शोभना शर्मा। राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सचिन पायलट इन दिनों अपने विधानसभा क्षेत्र टोंक के दो दिवसीय दौरे पर हैं। शुक्रवार, 6 जून को उनके दौरे का पहला दिन था, जिसमें उन्होंने ग्रामीण जीवनशैली में पूरी तरह से रच-बसकर न केवल जनसुनवाई की, बल्कि राजस्थानी पारंपरिक व्यंजन दाल-बाटी चूरमा का भी भरपूर आनंद लिया।
देसी अंदाज में वायरल हुई तस्वीरें
सचिन पायलट ने अपने टोंक दौरे की झलकियां सोशल मीडिया पर साझा कीं। तस्वीरों में वे पारंपरिक थाली में देसी खाना खाते नजर आ रहे हैं। उन्होंने तस्वीरों के साथ लिखा कि “आज दोपहर का खाना पेट भरने और दिल को खुश करने वाला रहा।” यह फोटो तेजी से वायरल हो गई और उनके देसी अंदाज को जनता खूब पसंद कर रही है।
ग्रामीण विकास कार्यों का लोकार्पण
दौरे के दौरान पायलट ने टोंक जिले की ग्राम पंचायत मोरभाटियान में विधायक निधि से स्वीकृत विकास कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने करणी सागर तालाब की फेसवाल और अंबेडकर भवन का लोकार्पण किया। इस मौके पर उन्होंने ग्रामीणों से सीधा संवाद कर उनकी समस्याओं को सुना और उन्हें आश्वस्त किया कि क्षेत्र के विकास के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि क्षेत्र में बिजली, पेयजल और अन्य मूलभूत सुविधाओं की स्थिति को लेकर अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की गई है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जमीनी स्तर पर कार्यों की गति बढ़ाई जाए और जनसुनवाई की प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाया जाए।
गुर्जर आंदोलन पर पायलट का स्पष्ट रुख
टोंक दौरे के पहले दिन पत्रकारों से बातचीत करते हुए सचिन पायलट ने गुर्जर आंदोलन को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि “अगर संविधान में दिए गए अधिकारों और बनाए गए कानूनों की पालना नहीं होती है, तो लोगों को जवाब मांगने का अधिकार है।” उन्होंने कहा कि जो एग्रीमेंट, अधिसूचना और कमिटमेंट सरकारों द्वारा किए गए हैं, उनकी धरातल पर पालना होनी चाहिए।
सचिन पायलट ने यह भी कहा कि निजी क्षेत्र में दलित और आदिवासी वर्गों के बच्चों को शिक्षा और रोजगार में समुचित अवसर नहीं मिल पा रहे हैं, जो चिंता का विषय है। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से आग्रह किया कि वे आत्ममंथन करें कि वादों के मुकाबले वास्तविकता में क्या हुआ है।


