शोभना शर्मा। राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार कारण है सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा उनका एक वीडियो, जिसमें वे एक छात्रा को अंग्रेजी की जगह हिंदी में सवाल पूछने के लिए कहते नजर आते हैं। यह वीडियो 6 जून को बारां जिले के नगर परिषद सभागार में आयोजित खुली जनसुनवाई का है।
वायरल वीडियो में क्या है?
वीडियो की शुरुआत होती है छात्रा दामिनी हाड़ा के सवाल से, जो जनसुनवाई के दौरान अंग्रेजी में अपनी बात रखना शुरू करती है। तभी शिक्षा मंत्री मदन दिलावर बीच में टोकते हैं और कान पकड़ते हुए कहते हैं, “बहन, हिंदी में बोलो, मुझे अंग्रेजी नहीं आती।” इसके जवाब में छात्रा कहती है, “सर, आप तो शिक्षा मंत्री हैं, आपको सभी भाषाओं का ज्ञान होगा।” तब मंत्री हाथ जोड़कर जवाब देते हैं, “कोई बात नहीं, आप हिंदी में ही बोलो।” यह प्रतिक्रिया जहां कुछ लोगों को विनम्र लगी, वहीं कुछ ने राज्य के शिक्षा मंत्री की अंग्रेजी न आने पर चिंता जताई।
छात्रा ने उठाए सरकारी स्कूलों के मुद्दे
बातचीत के अगले हिस्से में छात्रा दामिनी हाड़ा ने राजस्थान के सरकारी स्कूलों की स्थिति पर सवाल उठाए। उसने कहा, “सरकारी स्कूलों में बच्चों का भविष्य कैसे बेहतर होगा? क्या सरकार की कोई योजना है जिससे वे भी प्राइवेट स्कूलों जैसी सुविधाएं और टेक्नोलॉजी का लाभ ले सकें?”
इस पर मदन दिलावर ने जवाब दिया कि राज्य सरकार लगातार प्रयास कर रही है कि सरकारी स्कूलों को विकसित किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ बच्चों में प्राइवेट स्कूल का फोबिया होता है, इसीलिए वे वहां एडमिशन लेना पसंद करते हैं। लेकिन सरकार हर सरकारी स्कूल को बेहतर बनाने के लिए काम कर रही है।
बारां जिले में हुई थी जनसुनवाई
यह वीडियो बारां नगर परिषद सभागार में आयोजित खुली जनसुनवाई का है, जहां मंत्री दिलावर जन समस्याएं सुनने पहुंचे थे। इससे पहले उन्होंने जिले में चल रहे जल संरक्षण और वंदे गंगा अभियान में भाग लिया था। जनसुनवाई के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “आशीर्वाद, सम्मान, समाधान। आज बारां जिला परिषद सभागार में आयोजित जनसुनवाई में देवतुल्य नागरिकों की समस्याएं सुनीं और समाधान हेतु अधिकारियों को निर्देशित किया। हमारी सरकार नए भारत के नए राजस्थान की परिकल्पना को साकार करने के लिए संकल्पित है।”
सोशल मीडिया पर मिली मिली-जुली प्रतिक्रिया
वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कुछ लोगों ने इसे एक ईमानदार और सरल नेता का प्रतीक बताया, जो अपनी सीमाओं को खुलकर स्वीकार करता है। वहीं कुछ ने सवाल उठाए कि जब देश में शिक्षा का स्तर ऊंचा करने की बात हो रही है, तो एक शिक्षा मंत्री का अंग्रेजी न जानना चिंताजनक है। कुछ शिक्षाविदों ने यह भी कहा कि भाषा ज्ञान की कमी नीति निर्धारण में बाधक हो सकती है, खासकर तब जब शिक्षा क्षेत्र में टेक्नोलॉजी और वैश्विक समावेशन पर ज़ोर दिया जा रहा हो।


