शोभना शर्मा। भारत की समृद्ध और प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित व संवर्धित करने के उद्देश्य से देश की राजधानी दिल्ली में एक महत्वपूर्ण संवाद सम्पन्न हुआ। जयपुर के ख्यातिप्राप्त संस्कृतिकर्मी, रंगकर्मी, शास्त्रीय संगीत एवं नाट्य शोधार्थी जीतेन्द्र शर्मा ने भारत सरकार के संस्कृति, पर्यटन एवं कला मंत्रालय के कैबिनेट मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से शिष्टाचार भेंट की।
इस भेंट में भारतीय संस्कृति को जीवंत बनाए रखने, युवा पीढ़ी से जोड़ने और मंच प्रदान करने की दिशा में विस्तृत चर्चा हुई। मंत्री शेखावत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार को “भारतीय संस्कृति को समर्पित सरकार” बताया और कहा कि मंत्रालय देश की मूल सांस्कृतिक परंपराओं को पुनर्जीवित करने के लिए योजनाबद्ध ढंग से कार्य करेगा।
शुभ विचार संस्था को बताया प्रेरणास्रोत
जीतेन्द्र शर्मा ने इस अवसर पर अपनी संस्था ‘शुभ विचार’ की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह संस्था पिछले 15 वर्षों से भरतमुनि के नाट्यशास्त्र पर आधारित शास्त्रीय नाट्य परंपरा को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से कार्यरत है। संस्था ने अब तक 5000 से अधिक युवा कलाकारों को मंच प्रदान कर उनकी प्रतिभा को सामने लाने का कार्य किया है।
उन्होंने बताया कि संस्था का उद्देश्य है कि भारतीय नाट्यकला और शास्त्रीय संगीत को केवल रंगमंच तक सीमित न रखकर इसे शोध, शिक्षा और राष्ट्रीय चरित्र निर्माण का माध्यम बनाया जाए। इस दिशा में संस्था देशभर में कार्यशालाएं, मंचन और प्रशिक्षण शिविर आयोजित कर रही है।
शोध कार्य और स्वैच्छिक योगदान का प्रस्ताव
शर्मा ने यह भी साझा किया कि वे वर्तमान में राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर के संगीत विभाग से शास्त्रीय संगीत और नाट्य पर शोध कार्य कर रहे हैं। उन्होंने मंत्री को यह भी बताया कि उनका शोध कार्य केवल शैक्षणिक नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति को संरक्षित रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास है।
इस दौरान शर्मा ने मंत्रालय में स्वेच्छा से अपनी सेवाएं देने की इच्छा भी व्यक्त की ताकि वे सरकार की सांस्कृतिक योजनाओं में सक्रिय भागीदारी निभा सकें। इस पर मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें भविष्य में उचित मंच और अवसर उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया।
जीवन का उद्देश्य: संस्कृति को जन-जन तक पहुंचाना
जीतेन्द्र शर्मा बीते दो दशकों से रंगमंच, लेखन, निर्देशन, संगीत आयोजनों और शास्त्रीय मंचन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उनका लक्ष्य केवल कला प्रस्तुत करना नहीं, बल्कि उसे समाज से जोड़ना और संस्कृति को जनचेतना का विषय बनाना है। उन्होंने न केवल राजस्थान बल्कि देशभर में युवाओं को भारतीय संस्कृति, धर्म और लोक कलाओं से जोड़ने का कार्य किया है।
उनकी संस्था को गोवा सरकार द्वारा सर्वश्रेष्ठ सांस्कृतिक संस्था का पुरस्कार भी मिल चुका है। वे लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी भारत की सनातन सांस्कृतिक परंपराओं का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।


