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जोधपुर एलिवेटेड रोड के लिए 1243.19 करोड़ स्वीकृत

जोधपुर एलिवेटेड रोड के लिए 1243.19 करोड़ स्वीकृत

शोभना शर्मा। राजस्थान के जोधपुर शहर की वर्षों पुरानी मांग अब वास्तविकता में बदलने जा रही है। जोधपुर के हृदयस्थल से होकर गुजरने वाली 7.633 किलोमीटर लंबी फोर लेन एलिवेटेड रोड के निर्माण के लिए केंद्र सरकार ने 1243.19 करोड़ रुपए की स्वीकृति दे दी है। यह सड़क राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के अधीन बनेगी, जो जोधपुर की यातायात समस्या का स्थायी समाधान बन सकती है।

एलिवेटेड रोड की संरचना और मार्ग योजना

यह एलिवेटेड रोड महामंदिर जंक्शन से प्रारंभ होकर आखलिया चौराहा के समीप समाप्त होगी। यह परियोजना राष्ट्रीय राजमार्ग 62, 25 और 125 से जोधपुर शहर को बेहतर ढंग से जोड़ेगी। रोड की कुल लंबाई 7.633 किलोमीटर होगी और यह पूर्ण रूप से चार लेन होगी।

इस परियोजना के अंतर्गत:

  • 8 बड़े और 20 छोटे जंक्शनों को एलिवेटेड लेवल पर पार करने की व्यवस्था होगी।

  • यातायात सुगमता के लिए 13 एंट्री-एग्जिट रैंप बनाए जाएंगे।

  • दोनों दिशाओं में स्लिप रोड और सर्विस रोड का निर्माण किया जाएगा।

  • पावटा सर्कल से राइकाबाग बस स्टैंड तक दो लेन की अलग व्यवस्था होगी।

  • कलेक्ट्रेट गेट, पुरी तिराहा और रेलवे स्टेशन की ओर जोड़ने वाले हिस्सों को विशेष रूप से डिजाइन किया गया है।

  • पांचवीं रोड से बारहवीं रोड तक की कनेक्टिविटी भी इस योजना का हिस्सा होगी।

ट्रैफिक सुधार और शहरी योजना में क्रांतिकारी परिवर्तन

जोधपुर शहर की जनसंख्या और वाहनों की संख्या में तीव्र वृद्धि ने मुख्य सड़कों पर यातायात दबाव बढ़ा दिया है। एलिवेटेड रोड के निर्माण से:

  • शहर में ट्रैफिक जाम की समस्या में भारी कमी आएगी।

  • यात्रा समय में औसतन 40% की कमी आने की संभावना है।

  • ईंधन की बर्बादी रुकेगी और नागरिकों को मानसिक राहत मिलेगी।

  • शहर के अंदर से गुजरने वाले भारी वाहनों के लिए वैकल्पिक मार्ग मिलेगा, जिससे मुख्य सड़कों पर दबाव घटेगा।

आर्थिक विकास को मिलेगा बल

इस परियोजना से जोधपुर के आर्थिक परिदृश्य में भी महत्वपूर्ण बदलाव आएंगे। बेहतर कनेक्टिविटी से व्यापार और उद्योगों को लाभ होगा। विशेष रूप से:

  • स्थानीय व्यापारियों को माल ढुलाई में आसानी होगी।

  • परिवहन लागत घटेगी, जिससे प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी।

  • निर्माण कार्य के दौरान स्थानीय मजदूरों को हजारों नौकरियों के अवसर मिलेंगे।

  • परियोजना से पर्यटन को भी बल मिलेगा, जिससे शहर की अर्थव्यवस्था में सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

पर्यावरणीय सुधार की संभावनाएं

एलिवेटेड रोड के कारण:

  • वाहन जाम में फंसे बिना लगातार गति से चलेंगे, जिससे प्रदूषण में कमी आएगी।

  • ईंधन की खपत में गिरावट होगी।

  • रोड के नीचे हरित क्षेत्र विकसित कर शहर के पर्यावरण को संतुलित किया जा सकेगा।

राजनीतिक पृष्ठभूमि: संघर्ष से स्वीकृति तक

प्रारंभिक योजना और कांग्रेस सरकार की पहल (2019-2020)

जोधपुर एलिवेटेड रोड की पहली घोषणा तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 2019-20 के बजट में की थी। परियोजना की प्रारंभिक लागत लगभग 1100 करोड़ आंकी गई थी और डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) बनाने के लिए 2.5 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे।

परियोजना की लंबाई पहले 6.5 किमी तय की गई थी, लेकिन वित्तीय संसाधनों की कमी के कारण इसे अमलीजामा पहनाना संभव नहीं हो सका।

राजनीतिक खींचतान और भाजपा की भूमिका (2020-2022)

2020 में राजस्थान सरकार के शहरी विकास मंत्री शांति धारीवाल ने इस परियोजना को “भौतिक रूप से असंभव” बताया और आगे नहीं बढ़ाया। इसके बाद भाजपा नेताओं ने केंद्र सरकार से इस प्रोजेक्ट को लेने की मांग की।

केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और सांसद राजेंद्र गहलोत ने केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखकर इस परियोजना को मंजूरी देने का आग्रह किया।

गडकरी की घोषणा और केंद्र का हस्तक्षेप

दिसंबर 2020 में नितिन गडकरी ने राजस्थान की कई सड़क परियोजनाओं के शिलान्यास कार्यक्रम में जोधपुर एलिवेटेड रोड को शामिल किया और इसकी लागत 1500 करोड़ रुपये बताई गई।

यह घोषणा कांग्रेस सरकार के गढ़ जोधपुर में राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी गई, क्योंकि इससे कांग्रेस की निष्क्रियता और केंद्र की सक्रियता को लेकर बड़ा संदेश गया।

एनएचएआई को सौंपने की प्रक्रिया (2022-2024)

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 2022 में व्यक्तिगत रूप से नितिन गडकरी से मिलकर इस परियोजना को राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को सौंपने का अनुरोध किया। इसके बाद केंद्र सरकार ने परियोजना को केंद्रीय फंडिंग में शामिल करते हुए एनएचएआई को जिम्मेदारी सौंप दी।

2024 में टेंडर प्रक्रिया शुरू हुई और 938.59 करोड़ रुपये की संशोधित लागत पर विस्तृत इंजीनियरिंग योजना तैयार की गई।

श्रेय की राजनीति और वर्तमान प्रतिक्रियाएं (2025)

जैसे ही केंद्र सरकार ने इस परियोजना को अंतिम स्वीकृति दी, विभिन्न राजनेताओं ने अपनी भूमिका पर प्रकाश डालना शुरू कर दिया।

  • पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि परियोजना की जड़ें कांग्रेस सरकार में हैं और DPR उन्हीं के कार्यकाल में बनी थी।

  • मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इसे राजस्थान के लिए ऐतिहासिक सौगात बताया और प्रधानमंत्री व नितिन गडकरी का आभार जताया।

  • केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि यह मोदी सरकार की दूरदृष्टि और प्रतिबद्धता का परिणाम है, जो जोधपुर को बेहतर भविष्य की ओर ले जाएगी।

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