शोभना शर्मा। राजस्थान की राजनीति में लंबे समय से चल रहे सचिन पायलट और अशोक गहलोत के बीच मतभेद की चर्चाओं पर बुधवार को एक नया अध्याय जुड़ गया। कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सार्वजनिक मंच से यह बयान देकर सबको चौंका दिया कि “मैं और पायलट कब दूर थे? हम हमेशा साथ थे और हमारी मोहब्बत भी बनी रहेगी।”
यह बयान दौसा जिले में आयोजित पूर्व केंद्रीय मंत्री राजेश पायलट की 25वीं पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित एक श्रद्धांजलि सभा के दौरान दिया गया। इस मंच पर दोनों नेता साथ नजर आए और उनके बीच किसी प्रकार की कड़वाहट की कोई झलक नहीं दिखी।
राजनीतिक धरातल पर बदले समीकरण
इस श्रद्धांजलि सभा ने सिर्फ राजेश पायलट को श्रद्धांजलि देने का कार्य नहीं किया, बल्कि कांग्रेस के भीतर की राजनीतिक तल्खियों को पिघलाने का भी संकेत दिया। बीते वर्षों में कई बार सचिन पायलट और अशोक गहलोत के बीच तीखे मतभेद सामने आए, जिनका असर राजस्थान कांग्रेस की कार्यशैली और छवि पर भी पड़ा।
लेकिन इस मंच पर दोनों नेताओं की उपस्थिति और बयानबाज़ी ने यह स्पष्ट कर दिया कि कांग्रेस आगामी रणनीति के तहत एकता की ओर बढ़ रही है, खासकर 2024 लोकसभा चुनावों के नतीजों और भाजपा के सामने मजबूती से खड़े होने के लिहाज से।
सचिन पायलट का स्पष्ट रुख: ‘रात गई, बात गई’
इस मौके पर सचिन पायलट ने भी NDTV राजस्थान से बातचीत में साफ किया कि, “अगर कभी हमारे बीच मतभेद रहे भी तो हमने उन्हें बैठकर सुलझाया। अब हमें आगे की ओर देखना है। कांग्रेस के लिए यह समय चुनौतीपूर्ण है और भाजपा से मुकाबला करने के लिए एकजुटता जरूरी है।”
उन्होंने आगे कहा कि हर व्यक्ति का कार्य करने का तरीका अलग होता है, लेकिन जब उद्देश्य समान हो तो मतभेदों को पीछे छोड़कर साथ चलना ही पार्टी हित में होता है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि “जो हुआ, सो हुआ, अब आगे की राह देखनी है।”
राजेश पायलट को श्रद्धांजलि के बहाने कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन
राजेश पायलट की पुण्यतिथि का आयोजन केवल एक श्रद्धांजलि सभा नहीं था, बल्कि यह कांग्रेस के लिए अपनी संगठनात्मक ताकत और एकजुटता दिखाने का अवसर भी बना। मंच पर एक साथ अनेक वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता मौजूद थे, जिससे स्पष्ट संकेत गया कि पार्टी अब सामूहिक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ रही है।
कार्यक्रम में इतनी भीड़ जुटी कि जब सचिन पायलट वहां पहुंचे तो उन्हें मंच तक पहुंचने में काफी वक्त लगा। कार्यकर्ताओं ने उनका जोरदार स्वागत किया, जिससे उनकी लोकप्रियता का भी संकेत मिला।
बड़े नेताओं की उपस्थिति: एकजुट कांग्रेस का संदेश
इस आयोजन में कांग्रेस के कई दिग्गज नेताओं की मौजूदगी ने इसे और भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बना दिया। इनमें शामिल रहे:
अशोक गहलोत (पूर्व मुख्यमंत्री)
गोविंद सिंह डोटासरा (प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष)
टीकाराम जूली (नेता प्रतिपक्ष)
मनोज मेघवाल, विनोद गोठवाल, रूबी किन्नर, मंगीलाल मीणा, जाकिर गेसावत, अमित चाचान
रोहित बोहरा, संजय जाटव, शिखा बराला, घनश्याम मेहर
उदयलाल अंजाना (विधायक पद के प्रत्याशी), गोविंद मेघवाल (पूर्व मंत्री)
पुष्पेंद्र भारद्वाज, राजेंद्र मूंड, चेतन डूडी (पूर्व विधायक), अभिषेक चौधरी, सोनादेवी बावरी
कुलदीप इंदोरा (वर्तमान सांसद), प्रह्लाद गुंजल (सांसद पद के प्रत्याशी)
इन नेताओं की एकजुटता और मंच पर एकसाथ खड़े होना पार्टी में सामूहिक नेतृत्व की भावना को दर्शाता है।
कांग्रेस की रणनीति: भाजपा के खिलाफ सामूहिक मोर्चा
पायलट और गहलोत दोनों ने अपने बयानों में इस बात को रेखांकित किया कि अब पार्टी को भाजपा से लड़ने के लिए मजबूती से और एकजुट होकर काम करना होगा। यह संकेत कांग्रेस की आगामी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें गुटबाजी और अंदरूनी कलह को खत्म कर संगठन को पुनर्गठित करने की कोशिशें तेज हो गई हैं।


