को अदालत ने दोषी माना है। इनमें झोटवाड़ा से कांग्रेस प्रत्याशी रहे अभिषेक चौधरी का नाम भी शामिल है।

किस मामले में हुई सजा?

यह मामला साल 2013 का है, जब राजस्थान विश्वविद्यालय (Rajasthan University) के मुख्य गेट के सामने एक छात्र प्रदर्शन हुआ था। यह प्रदर्शन छात्र राजनीति से जुड़े मुद्दों को लेकर किया गया था, जिसमें प्रदर्शनकारियों ने जेएलएन मार्ग (JLN Marg) को पूरी तरह से जाम कर दिया था। छात्रों ने सड़क पर बैठकर आवागमन को बाधित किया और यातायात पूरी तरह ठप कर दिया गया।

पुलिस ने उस समय भारतीय दंड संहिता की धारा 143 (गैरकानूनी जमावड़ा), धारा 341 (रास्ता रोकना) सहित अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। इसके बाद चार्जशीट कोर्ट में दायर की गई थी और ट्रायल की प्रक्रिया चली।

कोर्ट का फैसला

एसीजेएम कोर्ट-19, जयपुर ने बुधवार को सुनवाई के बाद सभी नौ आरोपियों को दोषी माना और प्रत्येक को एक-एक साल की साधारण कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही कोर्ट ने जुर्माना भी लगाया, हालांकि जुर्माने की राशि की जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।

कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि सार्वजनिक मार्ग को जाम कर लोगों को परेशान करना और कानून व्यवस्था को प्रभावित करना गंभीर अपराध है। दोषियों को कानून के मुताबिक दंड दिया जाना आवश्यक है।

राजनीतिक और कानूनी असर

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला कांग्रेस के लिए छवि और कानूनी स्तर पर झटका हो सकता है, क्योंकि दोनों विधायक फिलहाल सक्रिय राजनीति में हैं और आगामी चुनावों की तैयारियों में जुटे हैं। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि वे इस फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील करेंगे या नहीं।

कानूनी दृष्टिकोण से यदि सजा बरकरार रहती है, तो यह जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत उनकी विधायक पद की वैधता को भी प्रभावित कर सकती है।

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